दतिया उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी की हाईलेवल मीटिंग से नरोत्तम मिश्रा बाहर, पूरी जिला कार्यकारिणी भंग

दतिया विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद बुलाई गई बीजेपी की समीक्षा बैठक में पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा को नहीं बुलाया गया और पार्टी ने पूरी जिला कार्यकारिणी को भंग कर दिया है।

Aug 05, 2026 - 11:04
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दतिया उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी की हाईलेवल मीटिंग से नरोत्तम मिश्रा बाहर, पूरी जिला कार्यकारिणी भंग

भोपाल : मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद राजधानी भोपाल में बुलाई गई बीजेपी की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक से एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। इस अहम बैठक में प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री और दिग्गज नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा को नहीं बुलाया गया, जबकि दतिया विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें पार्टी की चुनाव संचालन समिति का प्रमुख बनाया गया था। नरोत्तम मिश्रा को इस महत्वपूर्ण बैठक से दूर रखे जाने के बाद अब सियासी गलियारों में यह चर्चाएं जोरों पर हैं कि क्या दतिया में हार के कारणों की पड़ताल करने वाली कमेटी ने पहले ही अपनी रिपोर्ट और जिम्मेदारी तय कर ली है? खास बात यह है कि पार्टी ने दतिया हार की जांच के लिए सुबह समिति का गठन किया और देखते ही देखते शाम ढलते-ढलते जिले की पूरी कार्यकारिणी को ही भंग कर दिया गया।

🚫 चुनाव संचालन समिति के प्रमुख होने के बावजूद नरोत्तम मिश्रा से किनारा

बीते 16 जुलाई को पार्टी संगठन की तरफ से दतिया उपचुनाव के लिए 32 सदस्यीय एक बड़ी चुनाव संचालन समिति का गठन किया गया था।

उपचुनाव के प्रभारी भारत कुशवाहा और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की आपसी सहमति से इस समिति की आधिकारिक घोषणा की गई थी, और इस पूरी समिति का प्रमुख डॉ. नरोत्तम मिश्रा को ही बनाया गया था। लेकिन जब पार्टी ने दतिया की हार के कारणों पर गहन चिंतन करने के लिए मुख्यमंत्री निवास पर उच्चस्तरीय बैठकें बुलाईं, तो कथित तौर पर डॉ. नरोत्तम मिश्रा को इसकी सूचना तक नहीं दी गई और न ही उन्हें बैठक में आमंत्रित किया गया। मीडिया द्वारा जब इस मामले में डॉ. नरोत्तम मिश्रा से संपर्क साधने का प्रयास किया गया, तो उनसे संपर्क नहीं हो सका। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि पार्टी नेतृत्व दतिया की हार के लिए कहीं न कहीं डॉ. नरोत्तम मिश्रा को भी मुख्य रूप से जिम्मेदार मान रहा है। नरोत्तम मिश्रा के करीबी सूत्रों से भी यही जानकारी सामने आई है कि उन्हें इस बैठक में नहीं बुलाया गया था।

⚡ सुबह जांच समिति का गठन, और शाम तक पूरी जिला कार्यकारिणी बर्खास्त

दतिया में पार्टी की हार के कारणों की जमीनी जांच के लिए जो समीक्षा बैठक बुलाई गई थी, उसमें यह तय हुआ कि इसकी पड़ताल के लिए एक विशेष कमेटी बनाई जाएगी।

तत्काल प्रभाव से दो सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर उसके नामों की घोषणा भी कर दी गई। प्रदेश महामंत्री गौरव रणदीवे और पार्टी के वरिष्ठ नेता अंबाराम कराड़ा को यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई कि वे चुनाव परिणामों का बारीकी से विश्लेषण करें और अपनी रिपोर्ट तुरंत प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को सौंपें। हैरानी की बात यह रही कि दोपहर के वक्त गठित हुई इस कमेटी की रिपोर्ट शाम तक सामने आ भी गई और पार्टी ने बिना देर किए तुरंत कड़ा एक्शन भी ले लिया। एक ही झटके में दतिया जिले की पूरी बीजेपी कार्यकारिणी को बर्खास्त कर दिया गया।

बीजेपी प्रदेश कार्यालय मंत्री द्वारा जारी किए गए आधिकारिक पत्र के मुताबिक, "भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खंडेलवाल के निर्देशानुसार, दतिया विधानसभा उपचुनाव के परिणामों की समीक्षा के लिए गठित समिति की अनुशंसा के आधार पर भारतीय जनता पार्टी जिला दतिया के संगठन में जिलाध्यक्ष से लेकर तमाम जिला पदाधिकारियों, जिला कार्यसमिति, मंडल, मोर्चा, प्रकोष्ठ, प्रकल्प और विभाग समेत सारी इकाइयों को अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत तत्काल प्रभाव से भंग किया जाता है।" इस बड़ी कार्रवाई से ठीक पहले प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी दोटूक शब्दों में कहा था कि पार्टी के अनुशासन को तोड़ने वाला नेता चाहे कितना भी बड़ा हो या छोटा, संगठन में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

🏛️ नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ अनुशासनात्मक मामला अब दिल्ली से होगा तय

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रदेश संगठन ने चुनाव परिणाम आने के महज 24 घंटे के भीतर ही यह बड़ा एक्शन लेकर पार्टी के भीतर साफ संदेश दे दिया है।

पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के भविष्य और उनके आचरण के विषय में पार्टी संगठन तमाम पुख्ता साक्ष्य जुटाकर सीधे राष्ट्रीय नेतृत्व को भेजने की तैयारी में है, और इस पूरे प्रकरण पर अंतिम निर्णय अब पार्टी हाईकमान (दिल्ली) स्तर से ही लिया जाएगा। हालांकि, अभी तक यह आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पार्टी के पास उनके खिलाफ किस तरह के और क्या पुख्ता सबूत मौजूद हैं, लेकिन दतिया में पार्टी की इस फजीहत के बाद सूबे की सियासत में गर्माहट पूरी तरह से बढ़ गई है।

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