3 ही दिन में अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुई MP विधानसभा; 5 संशोधन विधेयक और अनुपूरक बजट पारित
मध्यप्रदेश विधानसभा का सत्र तीसरे दिन ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सदन में अनुपूरक बजट और 5 संशोधन विधेयक पारित हुए। कैलाश विजयवर्गीय की टिप्पणी पर हंगामे और शिक्षकों की E-Attendance पर पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का सत्र तीसरे दिन देर रात तक चली गहमा-गहमी के बाद अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया. सत्र के अंतिम दिन देर रात तक अनुपूरक बजट पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसके बाद इसे सर्वसम्मति से पास कर दिया गया.
इससे पहले सदन में हंगामे के बीच 5 महत्वपूर्ण संशोधन विधेयकों को भी पारित किया गया. सत्र के तीसरे दिन छात्रों से जुड़ी कथित टिप्पणियों और शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक देखने को मिली.
विधानसभा की कार्यवाही के तीसरे दिन देर रात तक अनुपूरक बजट पर चर्चा जारी रही. सरकार द्वारा प्रस्तुत अनुपूरक बजट को विस्तृत विचार-विमर्श के बाद सदन से मंजूरी मिल गई. बजट पास होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन की कार्यवाही को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने की घोषणा की.
सत्र के दौरान जनहित और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े 5 प्रमुख विधेयकों को चर्चा के बाद पारित किया गया. इनमें आपराधिक कानून, उच्च शिक्षा, स्थानीय स्वशासन और कर प्रणाली से जुड़े विधेयक शामिल हैं:
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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (संशोधन) विधेयक
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मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक
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मध्य प्रदेश राज्य एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) विधेयक
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मध्य प्रदेश माल और सेवा कर (GST संशोधन) विधेयक
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मध्य प्रदेश निरसन विधेयक 2026
सत्र के तीसरे दिन घटे घटनाक्रमों और पारित विधेयकों का संक्षिप्त विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| विषय / मापदंड | सदन में स्थिति एवं प्रशासनिक फैसला |
| सत्र की अवधि | 3 दिन में अनिश्चित काल के लिए स्थगित |
| वित्तीय कार्य | अनुपूरक बजट देर रात चर्चा के बाद पारित |
| विधेयक पारित | 5 संशोधन विधेयक स्वीकृत |
| प्रमुख विवाद | 'छात्रों को कीड़ा' टिप्पणी पर हंगामा (स्पीकर द्वारा निरस्त) |
| चर्चित मुद्दा | शिक्षकों की E-Attendance और डेटा सुरक्षा का सवाल |
सदन की कार्यवाही के दौरान संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने प्वाइंट ऑफ ऑर्डर (Point of Order) के तहत नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बयान का मुद्दा उठाया. कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने सदन के बाहर मीडिया में गलत बयान दिया कि विधानसभा में चर्चा के दौरान उन्होंने छात्रों को 'कीड़ा' कहा है, जो सदन की मर्यादा के खिलाफ है.
मंत्री प्रहलाद पटेल और उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए नेता प्रतिपक्ष से माफी की मांग की. मामले में बढ़ता हंगामा देख विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने प्रोसीडिंग (सदन की आधिकारिक कार्यवाही) देखी है और कैलाश विजयवर्गीय ने छात्रों के लिए ऐसे किसी भी अनुचित शब्द का प्रयोग नहीं किया है.
विधानसभा में प्रदेश भर के शासकीय शिक्षकों की ई-अटेंडेंस (E-Attendance) का मुद्दा भी जोर-शोर से गूंजा. कांग्रेस विधायकों ने सवाल उठाया कि ग्रामीण व दूरदराज के क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के कारण शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज नहीं हो पा रही है, जिससे उनके वेतन रुक रहे हैं. साथ ही विपक्ष ने शिक्षकों के निजी डेटा की सुरक्षा पर भी चिंता जताई.
इस पर जवाब देते हुए मंत्री विश्वास सारंग ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में 95.5% शिक्षक नियमित रूप से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं. उन्होंने आश्वस्त किया कि जिन स्थानों पर नेटवर्क की समस्या है, वहां की जानकारी जुटाई जा रही है और उसके लिए व्यावहारिक समाधान निकाले जा रहे हैं.
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