नेपाल आपदा में 1380 से ज्यादा मौतें और हजारों लापता, सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांगी मदद
नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन के 13 दिन बाद भी पनबिजली परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश जारी है। आपदा में अब तक 1380 से अधिक लोगों की मौत हुई है।
नेपाल में आए भयानक बाढ़ और भूस्खलन के 13 दिन बीत जाने के बाद भी लापता लोगों की तलाश का सिलसिला युद्ध स्तर पर जारी है। सोमवार को नेपाली बचाव दलों ने चीन की सीमा से लगे हिमालयी इलाकों में स्थित पनबिजली परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे जीवित लोगों को बाहर निकालने के लिए बड़ा अभियान चलाया। अधिकारियों के अनुसार, इन विभिन्न परियोजनाओं से लापता कुल 900 लोगों में से करीब 121 लोगों के इन सुरंगों के भीतर ही फंसे होने की आशंका है। हालांकि सेना का कहना है कि सभी लापता लोग सुरंगों में नहीं हैं, लेकिन अंदर हवा की जेबें और सुरक्षित कमरे होने के कारण कुछ लोगों के जीवित बचे रहने की उम्मीद अभी भी बनी हुई है।
🚁 चार लोगों के मिलने से जगी उम्मीद, 26 अगस्त को आई आपदा में 1380 से ज्यादा मौतें और अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार
हाल ही में बचाव दलों ने एक चीनी नागरिक और दो पनबिजली कर्मचारियों सहित चार लोगों को सुरंगों से जिंदा बाहर निकाला है, जिससे राहतकर्मियों और प्रभावित परिवारों में नई उम्मीद जगी है। यह प्राकृतिक आपदा गत 26 अगस्त को नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र की सीमा पर एक ग्लेशियर के टूटने से शुरू हुई थी, जिसके बाद आई भयंकर बाढ़ और मलबे से दोनों देशों में कम से कम 1,380 लोगों की मौत हो चुकी है और 5,500 से ज्यादा लोग लापता हैं। लापता लोगों में मानसरोवर और माउंट कैलाश यात्रा पर गए कुछ भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ड्रोन, बेली ब्रिज और डीएनए जांच किट जैसी विशेष मदद की अपील की है, जबकि सोमवार को आपदा के 13वें दिन राष्ट्रीय शोक भी मनाया गया।
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