अरबों डॉलर फूंककर भी खाली हाथ अमेरिका; ईरान के अंडरग्राउंड मिसाइल बेस अब भी सुरक्षित

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध में अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन नाकाम साबित हो रहे हैं। अरबों डॉलर खर्च करने के बाद भी ईरान के अंडरग्राउंड मिसाइल बेस और परमाणु ठिकाने सुरक्षित हैं। पढ़ें अमेरिका-ईरान संघर्ष और ट्रंप के बयानों पर पूरी रिपोर्ट।

Jul 24, 2026 - 19:20
0
अरबों डॉलर फूंककर भी खाली हाथ अमेरिका; ईरान के अंडरग्राउंड मिसाइल बेस अब भी सुरक्षित

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक ऐसा युद्ध छेड़ दिया है, जिसमें पानी की तरह बारूद और डॉलर तो बेतहाशा बहाए जा रहे हैं, लेकिन हासिल कुछ नहीं हो रहा है. अमेरिका अब तक इस सैन्य अभियान में अरबों डॉलर खर्च कर चुका है, लेकिन जिस मुख्य मकसद के लिए युद्ध शुरू किया गया था, वह अब तक अधूरा है.

ईरान का मिसाइल प्रोग्राम और यूरेनियम भंडार आज भी उसकी अभेद्य अंडरग्राउंड सुरंगों और ठिकानों में पूरी तरह महफूज है. उल्टे इसकी मात्रा और मारक क्षमता लगातार बढ़ती जा रही है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण मध्य पूर्व में अमेरिकी मित्र देशों और सैन्य अड्डों तक पहुंच रही ईरानी मिसाइलें हैं.

सुपरपावर अमेरिका के अब तक के सबसे बड़े और सबसे महंगे सैन्य ऑपरेशन—'मिडनाइट हैमर' (Midnight Hammer), 'एपिक फ्यूरी' (Epic Fury), और 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' (Project Freedom)—अरब के रेगिस्तान में पूरी तरह बेअसर साबित हुए हैं.

महीनों की लगातार भीषण बमबारी, अरबों डॉलर के प्रिसिशन गाइडेड हथियार (Precision Weapons) और स्टेल्थ लड़ाकू विमानों के इस्तेमाल के बावजूद अमेरिकी सेना ईरान की सामरिक मिसाइल क्षमता को खरोंच तक नहीं पहुंचा पाई है. जिन भूमिगत ठिकानों को अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने तबाह करने का दावा किया था, ईरान ने उन्हें चंद हफ्तों में दोबारा चालू कर दिया है.

जॉर्डन से लेकर कुवैत और इराक तक, अमेरिका के हर प्रमुख सैन्य बेस पर ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें और घातक आत्मघाती ड्रोन कहर बनकर टूट रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिसे महज एक 'छोटी झड़प' बताकर अपने देश की जनता को आश्वस्त करने का प्रयास कर रहे हैं, वह असलियत में मध्य पूर्व में अमेरिकी प्रभुत्व के अंत की ओर इशारा कर रहा है.

अमेरिका की नाकामी का सबसे बड़ा कारण ईरान के भूमिगत सैन्य बुनियादी ढांचे (Underground Infrastructure) को समझने में हुई भूल है. ट्रंप प्रशासन ने इजराइली खुफिया इनपुट के आधार पर करमनशाह और अन्य क्षेत्रों में अपने सबसे महंगे 'बंकर बस्टर' बम बरसाए, लेकिन ईरान ने कुछ ही समय में मलबा साफ कर अपने कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम को 100% कार्यशील कर लिया.

अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के अनुसार, जिस गति से अमेरिकी बम सुरंगों के प्रवेश द्वारों को निशाना बनाते हैं, ईरान उससे दोगुनी तेजी से नए रास्ते और सुरंगें तैयार कर लेता है. अमेरिका एक-एक प्रिसिशन बम पर करोड़ों डॉलर फूंक रहा है, जबकि ईरान अपनी किफायती तकनीक से न केवल अपने ठिकाने बचा रहा है, बल्कि सस्ते मिसाइल और ड्रोन से अमेरिका को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचा रहा है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "मैं इसे एक साधारण झड़प कहता हूं. ईरान के साथ हमारी एक झड़प हुई है और उन्हें इतनी जोरदार चोट पहुंची है कि वे समझौता करना चाहते हैं. हालांकि, वे अभी समझौते के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं, लेकिन जल्द ही हो जाएंगे."

कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप का यह बयान जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाता और इसमें उनकी विवशता साफ झलकती है, क्योंकि अमेरिकी सेना भी अब ईरान की वास्तविक सैन्य क्षमता का लोहा मान चुकी है.

ईरान की असली ताकत उसका विशाल और बहुस्तरीय मिसाइल भंडार है:

  • शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (150 - 1000 किमी): फतेह-110, फतेह-313, जुल्फेकार, देजफुल और कियाम.

  • मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (1100 - 2000 किमी): शहाब-3, गद्र-110, एमाद, खैबर शिकन और हज कासिम.

  • इंटरमीडिएट रेंज मिसाइल (2000 - 2500 किमी): सेजिल और खुर्रमशहर.

  • हाइपरसोनिक व क्रूज मिसाइल: हाइपरसोनिक 'फतेह' व 'फतेह-2' तथा 2000 किमी रेंज वाली सौमार, होवेजेह और पावेह क्रूज मिसाइलें.

  • एंटी-शिप मिसाइल: नूर, कादिर, गदीर और अबू महदी.

  • अराश ड्रोन (Arash Suicide Drone): दुनिया की सबसे लंबी दूरी तय करने वाला आत्मघाती ड्रोन, जिसके अंडरग्राउंड गोदामों के वीडियो ईरान के सरकारी टीवी ने जारी किए हैं.

ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में पूरे मध्य पूर्व को तीन श्रेणियों में विभाजित कर निशाना तय किया है:

श्रेणी (Category) लक्षित देश (Target Countries) हमले का रणनीतिक कारण
प्रथम श्रेणी इजराइल, बहरीन, कतर प्रमुख अमेरिकी सैन्य बेसों की मौजूदगी
द्वितीय श्रेणी सऊदी अरब, यूएई, कुवैत अमेरिका के बड़े व्यापारिक व तेल हित
तृतीय श्रेणी इराक, सीरिया, जॉर्डन ईरानी प्रॉक्सी संगठनों की सक्रियता

अपनी हताशा में अमेरिकी सेना ने ईरान के बुशहर न्यूक्लियर प्लांट (Bushehr Nuclear Plant) को निशाना बनाकर हमला किया, लेकिन मुख्य प्लांट पूरी तरह सुरक्षित रहा और केवल पास का एक पावर स्टेशन क्षतिग्रस्त हुआ. इसके अलावा अहवाज, रामशीर और सिरिक में भी अमेरिकी हमले दर्ज किए गए.

इसके बावजूद, अमेरिका के ये जवाबी हमले ईरान को रोक पाने में असमर्थ साबित हो रहे हैं. अमेरिका जितना ईरान के ढांचे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है, ईरान उतनी ही आक्रामकता से जॉर्डन, इराक और कुवैत में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर पलटवार कर रहा है.

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User