कोरोना में दोस्त को खोया तो लिया संकल्प; अब 111 बार रक्तदान कर चुके हैं छतरपुर के पप्पू गुप्ता
छतरपुर के समाजसेवी पप्पू गुप्ता अब तक 111 बार दुर्लभ B नेगेटिव ब्लड डोनेट कर चुके हैं। दिल्ली, मुंबई से लेकर कई शहरों में जाकर उन्होंने लोगों की जान बचाई है।
छतरपुर। कहते हैं रक्तदान महादान है, लेकिन जब किसी अति-दुर्लभ (Rare) श्रेणी का रक्त समय पर देकर किसी की जान बचाई जाए, तो यह सेवा महापुण्य बन जाती है। छतरपुर जिले में कई ऐसे समाजसेवी हैं, जिन्होंने अपने निस्वार्थ कार्य से समाज में नई मिसाल पेश की है। इन्हीं में से एक हैं टौरिया मोहल्ले के रहने वाले समाजसेवी पप्पू गुप्ता। पप्पू गुप्ता का ब्लड ग्रुप B-Negative (बी नेगेटिव) है, जो बेहद दुर्लभ माना जाता है। वे अब तक रिकॉर्ड 111 बार रक्तदान कर चुके हैं। उनका जुनून ऐसा है कि जरूरतमंद का एक फोन आते ही वे अपने सारे जरूरी काम छोड़कर ब्लड बैंक या अस्पताल पहुंच जाते हैं।
💔 दोस्त की मौत के बाद लिया महासंकल्प: 20 साल से लगातार कर रहे हैं रक्तदान
समाजसेवी पप्पू गुप्ता बताते हैं कि वे वैसे तो पिछले 20 वर्षों से लगातार रक्तदान करते आ रहे हैं, लेकिन कोरोना काल में घटी एक दुखद घटना ने उनके जीवन का ध्येय बदल दिया।
महामारी के दौरान उनके एक मित्र को आपात स्थिति में रक्त की तत्काल आवश्यकता थी। काफी प्रयासों के बाद भी जब समय पर रक्त नहीं मिल सका, तो इलाज के दौरान उनके मित्र की मृत्यु हो गई। इस घटना से व्यथित होकर उन्होंने संकल्प लिया कि जब तक वे जीवित हैं, किसी भी व्यक्ति को रक्त के अभाव में दम नहीं तोड़ने देंगे। इसके बाद से ही वे लगातार सक्रिय रूप से जरूरतमंदों की मदद में जुटे हुए हैं।
🚑 दिल्ली-मुंबई जाकर भी बचाई मरीजों की जान: अस्पतालों की दीवारों पर दर्ज है नंबर
रक्तवीर पप्पू गुप्ता बताते हैं कि छतरपुर जिला अस्पताल समेत आसपास के कई स्वास्थ्य केंद्रों में उनका मोबाइल नंबर दर्ज है।
इसके अलावा, सोशल मीडिया और विभिन्न सेवाभावी ग्रुपों के माध्यम से जैसे ही उन्हें किसी मरीज को B-Negative ब्लड की आवश्यकता का पता चलता है, वे तुरंत उनसे संपर्क करते हैं। वे न केवल छतरपुर बल्कि दिल्ली, मुंबई, झांसी, टीकमगढ़ और सागर जैसे बड़े शहरों में भी जाकर मरीजों को ब्लड डोनेट कर चुके हैं। उनका कहना है कि ईश्वर ने उन्हें दुर्लभ रक्त समूह दिया है, इसलिए वे अपने जन्मदिवस और प्रमुख त्योहारों पर भी रक्तदान करना नहीं भूलते। शुरुआत में परिजनों को उनके स्वास्थ्य की चिंता होती थी, लेकिन अब परिवार भी उनके इस सेवा कार्य में हौसला बढ़ाता है।
🩺 कुल आबादी में केवल 2% लोगों का होता है B-Negative: डॉक्टर बोले— आपातकाल में डोनर मिलना बेहद कठिन
मामले पर जानकारी देते हुए छतरपुर जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रवि सोनी ने बताया कि B-Negative ब्लड ग्रुप पूरी दुनिया में बेहद कम लोगों में पाया जाता है।
वैश्विक आंकड़े देखें तो कुल आबादी के मुश्किल से 1.5 से 2 प्रतिशत लोगों में ही यह रेयर ब्लड ग्रुप होता है। आपातकालीन स्थितियों, दुर्घटनाओं या जटिल सर्जरी के समय इस ग्रुप के रक्तदाता को खोजना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। ऐसे में पप्पू गुप्ता जैसे समर्पित डोनर्स समाज और स्वास्थ्य तंत्र के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं।
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