एसटी कोटे से प्रमोट सीएमएचओ पर जनरल कोटे का ईडब्ल्यूएस लाभ लेने का आरोप, सीएमएचओ ने दी सफाई

छिंदवाड़ा के पूर्व जिला अध्यक्ष रमेश पोपली ने सीएमएचओ डॉ. नरेश गोन्नाने पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए बेटे को मेडिकल ऑफिसर बनाने का आरोप लगाया है। सीएमएचओ ने आरोपों को नकारा।

Aug 04, 2026 - 11:12
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एसटी कोटे से प्रमोट सीएमएचओ पर जनरल कोटे का ईडब्ल्यूएस लाभ लेने का आरोप, सीएमएचओ ने दी सफाई

छिंदवाड़ा: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष रमेश पोपली ने छिंदवाड़ा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नरेश गोन्नाने पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि सीएमएचओ ने फर्जी दस्तावेजों और नियमों को ताक पर रखकर अपने बेटे को मेडिकल ऑफिसर के पद पर नौकरी दिलाई है। इस मामले की आधिकारिक शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय सहित संबंधित उच्च विभागों को भेज दी गई है।

📄 ईडब्ल्यूएस (EWS) प्रमाण पत्र को लेकर उठाए गए गंभीर सवाल

बीजेपी नेता रमेश पोपली ने अपनी शिकायत में मुख्य रूप से यह आरोप लगाया है कि, "छिंदवाड़ा के सीएमएचओ डॉ. नरेश गोन्नाने मूल रूप से अनुसूचित जनजाति वर्ग से आते हैं। उनके बेटे जितेश गोन्नाने ने अपनी पढ़ाई के दौरान आरक्षित कोटे का लाभ लिया, लेकिन जब नौकरी पाने की बारी आई, तो उसने सामान्य कोटे के तहत ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) का फर्जी प्रमाण पत्र बनवा लिया और इसी आधार पर मेडिकल ऑफिसर की सरकारी नौकरी हासिल कर ली।"

शिकायतकर्ता का तर्क है कि एक तरफ जहाँ डॉ. नरेश गोन्नाने खुद जिला स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं और उनकी सालाना सैलरी करीब 15 लाख रुपये है, वहीं सरकारी नियमों के मुताबिक केवल 8 लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले सामान्य वर्ग के व्यक्ति का ही वैध ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बन सकता है। ऐसे में यह सर्टिफिकेट पूरी तरह संदेहास्पद है।

📋 शिकायत में दर्ज की गई सीएमएचओ की पूरी सेवा हिस्ट्री

दी गई शिकायत में डॉ. नरेश गोन्नाने के अब तक के सेवा रिकॉर्ड और इतिहास का भी पूरा ब्योरा दिया गया है।

शिकायत के अनुसार, डॉ. नरेश गोन्नाने वर्तमान में छिंदवाड़ा जिले में प्रभारी सीएमएचओ के पद पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इससे पहले वह सिविल अस्पताल पांढुर्णा में मेडिकल ऑफिसर के पद पर पदस्थ रहे हैं। इसके बाद 10 फरवरी 2023 को वह अनुसूचित जनजाति (ST) कोटे के तहत पदोन्नत होकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बने। 1 अगस्त 2024 से वह डीएचओ के पद के साथ-साथ जिला चिकित्सालय छिंदवाड़ा में प्रभारी सिविल सर्जन के रूप में भी कार्य करते रहे हैं, और 1 जुलाई 2025 से उन्हें सिविल सर्जन सह अधीक्षक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

⚖️ एसटी कोटे से प्रमोशन और बेटे की नौकरी को लेकर आरोप

शिकायत में यह भी रेखांकित किया गया है कि डॉ. गोन्नाने की आधिकारिक विभागीय वरिष्ठता सूची और सेवा रिकॉर्ड में उनकी जाति हलबा (अनुसूचित जनजाति) दर्ज है।

उनकी खुद की मेडिकल ऑफिसर के पद पर शुरुआती नियुक्ति और जिला स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर हुई पदोन्नति पूरी तरह अनुसूचित जनजाति कोटे के आधार पर ही हुई है। इसके बावजूद उनके बेटे जितेश गोन्नाने ने सामान्य कोटे के तहत गरीबी रेखा के नीचे या ईडब्ल्यूएस श्रेणी का प्रमाण पत्र बनवाकर संविदा पर मेडिकल ऑफिसर की नौकरी हासिल कर ली, और वर्तमान में वह पांढुर्णा के सिराठा उप स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ हैं।

🗣️ सीएमएचओ डॉ. नरेश गोन्नाने ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को नकारा

अपने ऊपर लगे इन तमाम गंभीर और सनसनीखेज आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सीएमएचओ डॉ. नरेश गोन्नाने ने अपनी सफाई में कहा कि यह पूरी तरह निराधार और बेबुनियाद बातें हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बेटे ने अपनी पढ़ाई की शुरुआत से ही जनरल कोटे के तहत पढ़ाई की है और उसकी नौकरी भी पूरी तरह जनरल कोटे में ही लगी है। एक वयस्क बेटे की नौकरी और उसके जीवन से उसके पिता का कोई सीधा लेना-देना नहीं होता है, क्योंकि वह अब एक अलग परिवार के साथ रहता है और उनसे अलग निवास करता है। उन्हें बेवزह मानसिक रूप से परेशान करने के उद्देश्य से यह झूठी शिकायत दर्ज कराई गई है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में जिला कलेक्टर के स्तर पर पहले से ही विभागीय जांच चल रही है, और जब जांच पूरी होगी तो सारी असलियत अपने आप सामने आ जाएगी। वे हर स्तर पर कानूनी और तथ्यात्मक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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