जावरा के हुसैन टेकरी में संपन्न हुआ 84वां चेहल्लुम, मातम-ऐ-खंदक (चूल) में उमड़ी लाखों की भीड़
रतलाम के जावरा स्थित हुसैन टेकरी में 84वें चेहल्लुम का समापन मातम-ऐ-खंदक (चूल) के साथ हुआ। देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं ने जलते अंगारों पर चलकर मन्नतें मांगीं।
रतलाम: मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के जावरा स्थित विश्व प्रसिद्ध 'हुसैन टेकरी' में बीती रात 84वें चेहल्लुम का समापन बेहद पारंपरिक और ऐतिहासिक रूप से 'मातम-ऐ-खंदक' (चूल) के साथ संपन्न हुआ। इस भव्य आयोजन में देश के कोने-कोने के अलावा विदेशों से भी भारी संख्या में जायरीन और श्रद्धालु पहुंचे। इस विशेष धार्मिक आयोजन में महिलाओं की भी बहुत बड़ी उपस्थिति देखने को मिली। इस वर्ष जलते हुए अंगारों यानी चूल पर चलने के लिए कुल 48 दूल्हों का चयन किया गया था, जिन्हें सबसे पहले चूल पर चलने का धार्मिक अवसर प्राप्त हुआ।
🔥 144 साल पुरानी परंपरा और जलते अंगारों पर आस्था की छलांग
पिछले 144 वर्षों से चली आ रही इस प्राचीन परंपरा को लेकर लोगों में अगाध आस्था है कि इन जलते हुए अंगारों पर चलने से तमाम प्रकार की प्रेत बाधाओं और कष्टों से मुक्ति मिलती है।
यही वजह है कि इस आयोजन में शामिल होने के लिए हजारों की संख्या में लोग दूर-दूर से आते हैं और मातम-ऐ-खंदक के दौरान यहाँ श्रद्धालुओं की कुल संख्या बढ़कर डेढ़ से दो लाख तक पहुँच जाती है। इतनी भारी भीड़ और जनसैलाब को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय पुलिस व जिला प्रशासन द्वारा चाक-चौबंद सुरक्षा इंतजाम किए जाते हैं।
🕌 ऐतिहासिक महत्व और मुसलमानों की आस्था का बड़ा केंद्र
रतलाम के जावरा में स्थित हुसैन टेकरी शरीफ की स्थापना वर्ष 1882 में हुई थी।
इतिहास के अनुसार, जावरा रियासत के तत्कालीन नवाब इस्माइल अली खान ने हुसैन टेकरी के विशाल मैदान में एक चमत्कारिक घटना को महसूस किया था, जिसके बाद उन्होंने जावरा में हुसैन टेकरी शरीफ की स्थापना कराई। स्थानीय निवासी नौशाद शाह ने जानकारी देते हुए बताया कि, "तत्कालीन नवाब और वहाँ मौजूद स्थानीय लोगों ने जंगल वाले इस इलाके में हजरत इमाम हुसैन साहब की रूहानी झलक देखी थी। उन्हें आसमान में तेज रोशनी, जलती हुई मशालें और कई घुड़सवार भी नजर आए थे।"
🌿 लाइलाज बीमारियों और प्रेत बाधा से मुक्ति की मान्यता
नौशाद शाह ने आगे बताया कि इमाम हुसैन की इस अलौकिक झलक के दिखने के बाद ही हुसैन टेकरी शरीफ की स्थापना की गई, और देखते ही देखते यह स्थान पूरे मुस्लिम समाज के साथ-साथ सर्वधर्म की आस्था का एक प्रमुख केंद्र बन गया।
यहाँ की यह मान्यता है कि यहाँ आकर सच्ची श्रद्धा से इबादत करने और चूल के इस कठिन आयोजन में चलने से गंभीर बीमारियों तथा प्रेत बाधाओं से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाता है। धीरे-धीरे इस आयोजन में केवल मुस्लिम समाज ही नहीं, बल्कि अन्य सभी समुदायों के लोग भी बड़ी संख्या में पहुँचने लगे, और अब यहाँ चेहल्लुम के विशेष अवसर पर देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग आते हैं।
👮 पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस अधीक्षक की निगरानी
बहरहाल, हुसैन टेकरी में चल रहे चेहल्लुम पर्व का दसवें दिन शांतिपूर्ण तरीके से समापन हो गया है।
हजारों और लाखों की संख्या में उमड़ी इस अपार भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अमला पूरी रात लगातार सक्रिय रहा। रतलाम के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस विशाल आयोजन के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। मेले में जिगजैग बैरिकेडिंग, ड्रोन कैमरों व दूरबीन से कड़ी निगरानी, कार्यक्रम समाप्ति के बाद सुगम एग्जिट की व्यवस्था के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिला और पुरुष पुलिस बल को तैनात किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप यह पूरा धार्मिक आयोजन पूरी तरह शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सका है।
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