₹776 करोड़ से बदलेगी मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था; 73 चिकित्सा संस्थाओं के उन्नयन को हरी झंडी
मध्य प्रदेश कैबिनेट ने उज्जैन में नए 'धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय' की स्थापना को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही ₹776 करोड़ की लागत से प्रदेश की 73 स्वास्थ्य संस्थाओं का कायाकल्प किया जाएगा।
भोपाल। मध्य प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने एक ऐतिहासिक और बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करने का निर्णय लिया है. सूबे में अभी तक एकमात्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर में स्थित था, जिसके अंतर्गत पूरे प्रदेश की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था संचालित होती थी. कार्यभार की अधिकता और व्यावहारिक समस्याओं को देखते हुए राज्य सरकार ने अब इस विश्वविद्यालय को दो भागों में विभाजित करने का फैसला किया है. इसके तहत प्रदेश का दूसरा चिकित्सा विश्वविद्यालय बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में स्थापित किया जाएगा.
इसके लिए सरकार आगामी सत्र में आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक प्रस्तुत करेगी, जिसमें दोनों विश्वविद्यालयों का भौगोलिक क्षेत्र विभाजित करने का स्पष्ट प्रावधान होगा. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में रविवार को भोपाल के समीप ऐतिहासिक स्थल जगदीशपुर में आयोजित कैबिनेट की विशेष बैठक में इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकृति दे दी गई.
मध्य प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के स्तर को अधिक सुदृढ़ और विश्वस्तरीय बनाने के लिए पहले इस विश्वविद्यालय को तीन हिस्सों (जबलपुर, भोपाल और उज्जैन) में बांटने की योजना थी. इसी बीच ग्वालियर से भी एक नए चिकित्सा विश्वविद्यालय की मांग तेजी से उठने लगी थी. इन तमाम समीकरणों को ध्यान में रखते हुए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने नए सिरे से व्यावहारिक प्रस्ताव तैयार किया और विश्वविद्यालय को तीन के स्थान पर दो प्रमुख हिस्सों (जबलपुर और उज्जैन) में विभाजित करने की अंतिम रूपरेखा रखी.
इस नए विभाजन के तहत उज्जैन विश्वविद्यालय के कार्यक्षेत्र में राजधानी भोपाल से लेकर संपूर्ण पश्चिमी मध्य प्रदेश के सभी जिलों को शामिल किया जाएगा. प्रशासनिक और बुनियादी ढांचे के इस नए विभाजन से राज्य सरकार की तिजोरी पर प्रतिवर्ष करीब 10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा.
कैबिनेट बैठक में लिए गए प्रमुख नीतिगत फैसलों और विकास कार्यों के आंकड़ों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:
| कैबिनेट निर्णय के मुख्य बिंदु | आधिकारिक विवरण व विधेयक का नाम | कुल स्वीकृत बजट व पद विवरण |
| नया विश्वविद्यालय | धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026, उज्जैन | सालाना ₹10 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार. |
| स्वास्थ्य अवसंरचना | प्रदेश की 73 स्वास्थ्य संस्थाओं का चरणबद्ध उन्नयन | ₹776 करोड़ की भारी-भरकम राशि स्वीकृत. |
| रोजगार सृजन (स्वास्थ्य) | नियमित, संविदा और आउटसोर्सिंग पदों की स्वीकृति | 1,600 नियमित, 71 संविदा और 560 आउटसोर्स पद. |
| औद्योगिक सुगमता | ईज ऑफ डूइंड बिजनेस विधेयक व श्रम शक्ति संहिता | उद्योगों के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस का प्रावधान. |
| अन्य प्रमुख संशोधन | मध्य प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक | निजी विश्वविद्यालयों को भूमि व विन्यास निधि में रियायत. |
रविवार को हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में चिकित्सा क्षेत्र के अलावा कई अन्य दूरगामी विधेयकों को भी हरी झंडी दिखाई गई. कैबिनेट ने 'मध्य प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक' के साथ-साथ 'मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2026' को भी अपनी मंजूरी दे दी. इस नए संशोधन के तहत अब राज्य में नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए भूमि, निर्मित क्षेत्र तथा विन्यास निधि (Endowment Fund) के कड़े प्रावधानों में कुछ विशेष रियायतें व छूट दी जा सकेंगी.
इसके अतिरिक्त, प्रदेश में औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने के उद्देश्य से 'मध्य प्रदेश श्रम शक्ति संहिता' और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक' को भी स्वीकृति दी गई. इसके तहत अब उद्योगों की स्थापना और संचालन से जुड़ी तमाम स्वीकृतियां एक ही स्थान (सिंगल विंडो) से मिल सकेंगी. साथ ही, बुनियादी ढांचे को गति देने के लिए राजमार्ग संशोधन विधेयक को भी मंजूरी देकर संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई के लिए अधिकृत किया गया है.
कैबिनेट की पिछली बैठक में जिन महत्वपूर्ण स्वास्थ्य प्रस्तावों को कुछ समय के लिए टाल दिया गया था, उन्हें इस बैठक में न केवल विस्तार से मंजूरी दी गई, बल्कि उनके लिए ₹776 करोड़ का भारी-भरकम बजट भी आवंटित कर दिया गया. इस ऐतिहासिक स्वास्थ्य नीति के तहत प्रदेश के सुदूर अंचलों में चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 73 स्वास्थ्य केंद्रों का चरणबद्ध तरीके से उन्नयन (Upgrade) किया जाएगा.
इन सभी उन्नत अस्पतालों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए चिकित्सा क्षेत्र में बंपर सरकारी भर्तियों का रास्ता भी साफ हो गया है. सरकार ने इसके तहत 1,600 नियमित शासकीय पदों और 71 संविदा पदों के नवीन सृजन को मंजूरी दी है, जबकि व्यवस्थाओं को सुदृढ़ रखने के लिए 560 कर्मियों को अधिकृत आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से तैनात किया जाएगा.
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