एमपी मानसून सत्र के पहले दिन सरकार ने पेश किए 14 विधेयक; कार्यसूची से बाहर रखने पर कांग्रेस का वॉकआउट

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक 2026 सहित 14 विधेयक पटल पर रखे। वहीं, उज्जैन जमीन खरीदी मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस विधायकों के हंगामे के कारण सदन स्थगित हुआ।

Jul 20, 2026 - 18:43
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एमपी मानसून सत्र के पहले दिन सरकार ने पेश किए 14 विधेयक; कार्यसूची से बाहर रखने पर कांग्रेस का वॉकआउट

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सायंकाल सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए ऐतिहासिक 'समान नागरिक संहिता विधेयक 2026' (UCC) सदन के पटल पर पेश कर दिया है. विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने जानकारी देते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण विधेयक पर कल विस्तृत चर्चा कराई जाएगी. यूसीसी विधेयक के अलावा सरकार ने सदन में 13 अन्य महत्वपूर्ण विधेयक भी पेश किए. हालांकि, इन विधेयकों का उल्लेख 20 जुलाई की आधिकारिक कार्यसूची में नहीं होने के कारण मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के विधायकों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे संसदीय परंपराओं के खिलाफ बताया.

मानसून सत्र की शुरुआत होते ही शून्यकाल में विपक्ष ने सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उज्जैन में मुख्यमंत्री और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा बड़े पैमाने पर जमीनों की कथित खरीद-फरोख्त का गंभीर मुद्दा सदन में उठाया. उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि इस संपत्ति सौदे में व्यापक विसंगतियां हैं, इसलिए इस विषय पर स्थगन प्रस्ताव के तहत तुरंत चर्चा कराई जानी चाहिए.

हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष ने इस स्थगन प्रस्ताव को नियमों का हवाला देकर अस्वीकार कर दिया. इसके बाद सदन में हंगामे की स्थिति बन गई. कांग्रेस विधायकों द्वारा गर्भगृह में आकर नारेबाजी किए जाने के बाद विधानसभा की कार्यवाही को आधे घंटे के लिए स्थगित करना पड़ा.

संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय का पलटवार:

"नियमों में यह स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि स्थगन प्रस्ताव के तहत केवल किसी तात्कालिक और अत्यंत लोक-महत्व के मुद्दे पर ही चर्चा हो सकती है. विपक्ष जिस उज्जैन जमीन मामले को उठा रहा है, वह साल 2023 का है. अतः इतने पुराने मामले पर स्थगन के तहत चर्चा का कोई वैधानिक औचित्य नहीं बनता."

सत्र के पहले दिन सरकार द्वारा कुल 14 विधेयक पटल पर रखे गए. इन सभी विधेयकों की आधिकारिक सूची और नाम नीचे तालिका में दिए गए हैं:

क्र.सं. विधानसभा पटल पर रखे गए विधेयकों के नाम (सत्र 2026)
1 मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक 2026
2 मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता (श्रम शक्ति संहिता) विधेयक 2026
3 मध्य प्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026
4 मध्य प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक 2026
5 मध्य प्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक 2026
6 मध्य प्रदेश उपकर संशोधन विधेयक 2026
7 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता मध्य प्रदेश संशोधन विधेयक 2026
8 मध्य प्रदेश राजमार्ग संशोधन विधेयक 2026
9 मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन संशोधन विधेयक 2026
10 मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज संशोधन विधेयक 2026
11 मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2026
12 मध्य प्रदेश वेट (VAT) संशोधन विधेयक 2026
13 मध्य प्रदेश माल और सेवा कर (GST) संशोधन विधेयक 2026
14 मध्य प्रदेश निरसन विधेयक 2026

सदन के पटल पर एक साथ इतने सारे विधेयकों को अचानक रखे जाने के बाद विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए. पूर्व मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस विधायक बाला बच्चन और विधायक सचिन यादव ने इसका कड़ा विरोध किया. उन्होंने तार्किक रूप से सवाल उठाया कि जब 20 जुलाई की दैनिक कार्यसूची (Agenda) में इन 13 विधेयकों का दूर-दूर तक कोई उल्लेख नहीं था, तो विधायी कार्य नियमावली को दरकिनार कर इन्हें अचानक अनुपूरक सूची के माध्यम से क्यों लाया गया?

इसके जवाब में संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विपक्ष को आश्वस्त करते हुए कहा कि सभी माननीय विधायकों को इन सभी विधेयकों की विस्तृत प्रतियां (कॉपी) वितरित की जा रही हैं. सरकार की मंशा किसी भी चर्चा से भागने की नहीं है, बल्कि विधायकों को इन विधेयकों का गहन अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा, जिसके बाद ही इन्हें पारित कराने की प्रक्रिया शुरू होगी.

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