दतिया उपचुनाव में फूट से पहले संभली कांग्रेस, जीतू पटवारी के साथ मंच पर दिखे नाराज अवधेश नायक
दतिया विधानसभा उपचुनाव 2026 को लेकर बीजेपी और कांग्रेस में शह-मात का खेल जारी है। जानिए नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने और अवधेश नायक की नाराजगी के बीच दतिया का पूरा जातीय समीकरण।
दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव दोनों ही प्रमुख दलों के लिए नाक का सवाल बन चुका है. राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है कि दतिया के दिल की चाबी आखिर किसके पास है? क्या कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने का असर इस बार ईवीएम (EVM) तक जाएगा? दतिया के जटिल जातीय समीकरणों को साधने के लिए दोनों ही दलों ने अपने सबसे मजबूत मोहरों को मैदान में तैनात कर दिया है. जहां एक ओर कांग्रेस में शामिल हुए अवधेश नायक के पैर जमाने से पार्टी मजबूत दिखने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर बीजेपी के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का विषय बन गई है. इस उपचुनाव में कुछ खास जातियां बेहद निर्णायक भूमिका में हैं, जिन पर दोनों दलों की नजरें टिकी हैं.
🤝 2. कांग्रेस में फूट से पहले बड़ा डैमेज कंट्रोल: जीतू पटवारी के साथ मंच पर दिखे नाराज अवधेश नायक
दतिया उपचुनाव के बीच शनिवार को कांग्रेस की ओर से एक महत्वपूर्ण वीडियो जारी किया गया, जिसने राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज कर दी हैं. इस वीडियो में कांग्रेस से नाराज बताए जा रहे कद्दावर नेता अवधेश नायक की कांग्रेस के मुख्य मंच पर 'ग्रैंड एंट्री' दिखाई गई है.
पर्दे के पीछे की रणनीति:
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के साथ साझा किए गए इस वीडियो में खास तौर पर अवधेश नायक की मौजूदगी को हाइलाइट किया गया. दरअसल, कांग्रेस द्वारा घनश्याम सिंह को उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद से ही अवधेश नायक अंदरूनी तौर पर नाराज चल रहे थे. दतिया में भारी संख्या में मौजूद ब्राह्मण वोटरों को देखते हुए दोनों ही दलों की निगाहें अवधेश नायक के अगले कदम पर टिकी थीं. भाजपा नेता भी लगातार उनके संपर्क में थे और अफवाह थी कि वे वापस बीजेपी में लौट सकते हैं.
हालांकि, कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने बंद कमरे में अवधेश नायक से लंबी चर्चा कर इस संभावित टूट को समय रहते संभाल लिया. मंच से कांग्रेस नेता अवनीश भार्गव ने कहा कि अब बीजेपी द्वारा फैलाई जा रही सभी अफवाहों पर पूरी तरह विराम लग गया है.
📊 3. दतिया के रण में जातियों का दम: सामाजिक समीकरण साधने के लिए दोनों दलों ने उतारे दिग्गज
दतिया विधानसभा उपचुनाव में जातिगत समीकरण जीत और हार का सबसे बड़ा आधार तय कर रहे हैं. यही वजह है कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही दलों ने यहाँ फूंक-फूंक कर कदम रखा है और जातिगत आंकड़ों के हिसाब से अपने स्टार प्रचारकों की तैनाती की है. दतिया की 10 ऐसी प्रमुख जातियां हैं, जिन पर पकड़ बनाने के लिए दोनों दलों के दिग्गज सामाजिक समीकरण साधते हुए जमीन पर उतर चुके हैं.
ब्राह्मण वोटरों (जो कि यहाँ सबसे बड़ा वर्ग है) को अपने पाले में करने के लिए कांग्रेस की ओर से अवनीश भार्गव, पंकज उपाध्याय, अवधेश नायक और मुकेश नायक मोर्चा संभाले हुए हैं, तो वहीं बीजेपी में नरोत्तम मिश्रा से लेकर शैलेंद्र बरुआ तक को मैदान में उतारा गया है. ब्राह्मणों के बाद यहाँ अहिरवार और जाटव समाज की संख्या सबसे निर्णायक मानी जाती है.
🔢 4. जानिए दतिया का सटीक जातीय समीकरण: किस वर्ग के पास है कितनी ताकत?
दतिया विधानसभा क्षेत्र में सामाजिक और जातीय हिस्सेदारी का पूरा विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| क्र. सं. | प्रमुख जाति / समाज | मतदाता प्रतिशत हिस्सेदारी (अनुमानित) |
| 1. | ब्राह्मण | 14.8% |
| 2. | अहिरवार / जाटव | 14.7% |
| 3. | कुशवाहा / काछी | 12.2% |
| 4. | यादव | 7.4% |
| 5. | लोधी | 6.9% |
| 6. | बघेल / पाल | 5.3% |
| 7. | मुस्लिम | 3.7% |
| 8. | बनिया | 3.7% |
| 9. | ठाकुर / राजपूत | 3.0% |
| 10. | रावत (मीणा) | 2.9% |
🚩 5. कांग्रेस और बीजेपी दोनों के सामने भीतरघात का संकट: जगदीश देवड़ा ने कार्यकर्ताओं को दिया एकजुटता का मंत्र
इस बार दतिया के चुनावी समर में कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही दलों को भीतरघात (Internal Friction) का बड़ा डर सता रहा है. बीजेपी में नरोत्तम मिश्रा का टिकट कट जाने के बाद भले ही वे खुद पार्टी के निर्देश पर मैदान में चुनाव प्रचार के लिए उतर गए हों, लेकिन शुरुआती दिनों में उनके समर्थकों ने जिस तरह से खुलकर नाराजगी जाहिर की थी, उससे पार्टी आलाकमान चिंतित है. क्या उनके समर्थक दिल से नए प्रत्याशी को स्वीकार कर पाए हैं, यह बड़ा सवाल है.
दतिया चुनाव की कमान संभाल रहे मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए स्पष्ट रूप से कहा:
टिकट कट जाने के बाद भी बीजेपी के सभी मुख्य बैनर-पोस्टरों में नरोत्तम मिश्रा की प्रमुखता से मौजूदगी यह साफ बताती है कि पार्टी किसी भी तरह का राजनीतिक जोखिम मोल नहीं लेना चाहती. दूसरी तरफ, कांग्रेस में भी स्थिति पूरी तरह सहज नहीं है; प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी से लेकर मीडिया अध्यक्ष मुकेश नायक का शुरुआती कीमती समय जनता से सीधे वोट मांगने के बजाए राजेंद्र भारती से लेकर अवधेश नायक जैसे दिग्गज नेताओं की आपसी नाराजगी को दूर करने और डैमेज कंट्रोल में ही ज्यादा बीता है.
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