रतलाम कलेक्टर अजय कटेसरिया पहुंचे खेत; मजदूरों के साथ बैठकर समझी सोयाबीन कटाई की प्रोग्रेस
रतलाम कलेक्टर अजय कटेसरिया ने जमुनिया गांव का दौरा कर सोयाबीन फसल की कटाई और पैदावार का जायजा लिया। किसानों ने बेमौसम बारिश से फसल खराब होने की चिंता जताई।
रतलाम। कलेक्टर अजय कटेसरिया ने जिले के ग्रामीण अंचलों का दौरा कर सोयाबीन फसल की कटाई और पैदावार की मैदानी स्थिति को समझा। अपने भ्रमण के दौरान कलेक्टर जमुनिया गांव पहुंचे, जहां सोयाबीन के खेत में फसल की कटाई कर रहे मजदूरों और किसानों के बीच जाकर वे खुद जमीन पर बैठ गए। उन्होंने किसानों से बातचीत कर फसल की स्थिति और कटाई के पारंपारिक तरीकों को जाना। अपने बीच जिले के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी को पाकर खेत में काम कर रहे मजदूरों और किसानों में भारी उत्साह देखा गया।
🚜 किसान किशन पाटीदार के खेत में पहुंचे कलेक्टर: मजदूरी दर, काम के घंटे और प्रति क्विंटल उत्पादन पर की चर्चा
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने किसान किशन जयंतीलाल पाटीदार के खेत में चल रही सोयाबीन कटाई का जायजा लिया।
कलेक्टर ने किसानों से इस बार की सोयाबीन फसल की सेहत का हाल-चाल जाना। उन्होंने खेत में मौजूद श्रमिकों से उनके काम के घंटे और रोजाना मिलने वाली मजदूरी की दर (रेट) की विस्तृत जानकारी ली। इसके साथ ही कलेक्टर ने ग्रामीणों से कृषि संबंधी सवाल पूछते हुए जाना कि एक क्विंटल सोयाबीन का बीज बोने पर औसतन कितना क्विंटल उत्पादन प्राप्त होता है।
📊 प्रति बीघा 3 से 4 क्विंटल उत्पादन की उम्मीद: जिला पंचायत सीईओ वैशाली जैन ने दी जानकारी
मामले में जानकारी देते हुए जिला पंचायत सीईओ वैशाली जैन ने बताया कि कलेक्टर द्वारा जमुनिया गांव में जयंतीलाल पाटीदार के खेत का निरीक्षण किया गया।
उन्होंने बताया कि कलेक्टर ने खेत में श्रमिकों के साथ बैठकर फसल की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। जब कलेक्टर ने किसानों से पूछा कि प्रति बीघा कितना उत्पादन होने की उम्मीद है, तो किसानों ने बताया कि भले ही इस बार बारिश थोड़ी कम हुई है, लेकिन सोयाबीन की स्थिति ठीक है और 3 से 4 क्विंटल प्रति बीघा तक उत्पादन मिल जाएगा। इस पर कलेक्टर ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह काफी अच्छा उत्पादन है।
🌧️ "सोयाबीन तो ठीक, अगली फसल की चिंता": सितंबर की बारिश से फसल खराब होने का सता रहा डर
बातचीत के दौरान किसानों ने कलेक्टर के समक्ष अपनी आगामी समस्याओं को भी रखा।
किसानों ने बताया कि मानसून में बारिश की कमी के कारण आने वाले रबी सीजन में सिंचाई के लिए पानी का संकट खड़ा हो सकता है। इसके अलावा, यदि सितंबर के आखिरी दिनों में बेमौसम बारिश होती है, तो खेत में कटकर पड़ी सोयाबीन की पकी हुई फसल के खराब होने की पूरी आशंका है।
☔ शाम ढलते ही शुरू हुआ बारिश का दौर: कटी हुई सोयाबीन फसल में अंकुरण और नुकसान का खतरा
किसानों द्वारा जताई गई आशंका के ठीक बाद शाम से क्षेत्र में बारिश का दौर शुरू हो गया।
खेतों में काटकर रखी गई सोयाबीन की फसल भीगने से उसमें दोबारा अंकुरित होने का बड़ा डर पैदा हो गया है। इसके साथ ही भीगी हुई फसल को सुखाने और सहेजने के लिए किसानों को अतिरिक्त मजदूर लगाने पड़ेंगे, जिससे उन पर आर्थिक बोझ भी बढ़ेगा।
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