बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले 40 वैन संचालकों पर फूटा पुलिस का गुस्सा; 17 गाड़ियां सीधे जब्त
जबलपुर पुलिस ने नियमों का उल्लंघन करने वाली 40 स्कूल वैनों पर की बड़ी कार्रवाई। 17 गाड़ियां जब्त, ₹70 हजार का जुर्माना। जानें स्कूल वाहनों के नए कड़े नियम।
जबलपुर। जबलपुर पुलिस ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा को ताक पर रखकर वाहन चलाने वाले वैन संचालकों के खिलाफ एक साथ व्यापक स्तर पर बड़ी कार्रवाई की है. पुलिस और ट्रैफिक पुलिस की संयुक्त टीमों ने नियम विरुद्ध दौड़ रही 40 स्कूल वैनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन पर कुल ₹70,000 का तगड़ा जुर्माना ठोंका है. इसके साथ ही घोर लापरवाही बरतने वाले 17 वाहनों को मौके पर ही जब्त कर पुलिस थाने में खड़ा करवा दिया गया है. पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि इन गाड़ियों में अनाधिकृत (बिना अनुमति वाली) गैस किट लगी पाई गई थी और क्षमता से कहीं ज्यादा बच्चों को भेड़-बकरियों की तरह ठूंस-ठूंस कर बैठाया गया था.
🛑 2. चंद रुपयों के लिए दांव पर मासूमों की जिंदगी: सीएनजी के बजाय एलपीजी से दौड़ रही थीं गाड़ियां
आमतौर पर देखा जाता है कि विद्यालयों में पढ़ने वाले मासूम बच्चे रोजाना वैन के जरिए ही स्कूल आते-जाते हैं. लेकिन कई वैन संचालक महज चंद रुपयों की बचत करने के चक्कर में इन गाड़ियों में अवैध रूप से गैस किट का धड़ल्ले से इस्तेमाल करते हैं. कई स्कूल वाहनों में ऐसी अनाधिकृत गैस किट लगी होती हैं, जो सुरक्षित सीएनजी (CNG) की बजाय घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर से चलती हैं, जिससे हर वक्त किसी बड़े हादसे या ब्लास्ट का खतरा बना रहता है.
लापरवाही का आलम: जमीनी हकीकत यह है कि जिस वैन की कानूनी क्षमता केवल 8 बच्चों को बैठाने की होती है, उसमें कमाई के लालच में 15 से अधिक बच्चों को बैठा लिया जाता है. यह खतरनाक नजारा पूरे मध्य प्रदेश में लगभग एक जैसा ही है. अक्सर देखा गया है कि जब इन वैन संचालकों की लापरवाही से कोई दर्दनाक दुर्घटना हो जाती है, तब जाकर प्रशासनिक महकमे में हो-हल्ला मचता है. लेकिन जबलपुर पुलिस ने इस बार किसी हादसे का इंतजार न करते हुए पहली बार ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर इन लापरवाह ऑपरेटरों पर यह जोरदार एक्शन लिया है.
📢 3. यातायात पुलिस की स्कूल प्रबंधनों को सख्त हिदायत: सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का पालन अनिवार्य
जबलपुर के एडिशनल एसपी (ASP) सूर्यकांत शर्मा ने इस कड़े एक्शन के बारे में जानकारी देते हुए मीडिया को बताया:
यातायात पुलिस ने इस संबंध में जिले के सभी स्कूल संचालकों और वाहन चालकों को बेहद कड़े निर्देश जारी किए हैं. उन्हें स्पष्ट रूप से आदेश दिया गया है कि बच्चों को स्कूल परिसर की बाउंड्री वॉल के अंदर ही सुरक्षित रूप से चढ़ाया और उतारा जाए, ताकि मुख्य सड़कों पर कोई हादसा न हो. पुलिस ने जोर देकर कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का शत-प्रतिशत पालन करना अनिवार्य होगा.
⚖️ 4. क्या कहता है मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश? स्कूली वाहनों के लिए इन 8 नियमों को जानना है जरूरी
स्कूली बच्चों के सुरक्षित आवागमन को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने एक साथ दाखिल की गई सात जनहित याचिकाओं पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए चलने वाले निजी और स्कूल वाहनों के संचालन में भारी लापरवाही बरती जा रही है. अदालत ने मध्य प्रदेश के प्रत्येक जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP) को सीधे यह जिम्मेदारी सौंपी थी कि वे स्कूली बच्चों को ले जाने वाले सभी वाहनों में निम्नलिखित नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करवाएं, अन्यथा संचालकों पर सीधे एफआईआर (FIR) और जब्ती की कार्रवाई की जाए:
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स्पष्ट पहचान: प्रत्येक स्कूली वाहन पर बड़े और स्पष्ट अक्षरों में 'स्कूल बस' या 'स्कूल वैन' लिखा होना अनिवार्य है.
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योग्य चालक: वाहन चालक के पास वैध कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस के साथ-साथ भारी वाहन या स्कूली वाहन चलाने का पर्याप्त अनुभव होना चाहिए.
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नो ओवरलोडिंग: स्कूली वैन या बस में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाना (ओवरलोडिंग) पूरी तरह प्रतिबंधित है. वाहन के रजिस्ट्रेशन कार्ड में दर्ज सीटों के अनुसार ही बच्चे बैठेंगे.
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आपातकालीन उपकरण: हर स्कूल वैन या बस के भीतर एक चालू हालत में फर्स्ट-एड बॉक्स (प्राथमिक चिकित्सा किट) और वैध अग्निशामक यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) का होना अति आवश्यक है.
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गति पर नियंत्रण: स्कूली वाहनों में गति को नियंत्रित करने के लिए 'स्पीड गवर्नर' लगा होना अनिवार्य है और उन्हें प्रशासन द्वारा निर्धारित गति सीमा के भीतर ही चलना होगा.
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सुरक्षित द्वार: वैन या बस में सुचारू रूप से काम करने वाला आपातकालीन निकास (Emergency Exit) तथा पूरी तरह सुरक्षित दरवाजों और खिड़कियों की व्यवस्था होनी चाहिए.
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प्रशिक्षित अटेंडेंट: बच्चों को सुरक्षित उतारने और चढ़ाने के लिए वाहन में एक प्रशिक्षित अटेंडेंट या हेल्पर (सहायक) का होना जरूरी है.
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स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही: बच्चों की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी केवल अकेले ड्राइवर की नहीं हो सकती. स्कूल प्रबंधन को अपने यहाँ आने-जाने वाले सभी निजी व अनुबंधित वाहनों की पूरी जानकारी रखनी होगी और समय-समय पर उन पर नजर रखनी होगी.
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