पहले से निजी वकील होने पर लीगल एड से दूसरा वकालतनामा कैसे जारी हुआ? कोर्ट ने तलब किया स्पष्टीकरण
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने निश्शुल्क विधिक सहायता के तहत अधिवक्ता नियुक्त करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने लीगल सर्विसेज कमेटी की सचिव से व्यक्तिगत हलफनामे के साथ जवाब मांगा है।
जबलपुर: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (High Court) ने निश्शुल्क विधिक सहायता (Legal Aid) के तहत अधिवक्ता नियुक्त किए जाने की पूरी प्रक्रिया पर बहुत ही गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक व्यवस्था पर गहरी नाराजगी जताई है।
⚖️ जब निजी वकील पहले से कर रहा था पैरवी, तो दूसरा वकालतनामा कैसे जारी हुआ?
हाईकोर्ट ने मुख्य रूप से यह तीखा सवाल पूछा है कि जब किसी अपीलकर्ता की तरफ से एक निजी अधिवक्ता का वकालतनामा पहले से ही न्यायिक रिकॉर्ड पर मौजूद था और वह वकील लगातार नियमित रूप से मामले की पैरवी भी कर रहा था, ऐसी स्थिति में लीगल एड के माध्यम से दूसरा नया वकालतनामा कैसे जारी कर दिया गया? अदालत ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह संदेहास्पद माना है।
📋 व्यक्तिगत हलफनामे के साथ दो दिन के भीतर जवाब तलब
इस पूरे मामले को एक गंभीर जांच का विषय मानते हुए हाईकोर्ट ने 'हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी, जबलपुर' की सचिव को निर्देश दिया है कि वे महज दो दिन के भीतर अपना व्यक्तिगत हलफनामा (Personal Affidavit) पेश कर इस बात का स्पष्ट जवाब दें कि ऐसा किस परिस्थिति में हुआ।
🏛️ आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान सामने आया यह चौंकाने वाला तथ्य
न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच (युगलपीठ) के समक्ष रायसेन जिले के रहने वाले सुजीत धाकड़ की एक आपराधिक अपील पर सुनवाई चल रही थी। इसी सुनवाई के दौरान यह पूरा चौंकाने वाला तथ्य अदालत के संज्ञान में आया।
📄 रिकॉर्ड में पहले से दर्ज था अधिवक्ता विजय कुमार पांडे का वकालतनामा
न्यायालयीन रिकॉर्ड के मुताबिक, अधिवक्ता विजय कुमार पांडे ने साल 2023 में ही अपना वकालतनामा कोर्ट में दाखिल कर दिया था और वे लगातार इस मामले की पैरवी कर रहे थे। इसके बावजूद, साल 2025 में हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी ने अचानक दूसरे अधिवक्ता विवेक गौतम के पक्ष में लीगल एड के तहत नया वकालतनामा जारी कर दिया। कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर विषय मानते हुए इस पूरी प्रक्रिया का विस्तृत स्पष्टीकरण तलब कर लिया है।
❓ क्या अपीलकर्ता वास्तव में निश्शुल्क विधिक सहायता पाने का पात्र था?
अदालत ने लीगल सर्विसेज कमेटी की सचिव से यह भी कड़ा सवाल किया है कि क्या संबंधित अपीलकर्ता वास्तव में नियमानुसार निश्शुल्क विधिक सहायता पाने की पात्रता रखता था या नहीं? साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि क्या उस व्यक्ति ने लीगल एड प्राप्त करने के लिए कोई विधिवत आवेदन प्रस्तुत किया था भी या नहीं। इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई अब आगामी सप्ताह में होगी।
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