जैन समाज के इतिहास की सबसे बड़ी धार्मिक बोली, मनीष गोधा और आनंद गोधा ने लगाई 16-16 करोड़ की राशि
इंदौर के दलालबाग में मुनि पुंगव सुधा सागर महाराज के चातुर्मास के दौरान मंगल कलश स्थापना के लिए 53 करोड़ रुपये से अधिक की ऐतिहासिक बोलियां लगाई गई हैं।
इंदौर: जैन समाज में चातुर्मास के पवित्र काल के दौरान मंगल कलश रखने का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान होता है। इसी परंपरा के तहत इंदौर के दलालबाग में मुनि पुंगव सुधा सागर महाराज के चातुर्मास प्रवास के लिए मंगल कलश की भव्य स्थापना की गई है। इस दौरान मंगल कलश की बोली के लिए श्रद्धालुओं ने अभूतपूर्व श्रद्धा दिखाते हुए कुल मिलाकर लगभग 53 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक बोलियां लगाईं, जिसे इंदौर के जैन समाज के इतिहास की सबसे बड़ी धार्मिक बोलियों में से एक माना जा रहा है।
🙏 चातुर्मास प्रवास पर पधारे मुनिपुंगव सुधा सागर महाराज
इन दिनों जैन समाज में चातुर्मास के पावन अवसर पर मंगल कलश रखने के लिए बोलियों का दौर चल रहा है। शहर के दलालबाग में जब मुनिपुंगव सुधा सागर महाराज के चातुर्मास प्रवास के लिए मंगल कलश की बोली शुरू हुई, तो समाज के लोगों ने रिकॉर्ड तोड़ बोलियां लगाईं।
इसके बाद सर्वाधिक बोली लगाने वाले चुनिंदा परिवारों को यह विशिष्ट धार्मिक सेवा का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मुनि श्री के प्रथम कलश के लिए इंदौर के प्रसिद्ध बिल्डर मनीष गोधा और उनकी पत्नी सपना ने 16 करोड़ 16 लाख 16 हजार 16 रुपये की भारी-भरकम बोली लगाई। इतनी ही राशि की बोली आनंद और नवीन गोधा परिवार द्वारा भी लगाई गई।
👑 गोधा परिवार को 'चक्रवर्ती परिवार' के रूप में किया गया सम्मानित
सर्वाधिक बोली लगाने के कारण इन दोनों प्रतिष्ठित परिवारों को मुनि श्री का प्रथम मंगल कलश अपने घर से लाकर स्थापित करने का दुर्लभ अवसर प्राप्त हुआ। इस विशेष अवसर पर दोनों परिवारों को 'चक्रवर्ती परिवार' की उपाधि से सम्मानित भी किया गया।
इसके अलावा, श्रावक संस्कार श्रेणी के लिए आकाश और दीपिका कौल ने 5 करोड़ 55 लाख रुपये की बोली लगाई। चातुर्मास के इन चार महीनों के प्रवास को लेकर पूरे जैन समाज में जबरदस्त उत्साह और उल्लास का माहौल देखने को मिल रहा है।
💰 अन्य श्रद्धालुओं द्वारा भी लगाई गईं करोड़ों रुपये की बोलियां
इस आयोजन में अन्य श्रद्धालुओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और विभिन्न कलशों के लिए करोड़ों रुपये अर्पित किए:
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तृतीय कलश: अशोक रानी डोसी द्वारा 3 करोड़ 55 लाख रुपये की बोली।
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चतुर्थ कलश: श्रीमती आशा रानी और महेंद्र पांड्या द्वारा 3 करोड़ 33 लाख रुपये की बोली।
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पंचम कलश: धर्मेंद्र-संध्या जैन द्वारा 2 करोड़ 11 लाख रुपये की बोली।
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षष्ठम कलश: हर्ष जैन द्वारा 2 करोड़ 51 लाख रुपये की बोली।
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सप्तम कलश: सौरभ-ललित बड़जात्या द्वारा 3 करोड़ 33 लाख रुपये की बोली।
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अष्टम कलश: राहुल जैन स्पोर्ट्स द्वारा 1 करोड़ 11 लाख रुपये की बोली।
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नवम कलश: अक्षय कासलीवाल द्वारा 1 करोड़ 11 लाख रुपये की बोली लगाई गई।
📜 क्यों और किस उद्देश्य से लगाई जाती है यह विशेष बोली?
जैन समाज की परंपरा के अनुसार, जब भी किसी बड़े धार्मिक अनुष्ठान या महान संतों का आगमन होता है, तो मंगल कलश रखने या प्रमुख धार्मिक लाभ लेने के लिए समाज के लोगों के बीच इस प्रकार की बोलियां लगती हैं।
समाज के लोग इन आयोजनों में बढ़-चढ़कर पुण्य लाभ अर्जित करने और पूरे आयोजन में श्रद्धालुओं की ओर से मुख्य प्रतिनिधित्व करने के लिए यह राशि समर्पित करते हैं। यह पूरी राशि धर्म के कल्याण, तीर्थ विकास और समाजोपयोगी कार्यों में लगाई जाती है।
सर्वाधिक बोली लगाने वाले परिवार को अनुष्ठान में विशेष अगवानी और मुनि श्री का सान्निध्य व आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बोली लगाने वाला श्रावक परिवार अपने घर से भव्य जुलूस के साथ मंगल कलश को विधान स्थल या मंदिर तक लेकर आता है, जहाँ विधि-विधान के साथ उसकी स्थापना की जाती है।
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