साध्वी हर्षानंद गिरी ने देश के बड़े आश्रमों की गतिविधियों पर उठाए सवाल, कहा- कोई संत ले सुरक्षा की गारंटी तो वहीं रहूंगी
मॉडल से साध्वी बनीं हर्षानंद गिरी ने उज्जैन में कहा कि आज देश में कोई भी आश्रम सुरक्षित नहीं है। उन्होंने बड़े आश्रमों की गतिविधियों पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
उज्जैन: प्रसिद्ध मॉडल और टीवी एंकर से साध्वी बनीं हर्षानंद गिरी (पूर्व नाम हर्षा रिछारिया) ने देश भर में संचालित होने वाले विभिन्न बाबाओं के आश्रमों और उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वे हाल ही में गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर अपने गुरु महामंडलेश्वर सुमनानंद गिरी के उज्जैन स्थित मंगलनाथ रोड पर बने मौनीतीर्थ आश्रम पहुँची थीं। इस दौरान मीडिया कर्मियों द्वारा पूछे गए तमाम सवालों के उन्होंने बेहद बेबाक और स्पष्ट जवाब दिए।
🏠 "मेरे पास रहने के लिए केवल दो ही ठिकाने हैं: गुरु का आश्रम या माता-पिता का घर"
जब पत्रकारों ने उनसे यह सीधा सवाल किया कि संन्यास ग्रहण करने और अपना पिंडदान करने के बाद भी वह अपने माता-पिता के घर पर ही क्यों निवास करती हैं?
इस पर साध्वी हर्षानंद गिरी ने खुलकर जवाब देते हुए कहा, ''आज के समय में देश में एक भी ऐसा आश्रम पूरी तरह सुरक्षित नहीं है, जहाँ एक अकेली महिला या बेटी खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर सके। यदि कोई संत मुझे अपनी बेटी के समान मानकर जीवनभर मेरी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी लेने को तैयार हो जाए, तो मैं उसी क्षण उस आश्रम में रहने को तैयार हूँ। जो लोग आज मेरे घर रहने पर आपत्ति जता रहे हैं, उनके पास तो बड़े-बड़े और आलीशान आश्रम हैं। लेकिन मेरे पास तो रहने के लिए केवल दो ही ठिकाने हैं—पहला मेरे गुरु का आश्रम और दूसरा मेरे माता-पिता का घर।''
🛡️ "कौन लेगा मेरी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी? आज के समय में कौन पवित्र है?"
साध्वी हर्षानंद गिरी ने अपनी सुरक्षा और समाज की स्थिति पर बात करते हुए आगे कहा, ''कुछ दिन गुरु के आश्रम में समय बिताने के बाद मुझे अपने माता-पिता की सुरक्षा और संरक्षण में उनके घर रहना ही उचित लगता है। इस बात पर किसी को भी किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होनी चाहिए।''
उन्होंने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि वर्तमान समय में देश में लड़कियां कितनी सुरक्षित हैं, यह बात मुझसे ज्यादा आप सभी लोग भली-भांति जानते हैं। जब तक मेरा अपना कोई स्थाई और सुरक्षित ठिकाना नहीं बन जाता, तब तक मेरा ऐसा रहना ही ठीक है।
आज के दौर में कौन सा इंसान पूरी तरह पवित्र है? कौन सा संत ऐसा है जो यह डंके की चोट पर आश्वासन देने को तैयार हो सके कि 'हर्षानंद मेरी अपनी बेटी के समान है और मैं इसके जीवनपर्यंत सुरक्षा की पूरी गारंटी लेता हूँ?' यदि कोई संत ऐसा कहने का साहस जुटा ले, तो मैं सहर्ष उस आश्रम को अपना स्थायी ठिकाना बना लूँगी।
⚠️ आश्रमों की गुप्त गतिविधियों और संतों की जीवनशैली पर उठाए बड़े सवाल
देशभर के बड़े आश्रमों में चल रही गतिविधियों पर बेबाक टिप्पणी करते हुए साध्वी हर्षानंद गिरी ने कहा, ''वर्तमान समय में कई बड़े-बड़े आश्रमों के भीतर बंद कमरों में गुपचुप तरीके से पार्लर वालों और ब्यूटीशियंस को बुलाकर मेनिक्योर-पेडिक्योर जैसी विलासिता भरी गतिविधियां कराई जाती हैं। लेकिन मैं ऐसा कोई भी कार्य नहीं करती हूँ।''
उन्होंने अपनी जीवनशैली का बचाव करते हुए अंत में यह भी कहा कि वैसे भी माता लक्ष्मी और भगवान नारायण स्वयं अत्यंत सुंदर हैं और वे हमेशा बेहद सुंदर वातावरण में निवास करते हैं। ऐसे में जो लोग उनकी सच्ची आराधना और भक्ति करते हैं, वे सुंदर ढंग से और साफ-सुथरे तरीके से क्यों नहीं रह सकते? यह केवल देखने वालों की छोटी सोच का अंतर है।
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