उमरिया के जंगलों में आया छत्तीसगढ़ जैसा स्वादिष्ट 'पुटू', जानिए इस जंगली सब्जी के फायदे
मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में बारिश के मौसम में मिलने वाली जंगली सब्जी 'पुटू' (रुगड़ा) की बाजार में भारी मांग है। यह स्वाद के साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है।
उमरिया: हर वक्त एक ही जैसी सब्जी और दाल खाकर कई बार लोग बोर हो जाते हैं। बाहर का फास्ट फूड भी रोज-रोज नहीं खाया जा सकता है। ऐसे में यदि घर का बना हुआ कुछ चटपटा, लजीज और स्वास्थ्यवर्धक मिल जाए, तो भोजन के स्वाद में चार चांद लग जाते हैं। इसी तरह खाने के स्वाद को कई गुना बढ़ाने वाला 'पुटू' अब बाजारों में आ चुका है। वैसे तो इस अनूठी सब्जी की मुख्य पहचान छत्तीसगढ़ से जुड़ी है, लेकिन यह इन दिनों मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल जिले उमरिया के जंगलों में प्रचुर मात्रा में पाई जा रही है। मानसून और बारिश का सीजन आते ही उमरिया के घने जंगलों में पुटू की बहार देखने को मिल जाती है।
🍄 आदिवासियों के लिए 'एक पंथ दो काज' का काम करता है पुटू
जी हाँ, जैसे ही बरसात का मौसम शुरू होता है, जंगलों की प्राकृतिक सौगात कहे जाने वाले 'पुटू' का बाजारों में आगमन शुरू हो जाता है।
बताया जाता है कि यह दुर्लभ सब्जी साल में केवल दो महीने ही देखने को मिलती है। इस सब्जी की दीवानगी स्थानीय ग्रामीणों और खरीदारों में इस हद तक होती है कि वे न तो मौसम की परवाह करते हैं और न ही जंगलों के ऊबड़-खाबड़ व कठिन रास्तों की। वे सुबह सवेरे उठकर सीधे जंगलों की तरफ निकल पड़ते हैं। जंगल से पुटू इकट्ठा करने के बाद ग्रामीण अपने घरों में तो इसकी स्वादिष्ट सब्जी बनाते ही हैं, साथ ही इसे स्थानीय बाजारों में बेचकर अच्छी कमाई भी करते हैं, जहाँ लोग इसे खरीदने के लिए हमेशा उत्सुक नजर आते हैं।
🌳 पेड़ों के नीचे प्राकृतिक रूप से उगता है पुटू
इस विषय पर जानकारी देते हुए स्थानीय निवासी व किसान अभिषेक अग्रवाल बताते हैं कि, "पुटू मूल रूप से एक जंगली फल या मशरूम है, जो वर्ष में केवल दो महीने ही प्राप्त होता है। इसका प्राकृतिक उत्पादन मुख्य रूप से सरई (साल) के पेड़ों के नीचे होता है।"
ग्रामीण क्षेत्रों के लोग जंगल से इसे चुनकर लाते हैं और बाजार में बेचने के लिए लाते हैं। इसके साथ ही यह ग्रामीण किसानों और आदिवासियों के लिए जीवनोपार्जन तथा अतिरिक्त आय का एक प्रमुख साधन भी माना जाता है।
अभिषेक आगे बताते हैं कि जब जंगल की जमीन तेज धूप से गर्म हो जाती है और उस पर पहली बारिश का पानी पड़ता है, तब पुटू पेड़ों की छांव में जमीन से स्वतः उत्पन्न होने लगता है। इसकी कोई कृत्रिम खेती नहीं की जाती है, बल्कि यह प्रकृति द्वारा दिया गया एक अनमोल वरदान है, जिसे हम एक जंगली फल या मशरूम के रूप में जानते हैं।
💪 लजीज स्वाद के साथ सेहत के लिए भी बेहद असरदार है पुटू
पुटू को देश के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न नामों से पुकारा जाता है। इसे आम भाषा में जंगली मशरूम भी कहा जाता है, जबकि विभिन्न क्षेत्रों में लोग इसे रुगड़ा, फुटू, पुटू और बोड़ा जैसे नामों से जानते हैं। इसका आधिकारिक वैज्ञानिक नाम 'एस्ट्रिअस हाइग्रोमैट्रिकस' (Astreus Hygrometricus) है, जबकि अंग्रेजी में इसे 'फॉल्स अर्थ स्टार' (False Earth Star) कहा जाता है।
खाने में पुटू की सब्जी बेहद लजीज और स्वादिष्ट होती है। लाजवाब स्वाद के साथ-साथ यह सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है। पुटू में प्रचुर मात्रा में सेल्यूलोज और कार्बोहाइड्रेट पाए जाते हैं। इसमें लगभग 14 से 16 प्रतिशत तक उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन होता है। इसके अलावा इसमें फॉस्फोरस, पोटाश, आयरन और कैल्शियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज तत्व भी प्रचुर मात्रा में मिलते हैं। इसमें भरपूर मात्रा में डाइटरी फाइबर होने के कारण यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में भी काफी मददगार साबित होता है।
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