: उज्जैन में 17 करोड़ की सड़क परियोजना पर ब्रेक, किसानों और प्रशासन के बीच फंसा पेच
उज्जैन में सिंहस्थ के लिए बन रहे जीवनखेड़ी-सिकंदरी फोरलेन का निर्माण मुआवजा विवाद के चलते रुक गया है। किसान 4 गुना मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
उज्जैन। उज्जैन में आगामी सिंहस्थ महाकुंभ के मद्देनजर बनाए जा रहे जीवनखेड़ी-सिकंदरी फोरलेन मार्ग का निर्माण कार्य मुआवजा विवाद के चलते पूरी तरह रुक गया है। यहां किसानों ने 'आपसी क्रय नीति-2014' के तहत 4 गुना मुआवजा न मिलने का विरोध करते हुए निर्माण कार्य को बीच में ही रुकवा दिया है। चूंकि यह पूरा मामला सीधे तौर पर राज्य सरकार के नीतिगत स्तर से जुड़ा हुआ है, इसलिए स्थानीय प्रशासन फिलहाल इस पर अपने स्तर पर कोई भी अंतिम निर्णय लेने की स्थिति में नहीं है।
🏛️ सरकार से नीति में बदलाव और समान मुआवजे की मांग
किसानों के कड़े विरोध के बाद संबंधित निगम ने स्थानीय प्रशासन को पूरे हालात से अवगत करा दिया है। इसके बाद प्रशासन ने भी भोपाल स्तर पर उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर यह मांग की है कि 'आपसी क्रय नीति-2014' में भी सामान्य भू-अर्जन अधिनियम की तर्ज पर 4 गुना मुआवजे का प्रावधान शामिल किया जाए। अधिकारियों का मानना है कि इस संशोधन से मुआवजे की राशि में समानता आएगी और लंबे समय से रुका हुआ विकास कार्य दोबारा सुचारू रूप से शुरू हो सकेगा।
🚗 सिंहस्थ यातायात के लिए बेहद अहम है यह फोरलेन मार्ग
लगभग 17 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही यह 2 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क सिंहस्थ के दौरान सुगम यातायात व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस मार्ग के बन जाने से इंदौर रोड की तरफ आने-जाने वाले ट्रैफिक को सीधे सिंहस्थ बायपास से जोड़ा जा सकेगा, जिससे शहर के व्यस्त नानाखेड़ा मार्ग पर वाहनों का अत्यधिक दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा। इस पूरी परियोजना की जद में कुल 84 किसानों की जमीन आ रही है, जो इस प्रोजेक्ट से प्रभावित हो रहे हैं।
⚖️ नए नियमों के लागू होने के बाद बढ़ी किसानों की मांग
शुरुआत में किसानों ने 'आपसी क्रय नीति-2014' की शर्तों के तहत अपनी जमीन देने की सहमति दे दी थी। हालांकि, 22 अप्रैल 2026 को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण के मामलों में 4 गुना मुआवजे का नया प्रावधान लागू कर दिया गया। इस नए नियम के सामने आने के बाद जीवनखेड़ी-सिकंदरी मार्ग के लिए जमीन देने वाले किसानों ने भी उसी तर्ज पर समान मुआवजे की मांग करना शुरू कर दिया। जब उनकी यह मांग पूरी नहीं हुई, तो उन्होंने विरोध जताते हुए निर्माण कार्य बंद करवा दिया।
🔍 भू-अर्जन और क्रय नीति का अंतर बना मुख्य विवाद की वजह
विशेषज्ञों के मुताबिक, साधारण भू-अर्जन अधिनियम के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के प्रभावित किसानों को 4 गुना मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि पुरानी 'आपसी क्रय नीति-2014' के अंतर्गत अब भी केवल 2 गुना मुआवजा ही मिलने का प्रावधान है। नीतियों के बीच के इसी बड़े अंतर के कारण राज्य के कई हिस्सों में विकास परियोजनाओं को लेकर ऐसे विवाद सामने आ रहे हैं। फिलहाल स्थानीय प्रशासन को पूरी उम्मीद है कि राज्य सरकार इस मामले में जल्द ही कोई सकारात्मक और व्यावहारिक निर्णय लेगी।
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