32 घंटे टावर पर चढ़ी रही महिला, फिर पथराव में 6 घायल; जानें ₹782 करोड़ की जल योजना का विवाद
श्योपुर के वीरपुर में ₹782 करोड़ की जल प्रदाय योजना हेतु भूमि खाली कराने पर विवाद हिंसक हो गया। 32 घंटे टावर पर महिला के बैठने और पथराव की घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है। पढ़ें पूरी विस्तृत रिपोर्ट।
श्योपुर। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के वीरपुर में वॉटर प्लांट के लिए शासकीय भूमि खाली कराने की प्रशासनिक कार्रवाई के बाद भड़का विवाद मंगलवार को हिंसक रूप में बदल गया. टावर से महिला को सुरक्षित नीचे उतारे जाने के बाद उसके देवर ने भी उसी टावर पर फांसी लगाने का प्रयास किया, जिससे माहौल अत्यधिक तनावपूर्ण हो गया. इसके बाद उग्र लोगों ने राठौर समाज के मकानों पर जमकर पथराव कर दिया, जिससे 6 महिलाओं सहित कई लोग घायल हो गए. क्षेत्र में शांति व कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अब भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर मारपीट व उपद्रव का क्रॉस मामला (Cross Case) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
दरअसल, यह पूरा विवाद श्योपुर जिले की 782 करोड़ रुपये की लागत वाली वृहद जल प्रदाय योजना से जुड़ा है. योजना के तहत अब तक लगभग 130 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है, जिसके माध्यम से जिले के 377 गांवों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाया जाएगा.
चंबल नदी के बरेठा घाट से लिफ्ट योजना के जरिए पानी लाकर वॉटर प्लांट में फिल्टर किया जाएगा, जिससे कराहल और विजयपुर क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों को लाभ मिलेगा. इसी वॉटर प्लांट के निर्माण के लिए प्रशासन शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त करा रहा था.
कार्रवाई के विरोध में रामा रावत नामक महिला अपनी जमीन के हक की मांग को लेकर 32 घंटे तक हाई-टेंशन/मोबाइल टावर पर चढ़ी रही. प्रशासन और पुलिस अधिकारियों द्वारा काफी समझाइश देने के बाद महिला को सुरक्षित नीचे उतारा जा सका.
हालांकि, महिला के उतरते ही उसके देवर ने भी उसी टावर पर चढ़कर फांसी लगाने का प्रयास किया, लेकिन मौके पर तैनात पुलिस बल और स्थानीय नागरिकों ने तत्परता दिखाते हुए उसे समय रहते सुरक्षित नीचे उतार लिया. इस घटनाक्रम के बाद परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा.
घटनाक्रम और जल प्रदाय योजना से जुड़ी प्रमुख जानकारियों का विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| विवरण / मापदंड | आधिकारिक जानकारी व वर्तमान स्थिति |
| घटनास्थल | वीरपुर, जिला श्योपुर (मध्य प्रदेश) |
| परियोजना का नाम | 782 करोड़ रुपये की चंबल जल प्रदाय योजना (377 गांव) |
| विवाद का मुख्य कारण | वॉटर प्लांट हेतु शासकीय भूमि/सर्वे नंबर से अतिक्रमण हटाना |
| हताहत/घायल | पथराव में 6 महिलाओं सहित कई लोग घायल |
| वर्तमान स्थिति | कार्रवाई स्थगित; 48 घंटे के लिए भारी पुलिस बल तैनात |
टावर घटनाक्रम के तुरंत बाद नाराज परिजनों ने राठौर समाज के घरों को निशाना बनाते हुए पथराव शुरू कर दिया. महिला रामा रावत के परिजनों का दावा है कि जिस शासकीय जमीन पर राठौर समाज के मकान बने हैं, वह उनके सर्वे नंबर की सीमा में आते हैं. पथराव में 6 महिलाओं सहित कई लोग चोटिल हुए हैं, जिन्हें तत्काल इलाज के लिए वीरपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है.
पीड़ित मनीषा राठौर (रिटायर्ड फौजी) का आरोप:
"हम अपने घर के बाहर शांति से बैठे थे, तभी अचानक भीड़ आई और हमारे मकान पर पत्थरों से हमला कर दिया. हमलावरों ने घर में जमकर तोड़फोड़ की. यदि हमने अंदर से दरवाजा बंद नहीं किया होता, तो वे बच्चों को खींचकर बाहर ले जाने का प्रयास कर रहे थे."
वहीं, 32 घंटे बाद टावर से उतरी महिला रामा रावत ने बताया कि प्रशासन द्वारा निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद ही वह नीचे उतरी है और वह प्रशासनिक आश्वासन से संतुष्ट है.
मामले की गंभीरता को देखते हुए उप प्रभागीय दंडाधिकारी (SDM) अभिषेक मिश्रा ने कहा:
SDM अभिषेक मिश्रा का वक्तव्य:
"फिलहाल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को स्थगित कर दिया गया है. दोनों पक्षों को एक साथ बैठाकर शांतिपूर्ण हल निकालने का प्रयास किया जा रहा है. जल प्रदाय योजना सरकार की अत्यंत महत्त्वाकांक्षी योजना है. कानून व्यवस्था से किसी भी सूरत में समझौता नहीं किया जाएगा. वायरल वीडियो और साक्ष्यों के आधार पर पथराव करने वाले उपद्रवियों को चिह्नित कर सख्त वैधानिक कार्रवाई की जा रही है."
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