12 साल में बने सबसे युवा ग्रैंडमास्टर! जानिए कैसे NCERT सिलेबस का हिस्सा बने अभिमन्यु मिश्रा
दुनिया के सबसे कम उम्र के चेस ग्रैंडमास्टर अभिमन्यु मिश्रा का गिनीज बुक से सीबीएसई किताबों तक का सफर। जानिए गुकेश-प्रज्ञानानंद को हराने वाले युवा खिलाड़ी के संघर्ष की कहानी।
भोपाल। दुनिया के सबसे कम उम्र के चेस ग्रैंडमास्टर 17 वर्षीय अभिमन्यु मिश्रा की कामयाबी अब सीबीएसई (CBSE) की सातवीं कक्षा के पाठ्यक्रम का हिस्सा बन चुकी है। मात्र 12 साल 4 महीने और 25 दिन की उम्र में दुनिया के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर (Youngest Chess Grandmaster) बनने का गौरव हासिल कर उनका नाम 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में दर्ज हुआ था। आज उनका यह रिकॉर्ड यूपीएससी (UPSC) की परीक्षाओं से लेकर 'कौन बनेगा करोड़पति' (KBC) तक सामान्य ज्ञान (GK) के सवाल के रूप में पूछा जाता है। जन्मदिन पर उपहार में मिले शतरंज बोर्ड और अपने ही स्कूल के प्रिंसिपल को दी गई पहली मात से शुरू हुआ यह सफर आज निरंतर नए कीर्तिमान रच रहा है। यदि शतरंज के 64 खानों को चक्रव्यूह मान लिया जाए, तो अभिमन्यु हर बाजी में उसे भेदते जा रहे हैं।
🏆 मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश और प्रज्ञानानंद को दी मात: अब टॉप 30 खिलाड़ियों में शामिल होना है अगला लक्ष्य
हाल ही में भारत के मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश को हराकर वैश्विक सुर्खियां बटोरने वाले भारतीय मूल के अमेरिकी खिलाड़ी अभिमन्यु मिश्रा की मौजूदा विश्व रैंकिंग 75 से 80 के बीच है।
अब उनका अगला लक्ष्य 2700 ELO रेटिंग हासिल करना और दुनिया के शीर्ष 30 ग्रैंडमास्टर्स में अपनी जगह बनाना है। न्यू जर्सी से भोपाल अपनी दादी गीता मिश्रा के पास आए अभिमन्यु ने एक विशेष बातचीत में बताया कि अमेरिका के न्यू जर्सी में 11वीं कक्षा में पढ़ने के बावजूद, वे भारत में अपनी बहन की सातवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक में एक मिसाल के तौर पर दर्ज हैं। वहां वस्तुनिष्ठ प्रश्नों (Objective Questions) में पूछा जाता है कि दुनिया के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर का रिकॉर्ड किसके नाम है। अभिमन्यु बताते हैं कि जीत की इस रफ्तार के पीछे रोजाना 10 घंटे की कड़ी तपस्या और कई रातों का कड़ा अभ्यास शामिल है।
👑 2.5 साल की उम्र में पहली बार छुए चेस के मोहरे: 5 साल की उम्र में प्रिंसिपल को दी थी मात
अभिमन्यु की इस सफलता की नींव उनके बचपन में ही पड़ गई थी। उनकी दादी गीता मिश्रा बताती हैं कि जब वे ढाई साल के थे, तब उन्हें किसी ने उपहार में चेस बोर्ड दिया था।
उनके पिता हेमंत मिश्रा ने इतनी छोटी सी उम्र में ही बेटे की प्रतिभा को पहचाना और उसे तराशने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जब अभिमन्यु मात्र 5 साल के थे, तब उन्होंने पहली बार अपने स्कूल के प्रिंसिपल को शतरंज में मात दी थी। पिता हेमंत का मानना है कि रातों-रात बनने वाले रिकॉर्ड्स के पीछे सालों की कठिन तपस्या होती है। वहीं खुद अभिमन्यु का कहना है कि कोविड काल के दौरान जब दुनिया में प्रतियोगिताएं बंद थीं, तब हंगरी जाकर लगातार तीन महीने खेलकर 20 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ना उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट था।
✈️ 17 की उम्र में 30 देशों की यात्रा और आत्मकथा: पासपोर्ट फुल, अब नजरें विश्व चैंपियन के खिताब पर
अभिमन्यु के नाम सबसे कम उम्र में ग्रैंडमास्टर के साथ-साथ सबसे युवा 'इंटरनेशनल मास्टर' बनने का रिकॉर्ड भी दर्ज है।
वे डी. गुकेश और आर. प्रज्ञानानंद जैसे दिग्गजों को स्विट्जरलैंड सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हरा चुके हैं। भारत में 'ग्लोबल चेस लीग' खेलने आए अभिमन्यु बेंगलुरु में महान खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद की टीम का हिस्सा रहे, जहां वे दो बार 'मैन ऑफ द मैच' चुने गए। महज 7 साल की उम्र से चेस टूर्नामेंट्स के सिलसिले में विदेश यात्राएं कर रहे अभिमन्यु अब तक दुनिया के 30 से अधिक देशों की यात्रा कर चुके हैं और अपनी जिंदगी पर एक किताब भी लिख चुके हैं। मुस्कुराते हुए अभिमन्यु कहते हैं कि उनका पासपोर्ट अब पूरी तरह भर चुका है और उनका अंतिम सपना सिर्फ और सिर्फ दुनिया का नंबर-1 'वर्ल्ड चेस चैंपियन' बनना है।
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