36 मौतों के 6 माह बाद भी जांच रिपोर्ट अधूरी; इंदौर नगर निगम पर भड़का हाईकोर्ट
इंदौर के भागीरथपुरा दूषित जल कांड पर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई हुई। 36 मौतों के 6 माह बाद भी नगर निगम द्वारा जांच रिपोर्ट न सौंपने और शहर में 79% वॉटर सैंपल फेल होने पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आदेश सुरक्षित रखा।
इंदौर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में ऐतिहासिक और चर्चित भागीरथपुरा दूषित जल कांड को लेकर दायर जनहित याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई. याचिका में भागीरथपुरा क्षेत्र में जहरीला/दूषित पानी पीने से हुई कई मासूमों और नागरिकों की असमय मौत का मुद्दा उठाया गया था. सुनवाई के दौरान कोर्ट को अवगत कराया गया कि घटना के 6 माह बीत जाने के बाद भी इंदौर नगर निगम प्रशासन की ओर से मामले में गठित जांच आयोग की रिपोर्ट तैयार नहीं की जा सकी है. इस घोर लापरवाही पर हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए नगर निगम से सख्त जवाब तलब किया है.
हाईकोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अजय बगड़िया ने अदालत को सूचित किया कि भागीरथपुरा कांड के बाद भी इंदौर शहर के विभिन्न क्षेत्रों से लगातार दूषित पेयजल आपूर्ति की गंभीर शिकायतें आ रही हैं. इस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने इंदौर नगर निगम से सीधे सवाल पूछा कि पूरे शहर में स्थापित पानी की टंकियों की सफाई और गुणवत्ता जांच के लिए किस प्रकार की नियमित व्यवस्था बनाई गई है? इस पर नगर निगम के वकील ने दावा किया कि टंकियों की समय-समय पर सफाई की जाती है.
मामले में यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि भागीरथपुरा कांड के तुरंत बाद विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा भागीरथपुरा सहित इंदौर के अलग-अलग क्षेत्रों के बोरिंग और ट्यूबवेल से पानी के सैंपल एकत्र किए गए थे. जून के अंतिम सप्ताह में जारी जांच रिपोर्ट में करीब 79 प्रतिशत सैंपल फेल (पीने के योग्य नहीं) पाए गए, जिनमें भागीरथपुरा का मुख्य बोरिंग भी शामिल था. इसके बावजूद जांच आयोग अब तक यह तय नहीं कर पाया है कि इस इतनी बड़ी प्रशासनिक लापरवाही का असली जिम्मेदार कौन है.
भागीरथपुरा दूषित जल कांड और अदालती प्रक्रिया से जुड़े मुख्य तथ्यों का ब्योरा नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| मुख्य प्रसंग / विषय | आधिकारिक आंकड़े व विवरण |
| त्रासदी में कुल मौतें | भागीरथपुरा क्षेत्र में 36 नागरिकों की मृत्यु |
| सुनवाई करने वाली पीठ | जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की डबल बेंच |
| पानी के सैंपलों की स्थिति | लैब जांच में इंदौर के विभिन्न अंचलों के 79% वॉटर सैंपल फेल |
| जांच रिपोर्ट की स्थिति | 6 माह बीतने व 2 बार एक्सटेंशन लेने के बाद भी रिपोर्ट अप्राप्त |
| कोर्ट का वर्तमान रुख | नए तथ्यों को रिकॉर्ड पर लेकर आदेश सुरक्षित रखा गया |
भागीरथपुरा में पीड़ित परिवारों तथा जिम्मेदार निगम अधिकारियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, फिर भी अंतिम जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है. निगम की ओर से रिपोर्ट पेश करने के लिए पूर्व में दो बार एक-एक महीने का अतिरिक्त समय भी मांगा गया था.
सोमवार को जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगल पीठ (Double Bench) ने मामले की विस्तृत सुनवाई की. अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है. याचिकाकर्ता की ओर से मामले से जुड़े नए वैज्ञानिक तथ्यों और रिपोर्टों को रिकॉर्ड पर लेने की मांग को स्वीकार करते हुए सुनवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया है.
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