हूती जंग में अकेले पड़ा सऊदी अरब! क्राउन प्रिंस की गुहार पर डोनाल्ड ट्रंप ने मदद से किया इनकार

हूती विद्रोहियों के हमलों से घिरे सऊदी अरब को अमेरिका, पाकिस्तान और तुर्की से झटका लगा है। डोनाल्ड ट्रंप ने मदद से इनकार कर दिया है। पढ़ें पूरे राजनीतिक समीकरण।

Sep 11, 2026 - 18:51
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हूती जंग में अकेले पड़ा सऊदी अरब! क्राउन प्रिंस की गुहार पर डोनाल्ड ट्रंप ने मदद से किया इनकार

मिडिल ईस्ट की गहराती जंग में सऊदी अरब इस वक्त खुद को पूरी तरह अलग-थलग पा रहा है। यमन के हूती विद्रोही लड़ाके लगातार सऊदी अरब के ठिकानों पर हमलावर हैं। इन लड़ाकों से निपटने के लिए सऊदी को पाकिस्तान, तुर्की और अमेरिका से सैन्य व रणनीतिक मदद की उम्मीद थी, लेकिन अब तक तीनों ही देशों ने अपना पल्ला झाड़ लिया है। सबसे ताजा और बड़ा झटका अमेरिका की तरफ से लगा है।

अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस (Axios) की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सीधी मदद मांगी थी, लेकिन ट्रंप ने सहायता देने से साफ इनकार कर दिया है। बताया जा रहा है कि ईरान के खिलाफ हालिया जंग में सऊदी द्वारा अमेरिका का साथ न देने के कारण अब अमेरिका ने हूती और सऊदी की लड़ाई से खुद को पूरी तरह किनारे कर लिया है।

🚫 ट्रंप ने खारिज की क्राउन प्रिंस की गुहार, अमेरिका नहीं करेगा हस्तक्षेप

रिपोर्ट के अनुसार, क्राउन प्रिंस ने राष्ट्रपति ट्रंप से वार्ता के दौरान कहा कि हूती विद्रोही लाल सागर (Red Sea) की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। यदि वे बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य (Bab al-Mandab Strait) पर पूरी तरह नियंत्रण कर लेते हैं, तो इसका बहुत बड़ा असर वैश्विक व्यापार पर पड़ेगा। मोहम्मद बिन सलमान ने जोर देकर कहा कि हूती विद्रोहियों को पीछे धकेलने के लिए वाशिंगटन को तुरंत आगे आना चाहिए।

हालांकि, बैठक की जानकारी रखने वाले वरिष्ठ अधिकारियों ने एक्सियोस को बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस अनुरोध को सीधे तौर पर ठुकरा दिया। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका हूती मामले में किसी भी नए सैन्य हस्तक्षेप पर विचार नहीं कर रहा है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में अमेरिका और हूती विद्रोहियों के बीच एक अनौपचारिक समझौता हुआ था, जिसे वाशिंगटन तोड़ना नहीं चाहता।

🔍 इन 3 प्रमुख कारणों से वैश्विक मंच पर अलग-थलग पड़ा सऊदी अरब
1. ईरान युद्ध में अमेरिका का साथ न देना

फरवरी 2026 में जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी, तब उसे सऊदी अरब से पूर्ण समर्थन की उम्मीद थी। हालांकि, सऊदी ने तटस्थ (Neutral) रुख अपनाते हुए अमेरिका से साफ कह दिया कि रियाद इस युद्ध का समर्थन नहीं करता। सऊदी के इस कदम से अमेरिकी फाइटर जेट्स को परिचालन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा; यहां तक कि सऊदी ने अमेरिकी लड़ाकू विमानों को रीफ्यूलिंग (ईंधन भरने) के लिए अपने एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति भी नहीं दी। राष्ट्रपति ट्रंप ने सऊदी के इस रवैये पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर की थी। अब जब सऊदी खुद हूती हमलों में फंसा है, तो अमेरिका ने भी मदद से हाथ खड़े कर दिए हैं।

2. पाकिस्तान और तुर्की पर अत्यधिक निर्भरता

सऊदी की दूसरी रणनीतिक भूल पाकिस्तान और तुर्की पर अत्यधिक भरोसा करना रही। कुछ ही समय पहले सऊदी ने तुर्की के साथ मिलकर पाकिस्तान के नेतृत्व में 'मक्का रक्षा समझौता' (Mecca Defense Pact) किया था। इस संधि के तहत किसी एक देश पर हमला होने पर उसे तीनों देशों पर हमला माना जाना था। सऊदी को उम्मीद थी कि संकट के समय पाकिस्तान और तुर्की उसकी रक्षा के लिए आगे आएंगे, लेकिन हूती संघर्ष पर पाकिस्तान ने पूरी तरह चुप्पी साध ली है। रॉयटर्स के अनुसार, पाकिस्तान ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों पर हमला करके तेहरान को सीधे तौर पर नाराज नहीं करना चाहता।

3. ईरान से दुश्मनी और UAE के साथ बढ़ा तनाव

सऊदी अरब के संबंध ईरान से लंबे समय से खराब हैं ही, साथ ही संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ भी उसके मतभेद गहरे हो चुके हैं। यमन में नियंत्रण को लेकर सऊदी ने पूर्व में यूएई के टैंकरों पर कार्रवाई की थी और ईरान युद्ध के दौरान भी यूएई की कोई मदद नहीं की थी। ऐसे में अब यूएई भी इस संकट में सऊदी से दूरी बनाए हुए है।

🛢️ हूती क्यों हैं सऊदी के खिलाफ और कैसे प्रभावित हो रहा है तेल उत्पादन?

हूती यमन का शिया विद्रोही समूह है, जिसे ईरान का करीबी माना जाता है। यमन की सीमाएं सीधे सऊदी अरब से लगती हैं। हूती विद्रोही यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के खिलाफ गृहयुद्ध लड़ रहे हैं, जिसमें सऊदी अरब यमनी सरकार का समर्थन करता है। यही कारण है कि हूती के निशाने पर हमेशा सऊदी अरब रहा है।

हालिया वैश्विक संकट के बीच ईरान की मदद से हूतियों ने लाल सागर में नाकाबंदी बढ़ा दी है। 'ब्लूमबर्ग' की रिपोर्ट के अनुसार, इसके चलते सऊदी का तेल उत्पादन जुलाई के 8.1 मिलियन बैरल प्रति दिन से घटकर अगस्त में 6.24 मिलियन बैरल प्रति दिन रह गया है—यानी सीधे 23 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है।

🛡️ गुरिल्ला युद्ध में माहिर हूती लड़ाकों से सीधे टकराने से क्यों कतरा रही हैं वैश्विक शक्तियां?

हूती लड़ाकों को बेहद दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में 'गुरिल्ला युद्ध' (Guerrilla Warfare) लड़ने में महारत हासिल है। वर्ष 2025 में अमेरिका ने इन लड़ाकों के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया था, लेकिन उन्हें पूरी तरह बेअसर करने में सफलता नहीं मिली। इजराइल द्वारा किए गए प्रयास भी पूरी तरह सफल नहीं हो सके।

इसके अतिरिक्त, हूती विद्रोहियों का नियंत्रण लाल सागर के उस अति-महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर है, जहां से दुनिया के कुल तेल और गैस का लगभग 12 प्रतिशत परिवहन होता है। किसी भी बड़े सैन्य टकराव से इस जलमार्ग के पूरी तरह बाधित होने का खतरा है, यही वजह है कि कोई भी देश इस समय हूती के खिलाफ सीधे युद्ध में उतरने का जोखिम नहीं लेना चाहता।

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