पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और आधुनिक विज्ञान को जोड़ने के लिए ऐतिहासिक साझेदारी, आदिवासी युवाओं को मिलेगी ट्रेनिंग

जनजातीय कार्य मंत्रालय और CSIR-NBRI ने आदिवासी जैव-संसाधनों के संरक्षण और पारंपरिक ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

Jul 29, 2026 - 18:48
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पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और आधुनिक विज्ञान को जोड़ने के लिए ऐतिहासिक साझेदारी, आदिवासी युवाओं को मिलेगी ट्रेनिंग

जनजातीय कल्याण को बढ़ावा देने, टिकाऊ आजीविका को प्रोत्साहित करने और पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने की एक बड़ी और महत्वपूर्ण पहल के तहत, केंद्र सरकार के जनजातीय मामलों के मंत्रालय (MoTA) ने लखनऊ स्थित सीएसआईआर-नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CSIR-NBRI) के साथ एक आधिकारिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस तीन साल की लंबी पार्टनरशिप का मुख्य उद्देश्य दोनों संगठनों के बीच एक निरंतर और आपसी सहयोगी संबंध स्थापित करना है, ताकि पूरे देश भर में जनजातीय जैव-संसाधनों के संरक्षण और एथनोबॉटैनिकल (पारंपरिक वनस्पति-संबंधी) मूल्यांकन के लिए रिसर्च और विकास (R&D) कार्यों को तेजी से बढ़ावा दिया जा सके।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनकी मौजूदगी में जनजातीय कार्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मनीष ठाकुर और CSIR के डायरेक्टर डॉ. अजीत कुमार शसानी ने इस MoU पर हस्ताक्षर किए। इस कार्यक्रम के दौरान CSIR के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. शरद श्रीवास्तव, CSIR के वैज्ञानिक डॉ. सचित्र रथ, CSIR के वैज्ञानिक डॉ. मनीष भोयर और जनजातीय कार्य मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी विशेष रूप से मौजूद रहे।

🔬 वैज्ञानिक रिसर्च और विकास के केंद्र में आदिवासियों का कल्याण

इस ऐतिहासिक समझौते के तहत आदिवासी समुदायों का कल्याण और उनकी स्वायत्तता सभी वैज्ञानिक गतिविधियों के मूल सिद्धांतों के रूप में तय की गई है। यह साझेदारी विशेष रूप से दुर्लभ, लुप्तप्राय और खतरे की श्रेणी में पहुँच चुकी (RET) औषधीय पौधों की प्रजातियों के संरक्षण पर पूरी तरह केंद्रित है।

इसके लिए अत्याधुनिक टिश्यू कल्चर सुविधाओं और स्पेशलाइज्ड सीड बैंकों के विकास जैसे उन्नत तकनीकी उपाय किए जा रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में लंबे समय तक चलने वाली और पूरी तरह समुदाय द्वारा संचालित स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय आदिवासी युवाओं को इन प्रसार और संरक्षण तकनीकों में व्यावहारिक क्षमता निर्माण (Capacity Building) और विशेष तकनीकी ट्रेनिंग दी जाएगी।

📜 ग्राम सभाओं की सहमति और बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा

इसके अतिरिक्त, सभी क्षेत्रीय आकलन और रिसर्च गतिविधियों के लिए संबंधित स्थानीय ग्राम सभाओं और आदिवासी कम्युनिटी की पूर्व-सूचित सहमति (PIC) को पूरी तरह अनिवार्य किया गया है, जो जैव विविधता अधिनियम, 2002 के प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन करती है।

प्रत्येक संयुक्त प्रोजेक्ट प्रपोजल में जमीनी स्तर पर सामुदायिक विकास, लोकल वैल्यू एडिशन और क्षमता निर्माण के लिए एक तय बजट मद को शामिल किया जाएगा। स्थानीय आदिवासी हितों की पूरी रक्षा करने के लिए उत्पन्न होने वाली बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) पर MoTA और CSIR-NBRI का संयुक्त स्वामित्व होगा, जिसे योगदान देने वाले मूल आदिवासी समुदायों के लिए एक न्यास (Trust) के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा या उनके साथ समान रूप से साझा किया जाएगा। इसके अलावा, मिलने वाले वित्तीय लाभ को राष्ट्रीय या राज्य जैव विविधता कोष और MoTA की समर्पित कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से वापस सीधे समुदायों तक पहुँचाया जाएगा।

यह समझौता इस बात को पूरी तरह स्पष्ट रूप से मान्यता देता है कि पारंपरिक ज्ञान आदिवासी लोगों की अनमोल सांस्कृतिक विरासत है, जिसके किसी भी प्रकार के अनधिकृत व्यावसायीकरण को रोकने के लिए राष्ट्रीय पहुँच और लाभ साझाकरण तंत्र (Access and Benefit-Sharing Mechanisms) का कड़ाई से अनुपालन करना बेहद जरूरी है।

🤝 आधुनिक विज्ञान और आदिवासी परंपराओं का अनूठा संगम

विभिन्न संयुक्त कार्यक्रमों, कार्यशालाओं, सेमिनारों और पारंपरिक ज्ञान के जानकारों व वैज्ञानिकों के बीच लगातार चलने वाले एक्सचेंज प्रोग्राम के ज़रिए MoTA का मुख्य लक्ष्य आदिवासी समुदाय के सदियों पुराने पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वनस्पति विज्ञान के साथ मजबूती से जोड़ना है।

आदिवासी युवाओं को आर्थिक और तकनीकी रूप से सशक्त बनाकर तथा स्थानीय क्षमताओं को और अधिक मजबूत करके, यह गठबंधन यह पूरी तरह सुनिश्चित करता है कि जैव-संसाधन संरक्षण का सीधा और सकारात्मक फायदा समुदाय के टिकाऊ विकास (Sustainable Development) और उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के रूप में प्राप्त हो।

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