तालू और टॉन्सिल के आर-पार फंसा था ब्रश, भोपाल में डॉक्टरों ने की बेहद जटिल और सफल सर्जरी

भोपाल के हमीदिया अस्पताल में डॉक्टरों ने मूक-बधिर बच्चे के गले में फंसे टूथब्रश के टुकड़े को जटिल सर्जरी से सुरक्षित निकाला। बिना चीरा लगाए बचाई मासूम की जान।

Jul 17, 2026 - 19:58
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तालू और टॉन्सिल के आर-पार फंसा था ब्रश, भोपाल में डॉक्टरों ने की बेहद जटिल और सफल सर्जरी

भोपाल। राजधानी भोपाल में गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) और हमीदिया अस्पताल के डॉक्टरों ने एक 5 वर्षीय मासूम की जान बचाते हुए एक बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है. बच्चे के गले में टूथब्रश का टूटा हुआ हिस्सा इस तरह से फंस गया था कि उसकी सांसें कभी भी रुक सकती थीं. डॉक्टरों की उत्कृष्ट सूझबूझ और कई विभागों के समन्वित प्रयासों से बिना गले में बाहरी चीरा लगाए (ट्रेकियोस्टॉमी के बिना ही) टूथब्रश का टुकड़ा पूरी तरह सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.

👦 2. पश्चिम बंगाल का रहने वाला है मूक-बधिर बच्चा: कई घंटों की देरी से बिगड़ी थी हालत

मिली जानकारी के अनुसार, यह 5 साल का मासूम मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला है और वह बोल व सुन नहीं सकता (मूक-बधिर) है. सुबह के समय जब वह ब्रश कर रहा था, तभी अचानक टूथब्रश बीच से टूट गया और उसका ऊपरी ब्रिसल्स वाला हिस्सा सीधे उसके गले में गहराई तक चला गया. हादसे के बाद घबराए परिजन पहले काफी देर तक अपने स्तर पर ही उसे निकालने का प्रयास करते रहे. जब सफलता नहीं मिली, तो वे कई घंटों की देरी के बाद उसे हमीदिया अस्पताल के आपातकालीन विभाग लेकर पहुंचे.

अस्पताल पहुंचते समय बच्चे की स्थिति: तब तक देरी हो जाने के कारण बच्चे की हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी. उसके तालू (Palate) में अंदरूनी सूजन आ गई थी, मुंह में खून और लार भरी हुई थी. वह गंभीर दर्द के कारण कुछ भी निगल नहीं पा रहा था और मुंह से लगातार लार बह रही थी. श्वसन नली में अवरोध होने के कारण उसे सांस लेने में भी भारी परेशानी होने लगी थी.

🩺 3. तालू और टॉन्सिल में आड़ा फंसा था ब्रश: एनेस्थीसिया देना था सबसे बड़ा जोखिम

प्रारंभिक जांच में डॉक्टरों ने पाया कि टूथब्रश का टूटा हुआ हिस्सा तालू के पीछे जाकर आड़ा फंस गया था और उसका नुकीला सिरा टॉन्सिल में गहराई तक धंस चुका था. डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि यदि उसे सीधे बाहर खींचने की कोशिश की जाती, तो अंदरूनी नसें फटने से भारी रक्तस्राव (Bleeding) हो सकता था, जिससे गले के महत्वपूर्ण ऊतकों को गंभीर नुकसान पहुंचता.

ईएनटी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कीर्ति वाई.के. ने बताया:

🔄 4. बिना चीरा लगाए घुमाकर निकाला टूथब्रश का टुकड़ा: डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने पाई सफलता

ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. सोनल अवस्थी पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए स्वयं ऑपरेशन थिएटर में मौजूद रहीं. वहीं, डॉ. वंदना ने अत्यंत सावधानी और विशेषज्ञता के साथ बच्चे का सफल इंट्यूबेशन किया. डॉक्टरों ने बताया कि यदि मुंह के रास्ते श्वास नली में सुरक्षित ट्यूब डालना संभव नहीं होता, तो मजबूरी में गले में बाहर से चीरा लगाकर 'ट्रेकियोस्टॉमी' करनी पड़ती. हालांकि, विशेषज्ञों की टीम ने सफलतापूर्वक एयरवे सुरक्षित कर लिया और इस बड़े चीरे की जरूरत नहीं पड़ी.

  • सर्जरी की अनूठी तकनीक: सर्जरी के दौरान ईएनटी टीम ने देखा कि टूथब्रश का हिस्सा गले में आड़ा फंसा हुआ था. डॉक्टरों ने सूझबूझ दिखाते हुए टूथब्रश के टुकड़े को पहले बेहद सावधानी से धीरे-धीरे घुमाकर सीधी (वर्टिकल) स्थिति में लाया और फिर मुंह के रास्ते बिना किसी रगड़ के सुरक्षित बाहर खींच लिया. इस बारीक प्रक्रिया से गले के अंदरूनी हिस्से को कोई अतिरिक्त नुकसान नहीं पहुंचा.

  • इन डॉक्टरों की टीम रही शामिल: इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने में ईएनटी विभाग की डॉ. स्मिता सोनी, डॉ. कीर्ति वाई.के., एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. सोनल अवस्थी, डॉ. वंदना सहित दोनों विभागों के सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

📢 5. चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. अजीत मीना की अपील: बच्चों के ब्रश को लेकर अभिभावक बरतें ये सावधानी

इस सफल ऑपरेशन के बाद प्रसिद्ध चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. अजीत मीना ने सभी अभिभावकों से एक अत्यंत महत्वपूर्ण अपील की है:

  • उम्र के अनुसार चयन: छोटे बच्चों को हमेशा उनकी उम्र के अनुसार निर्मित, प्रमाणित, सुरक्षित और मजबूत ग्रिप वाले टूथब्रश ही दें. लोकल या कमजोर प्लास्टिक वाले ब्रश बिल्कुल न खरीदें.

  • निगरानी जरूरी: बच्चे जब भी सुबह या रात को ब्रश करें, माता-पिता या घर का कोई बड़ा सदस्य उन पर लगातार सीधी निगरानी रखे. बच्चे को ब्रश मुंह में लेकर भागने या खेलने न दें.

  • स्वयं प्रयास करने से बचें: यदि दुर्भाग्यवश किसी बच्चे के गले में कोई बाहरी वस्तु या सिक्का फंस जाए, तो उसे उंगली डालकर या खुद से खींचकर निकालने की कोशिश कतई न करें. ऐसा करने से वह वस्तु और अंदर धंस सकती है या श्वास नली बंद हो सकती है. ऐसे गंभीर मामलों में बिना एक भी सेकंड गंवाए तुरंत नजदीकी बड़े अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ के पास पहुंचना चाहिए.

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