खुले सेप्टिक टैंक हादसों पर सीएम मोहन यादव सख्त, दोषी अधिकारियों पर होगी बर्खास्तगी की कार्रवाई
मध्य प्रदेश में खुले सेप्टिक टैंक और बोरवेल हादसों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त निर्देश दिए हैं। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर निलंबन और बर्खास्तगी की कार्रवाई होगी।
भोपाल। मध्य प्रदेश में अब यदि खुले सेप्टिक टैंक या बोरवेल की वजह से कोई भी दुर्घटना होती है, तो इसके लिए पूरी तरह जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध सीधे निलंबन से लेकर बर्खास्तगी तक की कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ओंकारेश्वर में हुई दर्दनाक घटना के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बेहद सख्त और स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। इस तरह की गंभीर दुर्घटनाओं पर अब सीधी जवाबदेही तय की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। इतना ही नहीं, ऐसे प्रत्येक प्रकरण में संबंधित अधिकारियों की विभागीय जांच भी कराई जाएगी।
⚠️ लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर होगी निलंबन और बर्खास्तगी की कार्रवाई
राज्य शासन के नए निर्देशों के अनुसार, यदि दुर्घटना में किसी भी स्तर पर अधिकारियों या कर्मचारियों की लापरवाही पाई जाती है, तो उन्हें तुरंत निलंबित कर दिया जाएगा।
इसके बाद यदि विभागीय जांच में वे दोषी साबित होते हैं, तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नौकरी से बर्खास्तगी की सख्त कार्रवाई की जाएगी। आपको बता दें कि ओंकारेश्वर की इस घटना से पहले भी प्रदेश के कई अन्य शहरों में खुले और पूरी तरह असुरक्षित सेप्टिक टैंकों के कारण कई मासूमों और नागरिकों की जान जा चुकी है। पिछले महीने यानी जून में ही बैतूल जिले के मुलताई में और अक्टूबर 2025 में जबलपुर में दो सगे भाइयों की ऐसे ही हादसों में मौत हो गई थी।
📋 शासन की गाइडलाइन के बावजूद लापरवाही बनी जानलेवा
मध्य प्रदेश के अन्य शहरों में भी इस तरह की कई दुखद घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हालांकि राज्य शासन द्वारा पहले से ही यह सख्त हिदायत दी गई थी कि किसी भी स्थिति में सेप्टिक टैंक और बोरवेल को खुला न छोड़ा जाए।
इस तरह के हादसों को रोकने के लिए शासन ने विस्तृत गाइडलाइन भी बनाई हुई है, लेकिन मैदानी स्तर पर सख्ती और मॉनिटरिंग न होने के कारण बार-बार हो रही यह लापरवाही अब आम जनता के लिए जानलेवा साबित हो रही है।
📉 सेप्टिक टैंक में गिरने से जुड़ी हालिया और प्रमुख घटनाएं
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ओंकारेश्वर (25 जुलाई 2026): ब्रह्मपुरी पार्किंग क्षेत्र में एक खुले सेप्टिक टैंक में अचानक गिर जाने से नागपुर के तीन वर्षीय मासूम बच्चे (तनुष) की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस मामले में हैरानी की बात यह थी कि नगर परिषद द्वारा ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान उस सेप्टिक टैंक को खुला छोड़ दिया गया था, जिसकी वजह से यह बड़ा हादसा हुआ।
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जबलपुर (26 अक्टूबर 2025): एक अस्पताल परिसर के भीतर बने खुले सेप्टिक टैंक में खेलते-खेलते गिर जाने से दो सगे मासूम भाइयों की डूबने से मौत हो गई थी।
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बैतूल (10 जून 2026): मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई थाना क्षेत्र के अंतर्गत परमंडल (भगत सिंह वार्ड) में यह हादसा हुआ था। इस दुर्घटना में डिवटिया गांव के निवासी दो सगे भाइयों, संजय पंवार और विजय पंवार की सेप्टिक टैंक की सेंटरिंग निकालते समय जहरीली गैस की चपेट में आने और दम घुटने के कारण मौत हो गई थी।
🤖 'नमस्ते योजना' के तहत मशीनीकरण और जवाबदेही पर जोर
इस पूरे विषय पर सरकार का पक्ष रखते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि हम भारत सरकार की 'नमस्ते योजना' (NAMASTE Scheme) पर अब और अधिक प्रभावी एवं मुस्तैद रूप से कार्य कर रहे हैं।
इस योजना के तहत सीवर और सेप्टिक टैंक की हाथ से की जाने वाली खतरनाक सफाई को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है, और अब सफाई व्यवस्था केवल आधुनिक मशीनों के माध्यम से ही कराई जाती है। जहाँ तक सेप्टिक टैंकों से होने वाले हादसों का सवाल है, इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की गई है और किसी भी तरह की लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई का पूरा प्रावधान लागू कर दिया गया है।
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