दफ्तरों के चक्करों से मिलेगी राहत! MP की नगर परिषदों में ई-फाइल सिस्टम, 30 हजार फाइलें होंगी डिजिटल
मध्य प्रदेश की नगर पालिकाओं व नगर परिषदों में ई-फाइल व्यवस्था लागू हो रही है। अब जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर नामांतरण तक का स्टेटस ऑनलाइन दिखेगा।
भोपाल। मध्य प्रदेश के नगर निगमों के बाद अब प्रदेश की नगर पालिकाओं और नगर परिषदों में भी ई-फाइल (E-File) व्यवस्था लागू की जा रही है। अब तक फाइलों के एक टेबल से दूसरे टेबल तक भटकने की परंपरा पर लगाम लगेगी। इस व्यवस्था के लागू होने से आम नागरिकों को अपने आवेदन या फाइल की वर्तमान स्थिति (Status) जानने के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। वहीं, कागजों और स्टेशनरी की भारी खपत घटने से पर्यावरण पर सकारात्मक असर पड़ेगा और निकायों को हर महीने लाखों रुपये की बचत होगी।
🔍 एक क्लिक में दिखेगा फाइल का पूरा मूवमेंट: काम में देरी करने वाले अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही
ई-फाइल व्यवस्था प्रभावी होने के बाद कोई भी फाइल किस अधिकारी, क्लर्क या शाखा के पास पेंडिंग है, इसकी पूरी जानकारी ऑनलाइन देखी जा सकेगी।
डिजिटल सिस्टम के जरिए यह रिकॉर्ड भी दर्ज रहेगा कि फाइल किस टेबल पर कितने दिनों तक रुकी रही और कब आगे बढ़ाई गई। इससे अनावश्यक रूप से काम लटकाने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय करना आसान हो जाएगा, जिससे जनसेवाओं में तेजी आएगी।
📁 30 हजार से ज्यादा फाइलें होंगी पूरी तरह ऑनलाइन: 16 नगर निगमों के बाद अब छोटे निकायों तक विस्तार
मध्य प्रदेश के विभिन्न नगर पालिकाओं और नगर परिषदों में फिलहाल लगभग 30 हजार नई फाइलों को ऑनलाइन फॉर्मेट में तैयार किया जा रहा है।
नागरिकों द्वारा जमा किए जाने वाले आवेदन और जरूरी दस्तावेजों को पहले स्कैन किया जाएगा, जिसके बाद उन्हें संबंधित ई-फाइल से अटैच कर आगे की कार्रवाई के लिए डिजिटल रूप से भेजा जाएगा। प्रदेश के 16 बड़े नगर निगमों में पहले से ही 4 लाख से अधिक फाइलों का डिजिटल मूवमेंट हो रहा है, जिसे अब राज्य के सभी छोटे नगरीय निकायों में विस्तारित किया जा रहा है।
📜 प्रमाण पत्र से लेकर संपत्ति नामांतरण तक के काम होंगे डिजिटल: फाइलों के गुम होने का झंझट खत्म
ई-फाइल प्रणाली का मुख्य दायरा आम जनता की रोजमर्रा से जुड़ी आवश्यक नागरिक सेवाओं पर केंद्रित रहेगा।
इनमें मुख्य रूप से जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, भवन निर्माण अनुज्ञा (Building Permission), संपत्ति नामांतरण और प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़ी फाइलों को ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकेगा। इस पारदर्शी प्रक्रिया से फाइलों के गायब होने या महीनों तक धूल खाने की पुरानी समस्या से मुक्ति मिलेगी और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।
🌿 दफ्तरों के चक्कर कम और कागज की बचत: पर्यावरण संरक्षण के साथ सरकारी खजाने की होगी बचत
इस अत्याधुनिक डिजिटल व्यवस्था का सबसे सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा, जिन्हें अब काम का स्टेटस पूछने के लिए दफ्तरों में लाइन नहीं लगानी पड़ेगी।
इसके साथ ही, बार-बार दस्तावेजों की फोटोकॉपी कराने और फाइलों का कागजी रिकॉर्ड मेंटेन करने का झंझट खत्म होगा। कागज का उपयोग न्यूनतम होने से जहां हजारों पेड़ों की रक्षा होगी, वहीं स्टेशनरी मद में होने वाले लाखों रुपये के अनावश्यक खर्च पर भी रोक लगेगी।
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