भारत में जल्द आ सकते हैं प्लास्टिक के नोट, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने दी बड़ी जानकारी

भारतीय रिजर्व बैंक जल्द ही भारत में प्लास्टिक करेंसी (पॉलीमर नोट) लाने की तैयारी कर रहा है। शुरुआती चरण में 10 और 20 रुपये के नोटों का फील्ड ट्रायल किया जाएगा।

Aug 05, 2026 - 19:11
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भारत में जल्द आ सकते हैं प्लास्टिक के नोट, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने दी बड़ी जानकारी

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने बुधवार को एक अहम बयान में कहा कि यदि फील्ड ट्रायल पूरी तरह से योजना के अनुसार सफल रहते हैं, तो भारत में अगले वित्त वर्ष की शुरुआत तक प्लास्टिक करेंसी नोट चलन में आ सकते हैं। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक के बाद आयोजित मीडिया ब्रीफिंग में बोलते हुए, गवर्नर मल्होत्रा ​​ने स्पष्ट किया कि आरबीआई सभी फील्ड ट्रायल पूरे होने के बाद अगले फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत में पॉलीमर बैंकनोट लाने की पूरी योजना बना रहा है।

गवर्नर ने कहा कि हमारा मुख्य टारगेट यह है कि तय योजना के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में ये नए नोट आम जनता के बीच चलन में आ जाएं। सरकार की आधिकारिक मंजूरी मिलने के बाद, आरबीआई ने फिलहाल ट्रायल के तौर पर 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलीमर नोट लाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस महत्वपूर्ण कदम के साथ उस पुरानी योजना को एक बार फिर से शुरू किया जा रहा है, जिसकी घोषणा आज से एक दशक से भी पहले की गई थी, लेकिन किन्हीं कारणों से इसे तब लागू नहीं किया जा सका था।

🏦 आरबीआई आखिर क्यों लेकर आ रहा है प्लास्टिक के नोट?

इस बड़े बदलाव के पीछे की मुख्य वजह बताते हुए गवर्नर मल्होत्रा ​​ने कहा कि पॉलीमर नोट पारंपरिक कागजी करेंसी की तुलना में अत्यधिक टिकाऊ होते हैं, जिससे वे कम मूल्य वाले उन नोटों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त साबित होते हैं जो बार-बार लोगों के हाथों में बदलते रहते हैं।

उन्होंने बताया कि पॉलीमर नोटों की मजबूती उनकी उम्र को कई गुना बढ़ा देती है। कम मूल्य वाले नोटों के लिए यह इसलिए भी बेहद जरूरी है क्योंकि रोजमर्रा के लेनदेन में उनकी चलन की गति (Velocity of Circulation) बहुत ज्यादा होती है, और इसी वजह से वे जल्दी घिसकर खराब हो जाते हैं। 10 रुपये और 20 रुपये जैसे छोटे नोट अधिक मूल्य वाले नोटों की तुलना में बहुत तेजी से खराब होते हैं। पॉलीमर नोटों के लंबे समय तक सुरक्षित चलने की पूरी उम्मीद है, जिससे उन्हें बार-बार बदलने और नए छापने की जरूरत काफी हद तक कम हो जाएगी।

🏛️ सरकार की तरफ से इस प्रस्ताव को क्या मंजूरी मिली है?

बीते महीने, केंद्र सरकार ने फील्ड ट्रायल के उद्देश्य से 10 रुपये और 20 रुपये के एक-एक अरब पॉलीमर नोट छपवाने और लाने के आरबीआई के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी थी।

यदि ये फील्ड ट्रायल्स पूरी तरह सफल रहते हैं, तो भविष्य में इन्हें नियमित रूप से जारी करने पर विधिवत विचार किया जाएगा। यह प्रस्ताव तब और आगे बढ़ा जब आरबीआई की सहायक कंपनी 'भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड' (BRBNMPL) ने ट्रायल के लिए जरूरी पॉलीमर सबस्ट्रेट की खरीद हेतु टेंडर जारी किया। सरकार ने पहले ही यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि यह कदम केवल और केवल फील्ड ट्रायल के लिए है, और फिलहाल मौजूदा सभी कागजी करेंसी को रातों-रात पॉलीमर बैंकनोट्स से बदलने का कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

♻️ पॉलीमर नोटों पर विचार करने के मुख्य तकनीकी कारण क्या हैं?

वर्तमान भारतीय करेंसी, जो पूरी तरह से कॉटन-बेस्ड पेपर पर छापी जाती है, उसके विपरीत पॉलीमर नोट टिकाऊ प्लास्टिक सबस्ट्रेट पर तैयार किए जाते हैं।

आरबीआई द्वारा हवाला दी गई विभिन्न अंतरराष्ट्रीय स्टडीज से यह बात सामने आई है कि पॉलीमर नोट, आम कागजी नोटों की तुलना में कहीं अधिक समय तक टिकते हैं। हालांकि शुरुआती दौर में इन्हें प्रिंट करने की लागत थोड़ी ज्यादा आती है, लेकिन इनकी लंबी उम्र का सीधा फायदा यह मिलता है कि लंबे समय में कम नोट छापने, उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाने-ले जाने और फटे-पुराने नोटों को बदलने की आवश्यकता कम पड़ती है, जिससे देश के करेंसी मैनेजमेंट का कुल खर्च काफी हद तक कम हो जाता है।

🌍 दुनिया के कौन-कौन से देश पहले से कर रहे हैं इनका इस्तेमाल?

पॉलीमर बैंकनोट्स का सफल इस्तेमाल आज दुनिया के 60 से ज़्यादा देशों में किया जा रहा है, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम (UK), कनाडा, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड और वियतनाम जैसे प्रमुख देश शामिल हैं।

दिलचस्प बात यह है कि ऑस्ट्रेलिया दुनिया का वह पहला देश बना था जिसने साल 1988 में सबसे पहले पॉलीमर बैंकनोट की शुरुआत की थी। तब से लेकर अब तक, दुनिया के कई प्रमुख सेंट्रल बैंकों ने इस आधुनिक टेक्नोलॉजी को अपना लिया है क्योंकि यह बेहद मजबूत होती है, इसे बदलने का खर्च कम बैठता है और यह जल्दी नष्ट नहीं होती। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी यह माना है कि पॉलीमर नोटों की मियाद कागजी करेंसी से बहुत ज्यादा होती है, और यह पर्यावरण पर पड़ने वाले उस नकारात्मक असर को भी कम करते हैं जो नोटों के बार-बार उत्पादन और परिवहन से पड़ता है।

❌ क्या मौजूदा कागजी नोट पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे?

बिल्कुल नहीं। सरकार और आरबीआई ने यह बात बिल्कुल साफ कर दी है कि नए पॉलीमर नोट बाजार में मौजूदा पारंपरिक कागजी करेंसी के साथ-साथ समानांतर रूप से चलेंगे।

इन सभी फील्ड ट्रायल्स का मुख्य उद्देश्य बड़े पैमाने पर इन्हें जारी करने का कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले भारतीय भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों में पॉलीमर नोटों के परफॉर्मेंस और टिकाऊपन को बारीकी से परखना है। यदि ये परीक्षण सफल साबित होते हैं, तो पूरी उम्मीद है कि आरबीआई आने वाले समय में 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलीमर नोट नियमित तौर पर जारी करना शुरू कर देगा। गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​द्वारा बताई गई टाइमलाइन के अनुसार, देश के पहले प्लास्टिक नोट आगामी वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही चलन में देखने को मिल सकते हैं।

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