स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर डॉक्टरों का प्रदर्शन, वल्लभ भवन में सरकार के साथ होगी अहम बैठक

भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज और हमीदिया अस्पताल के इंटर्न डॉक्टरों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की थी, जिसे फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।

Jul 27, 2026 - 18:31
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स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर डॉक्टरों का प्रदर्शन, वल्लभ भवन में सरकार के साथ होगी अहम बैठक

भोपाल: देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विभिन्न छात्र आंदोलनों का असर अब मध्य प्रदेश में भी तेजी से देखने को मिलने लगा है। इसी कड़ी में भोपाल के प्रतिष्ठित गांधी मेडिकल कॉलेज और हमीदिया अस्पताल के इंटर्न डॉक्टरों ने अपना मासिक स्टाइपेंड बढ़ाए जाने की मुख्य मांग को लेकर भूख हड़ताल का रास्ता चुन लिया था। हालांकि, सोमवार को स्थानीय प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन की समझाइश के बाद इस भूख हड़ताल को फिलहाल अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। इसके बावजूद, डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन और अपनी मांगों को लेकर मुखर रहने का सिलसिला अभी भी जारी रहेगा। मिली जानकारी के अनुसार, कॉलेज की डीन और चिकित्सा शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ हुई लंबी चर्चा के बाद अब सरकार ने इन इंटर्न डॉक्टरों के एक पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को मंत्रालय (वल्लभ भवन) में सीधी बातचीत के लिए आमंत्रित किया है।

📜 पिछले चार वर्षों से मिल रहा है केवल आश्वासन, अब आर-पार की तैयारी

गांधी मेडिकल कॉलेज और हमीदिया अस्पताल के इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि वे पिछले लगभग चार लंबे वर्षों से अपने स्टाइपेंड में वृद्धि की मांग को लेकर लगातार शासन और प्रशासन के सामने गुहार लगा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कई बार प्रदेश के जिम्मेदार मंत्रियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात भी की, लेकिन हर बार उन्हें केवल कोरे आश्वासन ही मिले, जमीन पर कोई भी ठोस आदेश जारी नहीं किया गया। इसी प्रशासनिक टालमटोल से तंग आकर डॉक्टरों ने 27 जुलाई से अपनी सांकेतिक भूख हड़ताल शुरू करने का कड़ा फैसला लिया था। हालांकि, कॉलेज की डीन डॉ. के. कविता सिंह की समझाइश और शासन स्तर से आई सकारात्मक पहल के बाद फिलहाल इस भूख हड़ताल को कुछ समय के लिए टाल दिया गया है।

🤝 इंटर्न डॉक्टरों और शासन के बीच वार्ता का रास्ता खुला

आंदोलनकारी इंटर्न डॉक्टर डॉ. संकेत शर्मा ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया, ''कमिश्नर धनराजू एस. और कॉलेज प्रशासन के साथ हुई चर्चा के बाद सरकार की ओर से हमारे पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को वल्लभ भवन में एक उच्चस्तरीय बैठक के लिए बुलाया गया है।'' डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि यदि इस आधिकारिक बैठक में उनकी मांगों पर कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करते हुए कार्य बहिष्कार की अगली रणनीति तय करेंगे।

इंटर्न डॉक्टरों की सबसे मुख्य और बड़ी मांग यह है कि उनका वर्तमान मासिक स्टाइपेंड जो अभी मात्र 14,337 रुपये है, उसे बढ़ाकर न्यूनतम 30 हजार रुपये किया जाए। उनका तर्क है कि आज के इस मंहगाई के दौर में और उनके लंबे ड्यूटी घंटों व भारी कार्यभार के मुकाबले यह मौजूदा राशि बेहद कम है। डॉक्टरों का कहना है कि वे दिन-रात मरीजों की जान बचाने और उनकी सेवा में जुटे रहते हैं, इसके बावजूद उन्हें उनके काम के अनुपात में पर्याप्त आर्थिक संबल नहीं मिल रहा है।

📉 अन्य पड़ोसी राज्यों की तुलना में काफी पीछे है मध्य प्रदेश

डॉक्टरों ने आंकड़े सामने रखते हुए दावा किया है कि मेडिकल इंटर्न को मिलने वाले स्टाइपेंड के मामले में मध्य प्रदेश देश के अन्य कई प्रमुख राज्यों से काफी पीछे चल रहा है। उनके अनुसार, वर्तमान में दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में करीब 30 हजार, राजस्थान में 21 हजार, झारखंड में 25 से 26 हजार और ओडिशा तथा पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में तो 43 हजार से 44 हजार रुपये तक का भारी-भरकम मासिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है। इन सभी राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों को मिलने वाली राशि बेहद कम है।

💸 एक तरफ महंगी फीस, दूसरी तरफ कम स्टाइपेंड को लेकर भारी नाराजगी

इंटर्न डॉक्टरों ने सरकार पर सवाल उठाते हुए यह भी आरोप लगाया है कि एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई के लिए ली जाने वाली फीस के मामले में मध्य प्रदेश देश के सबसे महंगे राज्यों में शामिल है। वर्तमान में छात्रों से करीब 1 लाख रुपये वार्षिक फीस वसूली जा रही है, और चर्चा यह भी है कि इसे बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये तक करने की पूरी तैयारी चल रही है।

इसके बावजूद, जब स्टाइपेंड देने की बारी आती है, तो प्रदेश अन्य राज्यों की तुलना में बहुत पीछे छूट जाता है। डॉक्टरों का साफ कहना है कि जब देश के दूसरे राज्य कम फीस लेकर भी अपने डॉक्टरों को बेहतर और सम्मानजनक स्टाइपेंड दे सकते हैं, तो फिर मध्य प्रदेश सरकार को भी अपने यहां के इंटर्न डॉक्टरों को उचित और सम्मानजनक आर्थिक सहायता अवश्य उपलब्ध करानी चाहिए।

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