'क्या तुम्हारे दिमाग में गोबर भरा है?' - सांदीपनी स्कूल के बच्चों ने शिक्षकों पर लगाए गंभीर आरोप, सौंपा ज्ञापन

धार के तिरला स्कूल में आदिवासी छात्रों के साथ जातिगत भेदभाव का मामला सामने आया है। छात्र 10 किमी पैदल चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और कार्रवाई की मांग की।

Jul 29, 2026 - 17:55
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'क्या तुम्हारे दिमाग में गोबर भरा है?' - सांदीपनी स्कूल के बच्चों ने शिक्षकों पर लगाए गंभीर आरोप, सौंपा ज्ञापन

धार: स्कूल में यदि कोई छात्र या छात्रा अपनी केमिस्ट्री वाली मैडम से पढ़ाई से जुड़ा कोई सवाल पूछ ले और उन्हें जवाब न मिले, तो बदले में यह सुनने को मिले कि ''क्या तुम्हारे दिमाग में गोबर भरा हुआ है, क्या तुम लोग गोबर खाते हो, आदिवासी हो, यदि तुम लोग ही सब पढ़-लिख जाओगे तो मजदूरी कौन करेगा?'' सोचिए, जब इस तरह की जातिगत अपमानजनक और प्रताड़ना भरी बातें 11वीं और 12वीं के छात्र-छात्राएं रोज सुनने के लिए मजबूर हों और स्कूल के प्राचार्य से लेकर स्थानीय स्तर पर कहीं भी कोई सुनवाई न हो, तो उनका गुस्सा फूटना लाजिमी है। इसी व्यवस्था से तंग आकर जब बच्चों की कहीं सुनवाई नहीं हुई, तो वे न्याय की गुहार लगाने के लिए पैदल ही कलेक्ट्रेट की ओर निकल पड़े।

यह पूरा गंभीर मामला धार जिले के तिरला विकासखंड स्थित सांदीपनी शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल का है, जहाँ के छात्र-छात्राओं ने स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

🚶‍♂️ सांदीपनी स्कूल के स्टूडेंट्स का 10 किमी लंबा पैदल मार्च

धार स्थित तिरला के सांदीपनी शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में जातिगत भेदभाव और प्रताड़ना का एक बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है। इस स्कूल के 11वीं और 12वीं कक्षा के दर्जनों छात्र और छात्राओं ने स्कूल की प्राचार्य सीमा मिश्रा, केमिस्ट्री टीचर दीपिका शक्तावत और बालिका हॉस्टल की वार्डन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

जब विद्यालय स्तर पर उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया, तो छात्र-छात्राओं के एक दल ने 'एक्सप्रेस' नामक छात्र संगठन के सहयोग से करीब 10 किलोमीटर की लंबी पैदल यात्रा की और पैदल ही चलकर जिला मुख्यालय धार जा पहुँचे। यहाँ उन्होंने आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त को अपना लिखित ज्ञापन सौंपा। इस दौरान रास्ते भर छात्र-छात्राएं स्कूल की प्राचार्य और केमिस्ट्री टीचर के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते रहे।

🗣️ छात्र-छात्राओं का आरोप: "पिछले एक साल से लगातार हो रहे हैं प्रताड़ित"

10 किलोमीटर पैदल चलकर अपनी शिकायत दर्ज कराने पहुँचे छात्र-छात्राओं का साफ और दो टूक कहना है कि प्राचार्य मैडम, केमिस्ट्री टीचर और हॉस्टल वार्डन को उनके पदों से हर हाल में हटाया जाना चाहिए। यदि वे प्रिंसिपल मैडम से कोई शिकायत करते हैं, तो उन्हें उल्टा डराया-धमकाया जाता है।

कक्षा 11वीं की एक छात्रा ने आरोप लगाते हुए बताया, ''जब हम केमिस्ट्री वाली मैडम दीपिका शक्तावत से कोई सवाल पूछते हैं, तो वे कहती हैं कि तुम लोग पढ़-लिखकर क्या करोगी, यदि तुम सब लोग ही पढ़ लिख जाओगी तो गोबर कौन उठाएगा? इसके अलावा वे बात-बात पर हमारा जातिगत अपमान करती हैं और बेहद गंदी भाषा का प्रयोग करती हैं।''

