दुर्घटना में मदद करने पर मिलेंगे ₹25,000; उज्जैन में चाय-पंचर वालों को दी जा रही CPR ट्रेनिंग
उज्जैन में सड़क दुर्घटनाओं में मौतें रोकने के लिए 'जन प्रहरी' अभियान शुरू हुआ है। इसके तहत हाईवे किनारे दुकानदारों को CPR ट्रेनिंग, मेडिकल किट और राहवीर योजना के तहत ₹25,000 का पुरस्कार मिलेगा।
सड़क हादसों में कई लोगों की जान सिर्फ इसलिए चली जाती है, क्योंकि घायलों को समय पर (गोल्डन ऑवर में) चिकित्सीय मदद नहीं मिल पाती. अक्सर आसपास मौजूद लोग भी पुलिसिया पूछताछ और कानूनी कार्रवाई के डर से घायलों की मदद करने से कतराते हैं. लेकिन अब मध्य प्रदेश में इस ढर्रे को बदलने की एक बड़ी और मानवीय कोशिश शुरू की गई है. उज्जैन जिले से इस दिशा में एक अनूठे 'जन प्रहरी' अभियान का शंखनाद हुआ है.
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) श्रेयांश कुमठ ने बताया कि यह मूल रूप से एक स्वयंसेवी नेटवर्क है, जिसमें हाईवे के आसपास रहने या व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल स्थानीय लोगों को जोड़ा जा रहा है. इसमें मुख्य रूप से हाईवे किनारे चाय की टपरी चलाने वाले, पंचर की दुकान वाले, पेट्रोल पंप कर्मी, होटल-रेस्टोरेंट के कर्मचारी, गुमटी संचालक और स्थानीय ग्रामीण शामिल हैं.
उज्जैन पुलिस, जिला पंचायत, स्वास्थ्य विभाग और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के आपसी समन्वय से इन सभी को विशेष तकनीकी ट्रेनिंग दी जा रही है. अब तक इस अभियान से 1,500 से अधिक स्वयंसेवक जुड़ चुके हैं. इन सभी को पुलिस, चिकित्सा और आरटीओ के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ा गया है और प्रशासन की ओर से उन्हें एक 'मेडिकल फर्स्ट-एड किट' भी मुहैय्या कराई जा रही है.
जब भी हाईवे पर कोई आपातकालीन दुर्घटना होगी, तो एंबुलेंस या पुलिस के पहुंचने से पहले ही जन प्रहरी मौके पर राहत कार्य शुरू कर देगा. इसकी पूरी प्रक्रिया क्रमबद्ध तरीके से तय की गई है:
इस जनहितैषी अभियान से समाज का कोई भी जिम्मेदार और जागरूक नागरिक जुड़ सकता है. विशेषकर निम्नलिखित वर्गों को प्राथमिकता दी जा रही है:
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चाय-नाश्ते के होटल एवं ढाबा संचालक
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पंचर एवं ऑटो मोबाइल रिपेयरिंग मिस्त्री
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पेट्रोल पंप कर्मचारी और गुमटी संचालक
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ग्रामीण क्षेत्रों के सरपंच, पंचायत सचिव और नगर/ग्राम रक्षा समिति के सदस्य
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नियमित रूप से हाईवे पर सफर करने वाले या रहने वाले ग्रामीण
रजिस्ट्रेशन की आसान प्रक्रिया:
सीईओ श्रेयांश कुमठ के अनुसार, इसके लिए जिला पंचायत ने 'जनसेवा प्रहरी' पोर्टल और मोबाइल ऐप तैयार किया है. स्वयंसेवक www.jansewaprahari.in पर जाकर अपना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. दस्तावेजों के ऑनलाइन सत्यापन (Verification) के बाद उन्हें सीपीआर और फर्स्ट-एड की ट्रेनिंग दी जाएगी और सफल होने पर एक आधिकारिक प्रमाणपत्र व मेडिकल किट प्रदान की जाएगी. किसी भी आपातकालीन स्थिति में मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर 108, 112 और 100 या ईमेल jansewaprahari@gmail.com पर भी संपर्क किया जा सकता है.
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मदद करने वाले नागरिकों को किसी भी प्रकार की कानूनी अड़चन का सामना नहीं करना पड़ेगा. इस योजना के तहत मिलने वाले लाभ और सुरक्षा को नीचे दी गई तालिका में समझा जा सकता है:
| लाभार्थी वर्ग | मिलने वाला लाभ / सुरक्षा कवच | मुख्य उद्देश्य |
| मददगार नागरिक (राहवीर) | ₹25,000 तक का नगद पुरस्कार, प्रशस्ति पत्र और सार्वजनिक सम्मान | पुलिस या कोर्ट-कचहरी के अनावश्यक चक्करों और पूछताछ से पूर्ण मुक्ति. |
| सड़क हादसे में घायल व्यक्ति | केंद्र व राज्य सरकार की योजना के तहत ₹1.5 लाख तक का पूर्णतः कैशलेस (मुफ्त) इलाज | गोल्डन ऑवर में बिना पैसों की चिंता किए सरकारी या निजी अस्पताल में तुरंत उपचार शुरू होना. |
ट्रैफिक डीएसपी दिलीप सिंह परिहार ने बताया कि पहले चरण के तहत उज्जैन-इंदौर हाईवे पर स्थित 20 सबसे खतरनाक दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट्स) को चुना गया है. यहाँ सबसे पहले स्वयंसेवकों को सक्रिय कर ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसके बाद इसका विस्तार पूरे जिले के अन्य हाईवे और ग्रामीण मार्गों पर किया जाएगा.
वहीं, एएसपी आलोक शर्मा ने इस अभियान के वैज्ञानिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा:
पिछले एक वर्ष में उज्जैन जिले के 6 जागरूक नागरिकों ने अपनी सूझबूझ से कई घायलों की जान बचाकर 'राहवीर' का दर्जा हासिल किया है. प्रशासन अब इनके कार्यों का सत्यापन कर इन्हें राहवीर योजना के तहत पुरस्कृत करने जा रहा है. इन नायकों के नाम इस प्रकार हैं:
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बृजलाल मेवाणी (गोवर्धनधाम कॉलोनी)
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सुमित सेन
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रवि चौहान
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अंकित भार्गव
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राकेश नायक
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अनिल बचानिया
प्रेरणादायी कहानियां:
एक निजी कंपनी में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत 48 वर्षीय बृजलाल मेवाणी ने बताया कि 22 मई की रात करीब 10:30 बजे जब वे केशवला फाटक क्षेत्र से गुजर रहे थे, तब एक तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से एक छोटी बच्ची सड़क पर गिर गई. बच्ची के सिर से काफी खून बह रहा था. बृजलाल ने बिना डरे बच्ची को अपनी गोद में उठाया और तुरंत अस्पताल पहुंचाया. बाद में परिजनों के आने पर बच्ची का सामान और गाड़ी की चाबी सौंपकर वे चुपचाप अपने घर लौट गए.
इसी तरह, एक अन्य राहवीर अनिल बचानिया ने मुरलीपुरा स्थित कुत्ता बावड़ी चौराहे पर हुए एक भयानक हादसे में गंभीर रूप से घायल 15 वर्षीय बालिका किरण चौधरी को 'गोल्डन ऑवर' में जिला चिकित्सालय (चरक भवन) पहुंचाया. समय पर इलाज मिलने के कारण आज वह बालिका पूरी तरह स्वस्थ है. ये कहानियां साबित करती हैं कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं है.
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