बायोकेमिस्ट्री के पीजी अभ्यर्थियों को बड़ी राहत, असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में नियुक्ति के निर्देश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बायोकेमिस्ट्री विषय के पीजी अभ्यर्थियों को बड़ी राहत देते हुए असिस्टेंट प्रोफेसर पीएससी 2022 की चयन सूची में शामिल उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं।
जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बायोकेमिस्ट्री (Biochemistry) विषय के पोस्ट ग्रेजुएट (PG) अभ्यर्थियों को एक बहुत बड़ी राहत प्रदान की है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि असिस्टेंट प्रोफेसर पीएससी 2022 की नियुक्ति प्रक्रिया के तहत चयनित हुए बायोकेमिस्ट्री विषय के सभी पीजी अभ्यर्थियों को बिना किसी देरी के नियुक्ति प्रदान की जाए। कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने इस महत्वपूर्ण मामले पर अपना यह आदेश सुनाया है।
⚖️ डॉ. सुशील कुमार प्रजापति की ओर से दायर की गई थी याचिका
यह पूरा मामला याचिकाकर्ता डॉ. सुशील कुमार प्रजापति और अन्य की तरफ से हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका के माध्यम से सामने आया था। याचिका में मुख्य रूप से यह तर्क दिया गया था कि वर्ष 2022 की एमपी पीएससी (MP PSC) भर्ती परीक्षा में बॉटनी और जूलॉजी विषयों को तो शामिल किया गया था, लेकिन बायोकेमिस्ट्री विषय को इससे बाहर कर दिया गया था, जबकि बायोकेमिस्ट्री वास्तव में बॉटनी और जूलॉजी का ही एक अत्यंत संबंधित और सहयोगी विषय है।
🔄 वर्ष 2017 में थी मान्यता, 2022 में हटाया और फिर 2025-26 में किया शामिल
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि इससे पूर्व वर्ष 2017 की भर्ती में बायोकेमिस्ट्री को बॉटनी और जूलॉजी के संबंधित विषय के रूप में आधिकारिक मान्यता प्राप्त थी, लेकिन वर्ष 2022 की भर्ती प्रक्रिया में इसे अचानक हटा दिया गया था।
हालाँकि, बाद में सरकार को अपनी गलती का अहसास हुआ और आने वाले सत्र यानी साल 2025-26 की भर्ती में सरकार ने इसे दोबारा बॉटनी और जूलॉजी के संबंधित विषय के रूप में शामिल कर लिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी बताया गया कि पूर्व में न्यायालय ने उन्हें इस चयन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए अंतरिम राहत प्रदान की थी, जिसके बाद वे परीक्षा और चयन प्रक्रिया में शामिल हुए तथा अपनी योग्यता के बल पर अंतिम चयन सूची में चयनित हो गए हैं।
🏛️ युगलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक आदेश का दिया हवाला
मामले की सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) द्वारा पूर्व में पारित किए गए एक आदेश का स्पष्ट हवाला दिया। अदालत ने कहा कि एक बार जब बायोकेमिस्ट्री को जूलॉजी और बॉटनी का सहयोगी या संबंद्ध विषय मान लिया जाता है, तो इन विषयों के अभ्यर्थियों को असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए आवेदन करने और इस प्रक्रिया में भाग लेने का पूरा कानूनी अधिकार मिल जाता है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह याचिका विशेष रूप से उन सभी याचिकाकर्ताओं के पक्ष में स्वीकार की जाती है, जो अदालत के अंतरिम आदेश के आधार पर चयन प्रक्रिया में शामिल हुए थे और अपनी मेरिट के आधार पर चयनित हुए हैं। इस पूरे मामले में याचिकाकर्ताओं की तरफ से पैरवी जाने-माने अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा ने की।
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