स्कूल की ही एक अन्य छात्रा ने दर्द बयां करते हुए कहा, ''पिछले एक साल से ज्यादा का समय हो गया है, लेकिन प्राचार्य मैडम हमारी एक भी बात सुनने को तैयार नहीं हैं। हम इस संबंध में 2 से 3 बार लिखित आवेदन भी दे चुके हैं, लेकिन आज तक कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई।'' छात्राओं का यह भी आरोप है कि बालिका हॉस्टल के अंदर उन सभी से जबरन झाड़ू-पोंछा जैसे सारे काम करवाए जाते हैं और खाने में बेहद घटिया स्तर का तथा कीड़े वाला भोजन परोसा जाता है।

छात्रों ने आगे आरोप लगाया, ''जब हमें पढ़ाई के दौरान कोई सवाल समझ नहीं आता और हम उसे दोबारा पूछ लेते हैं, तो केमिस्ट्री वाली मैडम कहती हैं कि क्या तुम लोग गोबर खाते हो, क्या तुम्हारे दिमाग में गोबर भरा है? वे आदिवासियों को लेकर लगातार जातिसूचक और अपमानजनक टिप्पणियां करती हैं। हमने प्राचार्य मैडम सीमा मिश्रा से कई बार इसकी शिकायत की, लेकिन उन्होंने हमेशा नजरअंदाज कर दिया। स्थिति यह है कि पिछले एक-दो हफ्ते से स्कूल में बायोलॉजी और फिजिक्स की क्लास तक नहीं लग रही है।''

📝 छात्र-छात्राओं ने दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन

अपनी इस पीड़ा को प्रशासन तक पहुँचाने के लिए छात्र-छात्राओं का यह दल पूरे 10 किलोमीटर पैदल चलकर सीधे आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त के पास पहुँचा और उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में कुल 8 से 9 प्रमुख बिंदुओं पर गंभीर शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। ज्ञापन में मुख्य रूप से विद्यालय की प्राचार्य, केमिस्ट्री की शिक्षिका और विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।

छात्रों का आरोप है कि केमिस्ट्री टीचर दीपिका शक्तावत पिछले एक साल से आदिवासी छात्र-छात्राओं पर लगातार कथित रूप से जातिसूचक टिप्पणियां कर रही हैं और उनके साथ लगातार अभद्र व्यवहार किया जा रहा है। छात्रों का कहना है कि इस विषय में पूर्व में भी कई बार अधिकारियों को अवगत कराया गया था, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई भी प्रभावी और ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

छात्रों ने मांग की है कि केमिस्ट्री टीचर, प्राचार्य और बीईओ के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाए, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, छात्रावास की व्यवस्थाओं में सुधार किया जाए और छात्र-छात्राओं की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित की जाए। वहीं, आदिवासी छात्र संगठनों ने यह कड़ी चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले में कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया, तो जिला मुख्यालय पर एक बड़ा और उग्र छात्र आंदोलन किया जाएगा।

🔍 सहायक आयुक्त पारुल जैन का बयान: "हर मामले की निष्पक्षता से होगी जांच"

इस पूरे घटनाक्रम पर संज्ञान लेते हुए आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त श्रीमती पारुल जैन ने मीडिया को जानकारी दी, ''सांदीपनी स्कूल तिरला के 11वीं और 12वीं के छात्र-छात्राओं ने आज एक ज्ञापन सौंपा है। छात्रों की मुख्य शिकायत यह है कि केमिस्ट्री टीचर दीपिका शक्तावत बच्चों के साथ बेहद अभद्र भाषा का इस्तेमाल करती हैं। इसके अलावा स्कूल की प्राचार्य से संबंधित शिकायतें भी सामने आई हैं। स्कूल में बायोलॉजी और फिजिक्स की क्लास न लगने की बात भी कही गई है।''

उन्होंने आगे बताया कि छात्राओं ने हॉस्टल से जुड़ी कई अन्य शिकायतें भी दर्ज कराई हैं। ज्ञापन में कुल 8 से 9 बिंदुओं पर गंभीर शिकायतें दी गई हैं। इसमें शामिल प्रत्येक बिंदु की नियमानुसार गहनता और पूरी निष्पक्षता से जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद सबसे पहले केमिस्ट्री टीचर को स्कूल से हटाया जाएगा।

इस संबंध में सहायक आयुक्त ने छात्रों को पूरा भरोसा दिलाते हुए यह भी कहा कि, ''बच्चे 10 किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्ट्रेट तक पहुँचे हैं, ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि उन्हें स्कूल परिसर से बाहर आने की अनुमति कैसे मिली और स्कूल के प्राचार्य तथा शिक्षकों ने उन्हें क्यों नहीं रोका? इसे लेकर भी अलग से जांच की जाएगी।''

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