उज्जैन के एक घर से निकले सांप के 14 बच्चे, दो दिनों तक सहमा रहा परिवार; वन विभाग कर रहा तलाश
उज्जैन के बड़नगर मार्ग पर एक घर से सांप के 14 बच्चे मिलने से हड़कंप मच गया। लगातार दो दिनों तक चले रेस्क्यू के बाद सभी बच्चों को सुरक्षित जंगल में छोड़ा गया।
उज्जैन: मानसून के इस बारिश के मौसम में जहरीले और अन्य सांपों के बिलों से बाहर निकलने की घटनाएं तेजी से बढ़ जाती हैं। ऐसा ही एक हैरान करने वाला और दहला देने वाला मामला मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के अंतर्गत आने वाली बड़नगर तहसील से सामने आया है। बदनावर मार्ग पर स्थित गंधर्व तलाई इलाके में रहने वाले नंदकिशोर चौहान का परिवार उस वक्त भयंकर दहशत में आ गया, जब उन्हें अपने ही घर के अंदर एक के बाद एक सांप के छोटे-छोटे बच्चे दिखाई देने लगे। घर के अंदर सांपों के निकलने का यह सिलसिला लगातार दो दिनों तक रुक-रुक कर जारी रहा। इस घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के मकानों में रहने वाले अन्य परिवार भी भारी खौफ और दहशत में आ गए।
🐍 घर के अंदर से एक-एक करके निकले सांप के कुल 14 बच्चे
गृहस्वामी नंदकिशोर चौहान ने पूरी घटना की जानकारी देते हुए बताया, ''घटना के पहले दिन हमारे घर में अचानक 3 सांप के बच्चे दिखाई दिए, जिन्हें हमने तुरंत स्थानीय सर्पमित्र (Snake Catcher) की सहायता से सुरक्षित रेस्क्यू करवाकर बाहर भिजवाया था। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इसके अगले दिन सांपों के निकलने की यह संख्या और भी अधिक बढ़ गई।''
दूसरे दिन एक साथ 11 और नए सांप के बच्चे घर के अलग-अलग कोनों से बाहर निकल आए। स्थिति को गंभीर देखते हुए उन्होंने तुरंत वन विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना दी, लेकिन आरोप है कि समय पर विभाग का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुँचा। आखिरकार स्थानीय ग्रामीणों और सर्पमित्र की मदद से ही सभी सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू करवाना पड़ा। गनीमत यह रही कि इन सांपों के काटने से किसी भी इंसान को कोई नुकसान नहीं पहुँचा। रेस्क्यू किए गए सभी 14 बच्चों को सुरक्षित रूप से पास के जंगल में छोड़ दिया गया है। यह पूरी घटना बीते शनिवार और रविवार की बताई जा रही है, जिसके वीडियो अब बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
🔍 बड़े सांप की तलाश में जुटी वन विभाग की टीम
स्थानीय नागरिकों और मकान मालिक नंदकिशोर द्वारा दी गई सूचना के बाद अब वन विभाग की टीम हरकत में आई है, हालांकि विभाग तब सक्रिय हुआ जब सभी छोटे सांपों का रेस्क्यू पहले ही पूरा हो चुका था।
अब वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा उस मकान सहित आसपास के पूरे क्षेत्र की बारीकी से जांच की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर ये बच्चे किस प्रजाति के सांप के हैं और उनकी मां (बड़ा सांप) कहाँ छिपी हुई है। हालांकि घटना के दो दिन बीत जाने के बाद भी मुख्य सांप का अभी तक कोई सुराग हाथ नहीं लग पाया है।
वन विभाग का ऐसा अनुमान है कि मकान की नींव या उसके आसपास किसी सुरक्षित जगह पर मादा सांप ने अंडे दिए होंगे, जिसके चलते ये बच्चे बाहर निकले। विभाग की टीम लगातार इसकी तलाश कर रही है और उनका कहना है कि जैसे ही वह सांप मिलेगा, उसे भी सुरक्षित पकड़कर उसके बच्चों के पास जंगल में छोड़ दिया जाएगा।
⚠️ बारिश के मौसम में क्यों बढ़ जाता है घरों के आसपास सांपों का खतरा?
शहर के प्रसिद्ध सर्प उद्यान एवं अनुसंधान केंद्र के निदेशक और विशेषज्ञ मुकेश इंग्ले ने इस बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया, ''मानसून के इस बारिश के मौसम में जमीन के अंदर पानी भर जाने के कारण सांपों और अन्य जीव-जंतुओं पर काफी असर पड़ता है। लगातार बारिश से जमीन के गड्ढों में और सांपों के प्राकृतिक बिलों में पानी भर जाता है, जिसके कारण साँस लेने और सुरक्षित रहने के लिए सांप बाहर निकलने को मजबूर होते हैं।''
वे बिलों से निकलकर इंसानी बस्तियों, घरों, कूड़ेदानों या हरियाली वाले क्षेत्रों में छिपने के लिए सुरक्षित जगह तलाशते हैं। उज्जैन क्षेत्र में कोबरा (नाग), रसेल वाइपर (फुरसा), कॉमन क्रैत (करैत) और पानी वाले सामान्य सांपों का निकलना इस मौसम में आम बात है।
उन्होंने आम जनता को सलाह देते हुए कहा कि इस मौसम में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अपने घर के आसपास किसी भी प्रकार की अनचाही हरियाली या झाड़ियों की समय पर कटाई-छंटाई करते रहें। घर के आसपास कचरा बिल्कुल भी एकत्रित न होने दें। अपने जूतों और चप्पलों को हमेशा किसी ऊंचे और सुरक्षित स्थान पर ही रखें। इसके अलावा, यदि आप अपनी गाड़ी या बाइक को स्टार्ट करने जा रहे हैं, तो एक बार अच्छी तरह से चेक जरूर कर लें, क्योंकि कई बार ठंडी जगह की तलाश में सांप गाड़ियों के टायरों या इंजन के पास जाकर बैठ जाते हैं।
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