अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल में 11% का भारी उछाल; जानें भारत में आज क्या हैं पेट्रोल-डीजल के दाम
अमेरिका-ईरान सैन्य तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 11% तक महंगा हो गया है। ब्रेंट क्रूड $88 प्रति बैरल के पार है, हालांकि भारत में आज भी पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में इस सप्ताह एक बहुत बड़ी तेजी देखने को मिली है. वैश्विक बाजार में आई इस उछाल की सबसे बड़ी मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ता सैन्य तनाव है. दोनों देशों के बीच एक-दूसरे पर सैन्य हमले हो रहे हैं, जिससे मध्य पूर्व (Middle East) में तेल की वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने की चिंता गहरी हो गई है. इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है.
हालांकि, भारतीय उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि देश में आज 19 जुलाई को भी पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने पेट्रोल-डीजल के दाम पहले जैसे ही स्थिर बनाए रखे हैं. देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आखिरी बार 25 मई 2026 को संशोधन किया गया था, जिसके बाद से देश में ईंधन के दाम लगातार स्थिर बने हुए हैं.
🏙️ 1. देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के ताजा दाम: देखें पूरी लिस्ट
आज देश के विभिन्न महानगरों और प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की प्रति लीटर कीमतें इस प्रकार हैं:
| शहर का नाम | पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर) | डीजल की कीमत (प्रति लीटर) |
| नई दिल्ली | ₹102.12 | ₹95.20 |
| मुंबई | ₹111.21 | ₹97.83 |
| कोलकाता | ₹113.51 | ₹99.82 |
| चेन्नई | ₹107.77 | ₹99.55 |
| बेंगलुरु | ₹111.68 | ₹99.56 |
| गुरुग्राम | ₹102.97 | ₹95.64 |
| नोएडा | ₹102.12 | ₹95.56 |
| हैदराबाद | ₹115.73 | ₹103.82 |
| जयपुर | ₹112.69 | ₹97.78 |
| लखनऊ | ₹101.59 | ₹95.06 |
| पटना | ₹113.43 | ₹99.44 |
| भुवनेश्वर | ₹108.97 | ₹100.68 |
| चंडीगढ़ | ₹101.54 | ₹89.47 |
| तिरुवनंतपुरम | ₹114.52 | ₹103.38 |
🌍 2. क्यों महंगा हो रहा है कच्चा तेल? हॉर्मुज स्ट्रेट पर मंडराया सबसे बड़ा खतरा
अमेरिका और ईरान के बीच का भू-राजनीतिक संघर्ष अब पहले से कहीं ज्यादा गंभीर और आक्रामक हो गया है. दोनों देश न केवल एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, बल्कि पुल, बिजली ग्रिड व्यवस्था और रणनीतिक बंदरगाहों जैसी आवश्यक नागरिक व आर्थिक सुविधाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं. इससे मध्य पूर्व से होने वाली अंतरराष्ट्रीय तेल की आवाजाही पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है.
हॉर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) का महत्व:
इस पूरे विवाद में दुनिया भर के विशेषज्ञों को सबसे ज्यादा चिंता हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर है. यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील तेल जलमार्गों में से एक है. दुनिया भर में निर्यात होने वाले कुल कच्चे तेल का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है. अगर युद्ध के कारण इस रूट की सप्लाई लाइन बाधित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अनियंत्रित रूप से और ऊपर जा सकती हैं.
📈 3. ब्रेंट क्रूड में 11% की साप्ताहिक तेजी: $88 प्रति बैरल के पार पहुंची कीमतें
पूरे सप्ताह चले इस तीव्र सैन्य तनाव के बीच शुक्रवार को वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमत में करीब 4.6 प्रतिशत की एकदिनी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे इसके दाम 88 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गए. पिछले अप्रैल महीने के बाद से यह कच्चे तेल में देखी गई सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी मानी जा रही है.
अगर पूरे बीते एक सप्ताह की बात करें, तो कच्चे तेल के दामों में कुल 11% का भारी उछाल आ चुका है. कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि वैश्विक निवेशकों और ट्रेडर्स में यह डर बैठ गया है कि यदि यह खाड़ी युद्ध लंबे समय तक खिंचा, तो तेल उत्पादक देशों से होने वाली सप्लाई पूरी तरह ठप हो सकती है. इसी आशंका और पैनिक बाइंग के चलते कच्चे तेल के भाव आसमान छू रहे हैं.
🇮🇳 4. भारत में अभी क्यों नहीं बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम? जानें क्या है वजह
भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें तय करने का अधिकार सरकारी तेल विपणन कंपनियों (जैसे IOCL, BPCL, HPCL) के पास है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल रिकॉर्ड महंगा होने के बावजूद भारतीय कंपनियों ने फिलहाल घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखा है और आम जनता को सीधे तौर पर बड़ी राहत दी हुई है.
हालांकि, आर्थिक हकीकत यह है कि भारत अपनी घरेलू जरूरत का लगभग 80 से 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात (Import) करता है. ऐसी स्थिति में यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 85 या 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो तेल कंपनियों के मार्जिन पर भारी दबाव पड़ेगा. नतीजतन, आने वाले दिनों या हफ्तों में भारतीय बाजार में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है.
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