इस बार अलग रंग में दिखेगी महाकाल सवारी; 84 महादेव से लेकर सिंहस्थ 2028 तक की दिखेगी झांकी

उज्जैन में सावन-भादो 2026 में निकलने वाली बाबा महाकाल की भव्य सवारियों के लिए थीम तय कर ली गई हैं। 3 अगस्त से 7 सितंबर तक निकलने वाली 6 सवारियों में जनजातीय नृत्य, 84 महादेव की झांकी और ड्रोन से पुष्प वर्षा मुख्य आकर्षण रहेंगे।

Jul 21, 2026 - 10:21
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इस बार अलग रंग में दिखेगी महाकाल सवारी; 84 महादेव से लेकर सिंहस्थ 2028 तक की दिखेगी झांकी

उज्जैन। पवित्र सावन-भादो मास में निकलने वाली भगवान महाकालेश्वर की भव्य सवारी को इस वर्ष और अधिक आलौकिक, भव्य तथा व्यवस्थित बनाने के लिए विशेष तैयारियां शुरू हो गई हैं. पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी हर एक सवारी की विशेष थीम निर्धारित की गई है, जिससे प्रत्येक सवारी में श्रद्धालुओं को एक अलग ही अनूठी झलक देखने को मिलेगी. इन निर्धारित थीमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण जागरूकता संदेश भी प्रदान किए जाएंगे.

महाकाल मंदिर प्रबंध समिति द्वारा वर्ष 2026 की सभी 6 सवारियों की तिथियों और उनकी थीमों की सूची तैयार कर ली गई है, जिसका ब्योरा नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:

तिथि सवारी का क्रम निर्धारित थीम / मुख्य आकर्षण
3 अगस्त 2026 प्रथम सवारी वैदिक उद्बोधन (वैदिक संस्कृति और श्लोकों की गूंज)
10 अगस्त 2026 द्वितीय सवारी विभिन्न लोक नृत्य (देश-प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता)
17 अगस्त 2026 तीसरी सवारी पुलिस, आर्मी, होमगार्ड, स्कूल व निजी बैंड की संगीतमय प्रस्तुति
24 अगस्त 2026 चतुर्थ सवारी पर्यावरण संरक्षण (प्रकृति सुरक्षा और हरियाली का संदेश)
31 अगस्त 2026 पंचम सवारी 84 महादेव की झांकी (उज्जैन के पौराणिक स्वरूप के दर्शन)
7 सितंबर 2026 अंतिम राजसी सवारी सिंहस्थ महापर्व 2028 की झांकी एवं ड्रोन से भव्य पुष्प वर्षा

महाकाल मंदिर प्रबंध समिति ने वर्ष 2026 की सभी सवारियों की थीम का औपचारिक निर्धारण कर लिया है. धार्मिक आस्था के साथ-साथ इन आयोजनों के जरिए जन-जागरूकता फैलाने की भी योजना है. इस बार सवारी में पुलिस, आर्मी, होमगार्ड और विभिन्न विद्यालयों के बच्चों के विशेष बैंड आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेंगे. इसके अलावा अंतिम राजसी सवारी के अवसर पर पूरे मार्ग में आधुनिक ड्रोन कैमरों के माध्यम से बाबा महाकाल की पालकी पर भव्य पुष्प वर्षा की जाएगी.

सहायक प्रशासक आशीष फलवाड़िया ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रत्येक सवारी में पिछले वर्षों की भांति इस वर्ष भी देश के विभिन्न राज्यों तथा मध्य प्रदेश के अलग-अलग अंचलों से आए जनजातीय नृत्य दल अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियां देंगे. ये सांस्कृतिक दल श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे.

सवारी मार्ग पर जुटने वाली श्रद्धालुओं की अपार भीड़ को ध्यान में रखते हुए इस बार भी उन्नत तकनीक से लैस एलईडी (LED) रथ चलाए जाएंगे. इन चलित एलईडी स्क्रीन के माध्यम से दूर-दराज खड़े श्रद्धालु भी भगवान महाकाल के सुलभ दर्शन कर सकेंगे. साथ ही, इसके जरिए श्रद्धालुओं को रियल-टाइम (लाइव) में यह जानकारी भी मिलती रहेगी कि बाबा की सवारी इस समय किस स्थान पर पहुंची है.

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