कंगाली और हिंसा से ध्यान भटकाने का खेल! आसिम मुनीर की कूटनीति पर बड़ा खुलासा
पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली और आंतरिक हिंसा से जनता का ध्यान भटकाने के लिए सेना प्रमुख आसिम मुनीर विदेश नीति का सहारा ले रहे हैं। सऊदी, तुर्की और अमेरिका से रिश्ते सुधारने के पीछे का पूरा हिडन एजेंडा और रिपोर्ट का खुलासा पढ़ें।
पाकिस्तान में जनरल आसिम मुनीर के सेना प्रमुख बनने के बाद से देश की विदेश नीति में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. पाकिस्तान लगातार सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र जैसे मुस्लिम और प्रभावशाली देशों के साथ अपने रणनीतिक व सैन्य संबंधों को प्रगाढ़ करने में जुटा है.
सऊदी अरब की सुरक्षा के नाम पर पाकिस्तान सरकार ने अपने करीब 8,000 सैनिक वहां तैनात किए हैं. वहीं, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के संभावित हमलों से बचाव के नाम पर तुर्की ने पाकिस्तान को अत्याधुनिक लड़ाकू ड्रोन भी मुहैया कराए थे. अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया और फाइनेंशियल रिपोर्ट में पाकिस्तान की इस आक्रामक कूटनीति को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है.
अंतरराष्ट्रीय फाइनेंशियल अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की इस पूरी विदेश नीति के पीछे मुख्य सूत्रधार कोई और नहीं बल्कि सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर हैं.
मुनीर के इशारे पर ही शहबाज शरीफ सरकार अपना पूरा ध्यान और संसाधन वैश्विक कूटनीति पर केंद्रित कर रही है. दरअसल, देश के भीतर अपनी गिरती साख और कुर्सी को मजबूती देने के लिए जनरल मुनीर अंतरराष्ट्रीय मंचों और विदेश नीति को एक ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं.
रिपोर्ट में पाकिस्तान सरकार और सेना के इस रुख के पीछे तीन प्रमुख कारणों का उल्लेख किया गया है:
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आर्थिक बदहाली और महंगाई: पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है. बेकाबू महंगाई और विदेशी कर्ज के बोझ तले दबी जनता में भारी आक्रोश है. सरकार और सेना के पास इसका कोई ठोस आर्थिक समाधान नहीं है, इसलिए वे विदेश नीति को तवज्जो दे रहे हैं.
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विदेशी मदद की बैसाखी: पाकिस्तान को सऊदी अरब से 3 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है. वहीं, तुर्की और मिस्र के माध्यम से अमेरिका के साथ संबंध सुधारकर पाकिस्तान ने 10 अरब डॉलर के नए वित्तीय पैकेज की मांग की है.
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आंतरिक हिंसा दबाने की कोशिश: बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में भारी नागरिक असंतोष और हिंसक विरोध प्रदर्शन जारी हैं. इन आंतरिक विफलताओं से अंतरराष्ट्रीय मीडिया और अपनी जनता का ध्यान भटकाने के लिए विदेश नीति को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है.
पाकिस्तान के मौजूदा विदेश नीति एजेंडे और सैन्य-राजनीतिक परिदृश्य का विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| पहलू / क्षेत्र | वर्तमान स्थिति एवं रणनीतिक कदम |
| सऊदी अरब से संबंध | सुरक्षा हेतु 8,000 पाक सैनिकों की तैनाती; 3 अरब डॉलर की मदद |
| तुर्की व मिस्र से जुड़ाव | रक्षा उपकरण (ड्रोन) प्राप्त करना और अमेरिका से मध्यस्थता की उम्मीद |
| अमेरिका से मांग | अर्थव्यवस्था संभालने के लिए 10 अरब डॉलर की सहायता राशि की अपील |
| आंतरिक अशांति | बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और PoK में जारी व्यापक हिंसा |
| राजनीतिक विरोध | इमरान खान (जेल में) और फजल उर रहमान द्वारा सेना का तीखा विरोध |
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में सरकार सिर्फ नाममात्र की है और सभी बड़े प्रशासनिक व कूटनीतिक फैसले सीधे जनरल आसिम मुनीर द्वारा लिए जा रहे हैं. मुनीर के कहने पर ही पाकिस्तान ईरान के क्षेत्रीय मामलों में मध्यस्थ बनने की कोशिश कर रहा है, ताकि वह अमेरिका और चीन दोनों महाशक्तियों को एक साथ साध सके.
हालांकि, इस कूटनीतिक जाल के बावजूद पाकिस्तान में सेना की स्थिति बहुत नाजुक बनी हुई है. विपक्ष और जनता का एक बड़ा वर्ग सेना के खिलाफ मुखर हो चुका है.
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