भोपाल और इंदौर नगर निगम पर एक्शन, बिना अनुमति लगाए गए फ्लेक्स और पोस्टर होंगे जब्त

हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने अवैध होर्डिंग और बैनर लगाने वालों पर सख्ती दिखाई है। शिकायत मिलने पर 24 घंटे के भीतर कार्रवाई करने और एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

Jul 28, 2026 - 11:25
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भोपाल और इंदौर नगर निगम पर एक्शन, बिना अनुमति लगाए गए फ्लेक्स और पोस्टर होंगे जब्त

इंदौर: मध्य प्रदेश के शहरों में अनाधिकृत रूप से अवैध होर्डिंग, बैनर और पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ अब न्यायपालिका ने बेहद कड़ी रुख अपना लिया है। हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि यदि अवैध होर्डिंग की कोई भी शिकायत प्राप्त होती है, तो नगर निगम और संबंधित सक्षम प्राधिकारी को 24 घंटे के भीतर उसे हटाने की त्वरित कार्रवाई करनी होगी। इसके साथ ही, ऐसे अवैध कार्य में संलिप्त जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तुरंत पुलिस में एफआईआर (FIR) भी दर्ज कराई जाए।

माननीय न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट की एकलपीठ ने राज्य सरकार और तमाम संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को यह स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे जबलपुर खंडपीठ के वर्ष 2022 के पुराने आदेश और 1 नवंबर 2019 को जारी किए गए शासन के परिपत्र का पूरी सख्ती के साथ पालन सुनिश्चित करें। इस मामले में दायर की गई याचिका में यह मुख्य आरोप लगाया गया था कि वैध रूप से लगे होर्डिंग और यूनिपोल पर अवैध रूप से विज्ञापन और बैनर चस्पा किए जा रहे हैं, जिसके कारण विज्ञापन एजेंसियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

👥 भोपाल तक होगा इंदौर खंडपीठ के इस कड़े आदेश का बड़ा असर

न्यायालय के इस ऐतिहासिक और कड़े आदेश का असर अब राजधानी भोपाल में भी साफ तौर पर देखने को मिलेगा। भोपाल नगर निगम के होर्डिंग प्रभारी परितोष रंजन परसाई ने इस संबंध में प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि माननीय न्यायालय के इन निर्देशों के आधार पर अब शहर भर में बिना अनुमति लगाए जाने वाले तमाम अवैध राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनरों व पोस्टरों को हटाने का विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस कार्य को सफलता से पूरा करने के लिए नगर निगम द्वारा विशेष टीमों का गठन किया जा रहा है, जो लगातार निगरानी रखकर सख्त कार्रवाई को अंजाम देंगी।

🚫 आउटडोर मीडिया रूल्स-2017 के तहत कौन-कौन से होर्डिंग और बैनर माने जाते हैं अवैध?

'आउटडोर मीडिया रूल्स-2017' के स्पष्ट प्रावधानों के अनुसार, निम्नलिखित श्रेणियों में आने वाले सभी होर्डिंग, बैनर और स्ट्रक्चर पूरी तरह से अवैध और प्रतिबंधित माने जाते हैं:

  • बिजली के खंभों, पेड़ों या सड़क के डिवाइडरों पर बिना किसी आधिकारिक अनुमति के टांगे गए फ्लेक्स, पोस्टर और कटआउट।

  • किसी भी रजिस्टर्ड चार्टर्ड या स्ट्रक्चरल इंजीनियर के सुरक्षा प्रमाण पत्र के बिना धड़ल्ले से खड़े किए गए विज्ञापन स्ट्रक्चर।

  • शहर की ऐतिहासिक धरोहरों, राजभवन, उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) और प्रमुख धार्मिक स्थलों के निर्धारित प्रतिबंधित दायरे के भीतर लगाए गए होर्डिंग।

  • ट्रैफिक सिग्नल, व्यस्त चौराहों या संवेदनशील मोड़ों के पास राहगीरों व चालकों का ध्यान भटकाने वाली तेज रोशनी या झिलमिलाती (Flashing) स्क्रीन्स।

  • ट्रैफिक लाइट, महत्वपूर्ण रोड साइनबोर्ड या दिशा-सूचक बोर्डों को पूरी तरह या आंशिक रूप से छिपाने वाले विज्ञापन स्ट्रक्चर।

  • पैदल यात्रियों के चलने के लिए बने फुटपाथ, सर्विस रोड या रोड डिवाइडर पर रास्ता रोककर लगाए गए यूनिपोल और बड़े बोर्ड।

  • तय किए गए निर्धारित आकार के मानकों से बड़े फ्रेम वाले या हवा के दबाव व वजन के तकनीकी सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले स्ट्रक्चर।

  • किसी भी प्रकार की पूर्व अनुमति और निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किए बिना लगाए गए सभी विज्ञापन स्ट्रक्चर।

⚖️ अवैध बैनर और विज्ञापनों के खिलाफ अदालत में क्यों लगाई गई थी याचिका?

इस पूरे कानूनी विवाद की शुरुआत तब हुई जब इंदौर की 'एसएस एडवर्टाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड' (जबलपुर) और अन्य संबंधित पक्षों की तरफ से माननीय न्यायालय में एक याचिका दायर की गई। इस याचिका में यह प्रमुखता से उठाया गया था कि विज्ञापन एजेंसियां नगर निगम को नियमों के तहत भारी-भरकम शुल्क और भारी राजस्व (Revenue) का भुगतान करके विधिवत अनुमति प्राप्त करती हैं, और तब जाकर अपने यूनिपोल, लॉलीपॉप व अन्य आउटडोर विज्ञापन स्ट्रक्चर संचालित करती हैं।

इसके बावजूद, विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक अवसरों पर कुछ लोगों द्वारा इन वैध स्ट्रक्चरों पर बिना किसी अनुमति के अपने बैनर और पोस्टर जबरन टांग दिए जाते हैं, जिससे न केवल विज्ञापन स्ट्रक्चर को भौतिक नुकसान पहुंचता है बल्कि वैध कारोबारियों को भारी आर्थिक क्षति भी झेलनी पड़ती है।

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