खंडवा में जर्जर हो रहा किशोर दा का गांगुली हाउस, 40 साल से नहीं खुले कई कमरों के ताले

खंडवा में स्थित महान गायक किशोर कुमार का पैतृक गांगुली हाउस आज बदहाली के दौर से गुजर रहा है। संगीत प्रेमियों की मांग है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को संग्रहालय बनाया जाए।

Aug 04, 2026 - 17:43
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खंडवा में जर्जर हो रहा किशोर दा का गांगुली हाउस, 40 साल से नहीं खुले कई कमरों के ताले

खंडवा: "मेरे घर में तुमको कुछ सामान मिलेगा..." यह केवल सुप्रसिद्ध गायक किशोर कुमार का कोई लोकप्रिय फिल्मी गीत भर नहीं है, बल्कि आज उनके मध्य प्रदेश के खंडवा स्थित पैतृक 'गांगुली हाउस' की एक बेहद दर्दभरी और कड़वी हकीकत बन चुका है। कभी जिस घर में सुरों की भव्य महफिलें सजा करती थीं, दोस्तों की बेफिक्र हंसी गूंजा करती थी और भारतीय संगीत के नए-नए रंग जन्म लिया करते थे, आज उसी ऐतिहासिक आशियाने में सन्नाटा पसरा हुआ है। टूटती हुई दीवारें, जर्जर होती लकड़ी की सीढ़ियां और सीलन भरी हवाओं में दम तोड़ती यादें इस बात की मूक गवाही दे रही हैं कि देश के इस महान और अद्वितीय गायक की सबसे बड़ी अमूल्य धरोहर आज संरक्षण की सख्त आस लगाए बैठी है।

🏚️ किशोर कुमार की अंतिम निशानी बयां कर रही बदहाली की कहानी

मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर खंडवा में स्थित स्वर सम्राट किशोर कुमार का पैतृक गांगुली हाउस समय के थपेड़ों के साथ अपनी पुरानी चमक और रौनक खोता जा रहा है।

अपनी अनूठी आवाज से देश-दुनिया के करोड़ों दिलों पर हमेशा राज करने वाले किशोर दा की यह अंतिम निशानी आज उपेक्षा और बदहाली की दास्तान बयां कर रही है। जिस घर में उन्होंने अपना बचपन बिताया, संगीत की शुरुआती धुनें गुनगुनाईं और अपने परिवार के साथ अनगिनत हसीन पल बिताए, वह आज जर्जर होकर गिरने की कगार पर पहुँच चुका है।

🪵 दीमक की भेंट चढ़ रहा कीमती सामान और पूजा घर

बंगले के भीतर जिस मुख्य कमरे में किशोर कुमार की माताजी गौरी देवी की तस्वीर रखी हुई है, वह हिस्सा सीलन और लगातार टपकते पानी की वजह से पूरी तरह जर्जर हो चुका है।

उनकी माताजी की वह तस्वीर भी अब काफी खराब हो चुकी है और घर का पूजा स्थल भी टूट चुका है। इसके अलावा, घर की पुरानी सीढ़ियां इतनी कमजोर हो चुकी हैं कि वे कभी भी गिर सकती हैं, और घर का अधिकांश कीमती व ऐतिहासिक सामान दीमक की भेंट चढ़ चुका है।

🔒 पिछले 4 दशकों से नहीं खुले कई कमरों के ताले

बीते 5 दशकों से अधिक समय से इस बंगले की रखवाली और देखरेख कर रहे चौकीदार सीताराम बताते हैं कि जब किशोर कुमार जीवित थे और खंडवा आते थे, तब यहाँ उनके दोस्तों और रिश्तेदारों का तांता लगा रहता था, लेकिन उनके आकस्मिक निधन के साथ ही इस पूरे बंगले की रौनक हमेशा के लिए समाप्त हो गई।

पिछले लगभग 40 वर्षों से इस बंगले के कई कमरों के ताले तक नहीं खोले गए हैं, जिसके कारण अंदर रखा अधिकांश सामान पूरी तरह सड़ और खराब हो चुका है। इस बंद पड़े सामान में पुराने पलंग, अलमारियां, एंटीक ग्रामोफोन और कई अन्य निजी वस्तुएं शामिल हैं।

💔 किशोर दा का खंडवा में बसने का अधूरा रह गया सपना

चौकीदार सीताराम ने किशोर कुमार को याद करते हुए भावुक होकर बताया कि, "किशोर दा अपने जन्मस्थान खंडवा से बेइंतहा प्रेम करते थे। उनकी दिली इच्छा थी कि वे अपने जीवन के अंतिम दिनों में वापस खंडवा आकर यहीं बस जाएं, लेकिन उनका यह सपना हमेशा के लिए अधूरा ही रह गया।"

उनका अंतिम संस्कार भी यहीं संपन्न हुआ था, लेकिन उनके देहांत के बाद उनके परिवार का कोई भी सदस्य इस घर को संभालने के लिए दोबारा लौटकर नहीं आया।

🏛️ ऐतिहासिक धरोहर को संग्रहालय (Museum) के रूप में विकसित करने की उठी मांग

हर साल किशोर कुमार की जयंती और उनकी पुण्यतिथि के विशेष अवसर पर देश के कोने-कोने से हजारों प्रशंसक खंडवा पहुँचते हैं।

उनकी समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित करने के बाद वे गांगुली हाउस को देखने भी जरूर आते हैं, लेकिन इस घर की खस्ताहाल स्थिति को देखकर वे बेहद दुखी और भावुक हो जाते हैं। संगीत प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों की लंबे समय से यह पुरजोर मांग रही है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को एक भव्य संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाए और इसे पूरी तरह संरक्षित किया जाए, ताकि आने वाली नई पीढ़ियां उस घर को अपनी आँखों से देख सकें जहाँ से भारतीय संगीत जगत को एक अमर सितारा मिला था।

किशोर सांस्कृतिक प्रेरणामंच के प्रवक्ता सुनील जैन ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि किशोर कुमार के इस ऐतिहासिक बंगले को बचाने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। परिवार के सदस्यों से भी इस सिलसिले में कई दौर की चर्चाएं हो चुकी हैं, हालांकि बातचीत अभी तक किसी अंतिम नतीजे पर नहीं पहुँच पाई है, लेकिन एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल इस दिशा में लगातार प्रयासरत है।

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