छतरपुर में बरगद के पेड़ के नीचे चल रहा सरकारी स्कूल; बारिश होते ही छुट्टी, 51 इमारतें गायब

छतरपुर जिले के भगौरा गांव में जर्जर भवन टूटने के 2 साल बाद भी नया स्कूल नहीं बना। 1 से 5वीं तक के बच्चे बरगद के पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। जिले के 51 स्कूल भवनविहीन हैं।

Jul 23, 2026 - 14:45
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छतरपुर में बरगद के पेड़ के नीचे चल रहा सरकारी स्कूल; बारिश होते ही छुट्टी, 51 इमारतें गायब

छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूलों की बदहाली का चिंताजनक नजारा देखने को मिल रहा है. जिले के कई गांवों में प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं के पास अपने स्वयं के भवन नहीं हैं, वहीं कई स्कूल अति-जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं.

जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित भगौरा गांव का प्राथमिक विद्यालय इसका ज्वलंत उदाहरण है, जहां भवन ध्वस्त किए जाने के 2 साल बाद भी नया भवन निर्मित नहीं हो सका है. परिणामस्वरूप, कक्षा 1 से 5वीं तक के मासूम बच्चे हर मौसम में बरगद के पेड़ के नीचे जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने को विवश हैं.

भगौरा गांव के प्राथमिक स्कूल का भवन बेहद जीर्ण-शीर्ण हो चुका था, जिसे सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रशासन ने दो साल पहले जमींदोज करवा दिया था. लेकिन इसके बाद नया भवन स्वीकृत कर निर्मित कराना विभाग भूल गया.

तभी से भीषण गर्मी हो या कड़ाके की ठंड, बच्चे खुले आसमान और बरगद के पेड़ की छांव में ही अक्षर ज्ञान ले रहे हैं. स्कूल परिसर में केवल एक छोटा सा जर्जर कमरा बचा है, जिसका उपयोग स्कूल की सामाग्रियों व रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है.

मानसून के दौरान आसमान में काले बादल छाते ही इस 'पेड़ वाले स्कूल' में आपातकालीन छुट्टी घोषित कर दी जाती है. बारिश शुरू होते ही बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो जाती है, क्योंकि न तो उनके सिर पर पक्की छत है और न ही अपनी किताबों व बस्तों को भीगने से बचाने का कोई साधन.

इतना ही नहीं, चंदला क्षेत्र के कई गांवों में स्कूलों तक पहुंचने के लिए पक्की सड़कें तक नहीं हैं. छनिया सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चे संकरे कच्चे पगडंडियों से होकर स्कूल पहुंचते हैं, जहां मूसलाधार बारिश के दिनों में पहुंच मार्ग पूरी तरह बंद हो जाता है.

जिले में प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूल भवनों की वर्तमान स्थिति का ब्योरा नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:

विवरण / मापदंड आधिकारिक आंकड़े व स्थिति
पिछले 2 वर्षों में गिराए गए जर्जर भवन 76 स्कूल भवन
नए निर्मित कराए गए भवन 25 स्कूल भवन
वर्तमान में कुल भवनविहीन स्कूल 51 स्कूल (खुले में, किराए पर या आंगनवाड़ी में)
बजट मिलने के बाद भी कार्य अप्रारंभ 24 स्कूल
शासकीय स्वीकृति हेतु फाइलों में लंबित 27 प्राथमिक व माध्यमिक स्कूल

छतरपुर जिले में पिछले 2 वर्षों के दौरान 76 जर्जर और खतरनाक स्कूल भवनों को तोड़ा गया था. लेकिन विडंबना यह है कि इनमें से केवल 25 नए भवनों का निर्माण ही पूरा हो पाया है.

आज भी जिले के 51 सरकारी स्कूल पूरी तरह भवनविहीन हैं, जो या तो आंगनवाड़ी केंद्रों के छोटे कमरों में ठूंसकर चलाए जा रहे हैं, किराए की दुकानों में लग रहे हैं या फिर खुले आसमान के नीचे संचालित हो रहे हैं. 24 स्वीकृत स्कूलों को पहली किश्त मिलने के बाद भी निर्माण शुरू नहीं हो सका है, जबकि 27 स्कूलों की फाइलें प्रशासनिक स्वीकृति के लिए लंबित हैं.

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