नीमच में बुवाई के बाद थमी बारिश, मुरझाने लगीं सोयाबीन और प्याज की फसलें; किसान स्प्रिंकलर के सहारे
मध्य प्रदेश के नीमच जिले में बुवाई के बाद एक सप्ताह से बारिश न होने के कारण सोयाबीन, मक्का, मूंगफली और प्याज की फसलें मुरझाने लगी हैं। सूखे और खरपतवार से चिंतित किसान स्प्रिंकलर के जरिए फसल बचाने में जुटे हैं।
नीमच। मध्य प्रदेश के नीमच जिले सहित आसपास के क्षेत्रों में बुवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पिछले एक सप्ताह से बारिश न होने के कारण किसानों की चिंताएं लगातार गहराती जा रही हैं. राज्य के कुछ हिस्सों में भले ही राहत की फुहारें शुरू हो गई हों, लेकिन नीमच अंचल में समय पर बारिश न होने से खेतों में खड़ी सोयाबीन, मक्का, मूंगफली और प्याज की फसलें बुरी तरह प्रभावित होने लगी हैं. कड़ाके की धूप और बढ़ते तापमान के कारण पौधे मुरझाने लगे हैं, जिससे फसलों में कीटों और रोगों का प्रकोप फैलने की आशंका बढ़ गई है. किसानों का कहना है कि यदि अगले दो से तीन दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो कुल उत्पादन पर इसका सीधा और गंभीर असर पड़ेगा.
इस वर्ष नीमच जिले में सोयाबीन के साथ-साथ मूंगफली और मक्का के रकबे में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. पिछले साल सोयाबीन का उत्पादन कम रहने और बाजार में उचित दाम न मिलने के कारण कई किसानों ने इस बार वैकल्पिक फसलों की ओर रुख किया था. हालांकि, बुवाई के तुरंत बाद मौसम की इस बेरुखी ने उनकी तमाम उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.
सबसे अधिक परेशानी उन किसानों को उठानी पड़ रही है, जिन्होंने मानसून की दूसरी बारिश के बाद बुवाई की थी. इन खेतों में फसल अभी शुरुआती कोमल अवस्था में है, लेकिन एक सप्ताह से अधिक समय से बारिश न होने के कारण पौधों की बढ़वार पूरी तरह रुक गई है. लगभग आठ दिन पूर्व हुई बारिश के बाद खेतों में खरपतवार तेजी से पनप गए हैं. पर्याप्त नमी न होने से किसान समय पर निराई-गुड़ाई नहीं कर पा रहे हैं, जिसके कारण खरपतवार मिट्टी की बची-कुची नमी और पोषक तत्वों को सोखकर फसलों को और कमजोर बना रहे हैं.
क्षेत्र में फसलों की वर्तमान स्थिति और किसानों के सामने आ रही मुख्य चुनौतियों का ब्योरा नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| मुख्य प्रसंग / विषय | वर्तमान स्थिति एवं प्रभाव |
| प्रभावित मुख्य फसलें | सोयाबीन, मक्का, मूंगफली एवं प्याज |
| सहनशीलता की स्थिति | प्याज की छोटी फसलें अत्यधिक धूप और तापमान सहन करने में असमर्थ |
| प्रति हेक्टेयर अनुमानित लागत | सोयाबीन की बुवाई पर औसतन ₹8,000 का खर्च |
| किसान द्वारा अपनाए गए उपाय | स्प्रिंकलर (फव्वारा सिंचाई) के जरिए नमी बनाए रखने का प्रयास |
| कृषि विभाग की चेतावनी | 3-4 दिन में बारिश न होने पर उत्पादन में भारी गिरावट की संभावना |
किसानों का स्पष्ट कहना है कि यदि अगले दो-तीन दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं होती है, तो बड़े पैमाने पर फसलें सूखकर पूरी तरह तबाह हो सकती हैं. जिन किसानों ने पहले बीज खराब होने के कारण दोबारा बोवनी की थी, वे अतिरिक्त लागत के बोझ से सबसे अधिक तनाव में हैं.
किसान दीपक पाटीदार का वक्तव्य:
"शुरुआती बारिश के बाद खेत में फसल की स्थिति काफी अच्छी थी, लेकिन अब बारिश थमने से चिंता बढ़ गई है. खेत में प्याज की फसल अभी बहुत छोटी है और यह अत्यधिक गर्मी सहन नहीं कर सकती. फसल को सूखने से बचाने के लिए मैंने स्प्रिंकलर (फव्वारे) के माध्यम से सिंचाई शुरू कर दी है. यदि बारिश में और देरी हुई, तो उत्पादन और गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ेगा."
लागत और नुकसान के बारे में बात करते हुए एक अन्य किसान अरुण पाटीदार ने बताया, "लगातार बारिश न होने से खेतों में सोयाबीन की फसल पीली पड़कर सूखने लगी है. यदि अगले दो-तीन दिनों में बादल नहीं बरसे, तो बची हुई फसल भी पूरी तरह खराब हो जाएगी. सोयाबीन की बुवाई पर प्रति हेक्टेयर करीब ₹8,000 का खर्च आया है. ऐसे में जिन किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ी है, उनकी आर्थिक स्थिति और बिगड़ गई है."
बारिश की कमी के चलते किसानों ने अब अपने स्तर पर स्प्रिंकलर और अन्य सिंचाई साधनों का सहारा लेना शुरू कर दिया है. विशेष रूप से प्याज जैसी संवेदनशील फसलों में नमी बनाए रखने के लिए लगातार हल्की सिंचाई की जा रही है, ताकि बढ़ते तापमान से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके.
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