धार के सुल्तानपुर में छिपा है रहस्यमयी 'गंगा महादेव' मंदिर, झरने और प्राकृतिक सुंदरता ने खींचा पर्यटकों का ध्यान
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित 'गंगा महादेव' मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और चमत्कारी कुंड के पानी के लिए प्रसिद्ध है। जानिए इस रहस्यमयी और खूबसूरत टूरिस्ट स्पॉट के बारे में।
धार : मध्य प्रदेश में कई ऐसे अद्भुत नैसर्गिक और धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जो भले ही आधिकारिक पुरातत्व विभाग के नक्शे में दर्ज न हों, लेकिन अपनी अनूठी कुदरती सुंदरता और खासियतों के चलते आज एक लोकप्रिय टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में तेजी से उभर रहे हैं। ऐसा ही एक बेहद खूबसूरत और रमणीय स्थान मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित 'गंगा महादेव' है। यहाँ के मनमोहक और कलकल बहते झरने देश-दुनिया के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। धीरे-धीरे यह स्थान एक बेहतरीन टूरिस्ट स्पॉट के साथ-साथ एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में भी अपनी एक नई पहचान बना रहा है।
🏛️ रहस्य के आगोश में है मंदिर का प्राचीन इतिहास
धार जिले के तिरला ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले सुल्तानपुर गाँव के पहाड़ी क्षेत्र में यह अद्भुत स्थान स्थित है।
यहाँ द्वापर युग से भी पहले से मौजूद एक प्राकृतिक गुफा के ठीक नीचे भगवान भोलेनाथ का एक छोटा सा प्राचीन मंदिर है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस प्राचीन तीर्थ स्थल का न तो कोई लिखित धार्मिक-ऐतिहासिक रिकॉर्ड उपलब्ध है और न ही धार के पुरातात्विक इतिहास में इस मंदिर और इस स्थान का कोई आधिकारिक उल्लेख मिलता है। हालाँकि, सरकारी और शासकीय रिकॉर्ड में इस जगह का जिक्र जरूर मिलता है, लेकिन इस मंदिर का वास्तविक इतिहास और इसकी महिमा आज भी एक अनसुलझा रहस्य बनी हुई है।
💧 झरने के पानी और पवित्र कुंड से पड़ा 'गंगा महादेव' नाम
आज से कुछ साल पहले तक यहाँ लोग केवल ऊँची पहाड़ी से गुफा में गिरने वाले झरने के नैसर्गिक और अलौकिक सौंदर्य को देखने के लिए आते थे।
लेकिन धीरे-धीरे लोगों को यह पता चला कि झरने के पास ही गुफा की तलहटी में एक प्राचीन मंदिर है, जिसमें भगवान भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि झरने का प्राकृतिक पानी पुराने समय से ही गुफा परिसर में बने एक कुंड में एकत्रित होता रहता है, जिसका उपयोग लोग पीने के पानी के रूप में करते थे। इस मंदिर के पुजारी हिमगिरी गोस्वामी जानकारी देते हुए बताते हैं कि, "इस कुंड का पवित्र पानी पीने से लोगों की कई तरह की त्वचा की बीमारियां और अन्य रोग ठीक होने लगे, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने इस कुंड के पानी को माँ गंगा के जल की तरह बेहद पवित्र मानना शुरू कर दिया। इसी मान्यता के चलते धीरे-धीरे इस पावन स्थान का नाम 'गंगा महादेव' पड़ गया।"
🌿 चमत्कारी कुंड का पानी और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र
इस स्थान के बारे में बात करते हुए इंदौर पुरातत्व विभाग से जुड़े आशीष महाशब्दे बताते हैं कि, "गंगा महादेव का यह स्थल फिलहाल आर्कियोलॉजिकल मानचित्र पर एक संरक्षित स्मारक के रूप में दर्ज नहीं है।"
वहीं स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस कुंड में लोग स्नान करने के लिए भी दूर-दूर से आते हैं, क्योंकि इस प्राकृतिक कुंड के पानी में सल्फर (Sulfur) की मात्रा काफी अधिक पाई जाती है, जिससे नहाने पर त्वचा से जुड़े तमाम रोग खत्म हो जाते हैं। इसके अलावा, पहाड़ी के ठीक ऊपर से सीधे कुंड में गिरता हुआ झरना इस पूरे स्थान को बेहद रमणीक और शांत बनाता है। सबसे खास बात यह है कि भीषण गर्मी के मौसम में भी इस कुंड का पानी कभी नहीं सूखता, जबकि बारिश के दिनों में यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य और अधिक निखरकर सामने आता है। मंदिर के पास ही एक सुंदर ट्रैकिंग ट्रेल (Trek) भी बना हुआ है, जो पर्यटकों को एक अन्य प्राचीन मंदिर तक लेकर जाता है।
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