सीधी के मझौली शासकीय कॉलेज के छात्रों का दर्द, परीक्षा देने के लिए तय करना पड़ रहा खतरनाक और लंबा सफर
मध्य प्रदेश के सीधी जिले के मझौली शासकीय कॉलेज में परीक्षा केंद्र न होने के कारण सैकड़ों छात्र-छात्राओं को 80 से 100 किमी दूर जाकर परीक्षा देनी पड़ रही है, जिससे उन्हें भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
सीधी: मध्य प्रदेश के सीधी जिले के मझौली शासकीय कॉलेज के सैकड़ों छात्र-छात्राओं को इस समय परीक्षा केंद्र की सुविधा न मिलने के कारण अत्यंत भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में कॉलेज के प्रथम, द्वितीय और फाइनल वर्ष की मुख्य परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं, लेकिन मझौली कॉलेज परिसर में परीक्षा केंद्र अधिकृत रूप से न होने की वजह से विद्यार्थियों को मजबूरी में लगभग 80 से 100 किलोमीटर का लंबा सफर तय करके जिला मुख्यालय सीधी जाकर अपनी परीक्षा देनी पड़ रही है। इस विकट स्थिति में सबसे अधिक और गंभीर परेशानी कॉलेज की छात्राओं को उठानी पड़ रही है, जिन्हें सुबह सात बजे से शुरू होने वाली परीक्षा में समय पर शामिल होने के लिए तड़के अंधेरे में ही सुबह 4 बजे अपने घरों से निकलना पड़ता है।
🚌 अंधेरे में बस का इंतजार करने को मजबूर छात्र, सुरक्षा को लेकर बना रहता है डर
इस समस्या से जूझ रहे अमित नाम के एक छात्र ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि, ''हमें सुबह तड़के कड़ाके के अंधेरे में चुवाही गांव पहुँचकर लंबी दूरी की बसों का इंतजार करना पड़ता है।''
सुनसान रास्तों और शुरुआती सुबह के समय सफर करने के कारण विशेष रूप से छात्राओं के मन में अपनी सुरक्षा को लेकर हर पल एक बड़ा डर बना रहता है। छात्रों का यह भी कहना है कि यदि प्रशासन द्वारा मझौली स्थानीय स्तर पर ही परीक्षा केंद्र की समुचित व्यवस्था कर दी जाए, तो इससे छात्रों के बहुमूल्य समय, धन और सबसे बढ़कर उनकी सुरक्षा—इन तीनों बड़ी समस्याओं का एक साथ स्थायी समाधान निकल सकता है।
👩🎓 बीए अंतिम वर्ष की छात्रा शिवांगी बोली—300 से ज्यादा विद्यार्थी तय करते हैं जोखिम भरा सफर
इस पूरे मामले पर बात करते हुए बीए अंतिम वर्ष की छात्रा शिवांगी सिंह ने बताया कि, ''लगभग 300 से ज्यादा विद्यार्थी प्रतिदिन अपनी जान जोखिम में डालकर परीक्षा देने के लिए दूर-दराज के इलाकों से सीधी आते-जाते हैं।''
इनमें से कुछ छात्र मड़वास मार्ग से तो कुछ मझौली मार्ग के रास्ते से सफर करने के लिए विवश हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार महाविद्यालय के प्राचार्य और तमाम संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के सामने गुहार लगाई गई है, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई भी ठोस समाधान नहीं निकाला गया है। नतीजतन, छात्र-छात्राओं को हर रोज यह जोखिम भरा और थका देने वाला सफर तय करके परीक्षा देने जाना पड़ रहा है।
📢 एनएसयूआई ने प्रशासन से की मांग—छात्रों के भविष्य के साथ न हो खिलवाड़
सीधी जिले के एनएसयूआई (NSUI) के प्रदेश सचिव विक्रांत सिंह ने इस पूरे मामले में जिला प्रशासन से तत्काल सख्त संज्ञान लेने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि मझौली क्षेत्र के मासूम विद्यार्थियों के भविष्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
प्रशासन को तुरंत प्रभाव से स्थानीय स्तर पर परीक्षा केंद्र की वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए ताकि छात्रों को यह अनावश्यक लंबी दूरी तय न करनी पड़े और विशेष रूप से छात्राओं की सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित की जा सके। वहीं, अब क्षेत्र के तमाम विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों का भी यही कहना है कि जब मझौली कॉलेज में इतनी बड़ी संख्या में छात्र विधिवत अध्ययन कर रहे हैं, तो यहाँ भी परीक्षा केंद्र का होना अत्यंत आवश्यक है।
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