पहाड़गढ़ के घने जंगलों में स्थित प्राचीन ईश्वरा महादेव मंदिर के पास तेंदुए का हमला, चरवाहा गंभीर रूप से घायल
मुरैना के पहाड़गढ़ स्थित ईश्वरा महादेव मंदिर के पास तेंदुए के हमले से चरवाहा घायल हो गया है। सुरक्षा को देखते हुए मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।
मुरैना: पहाड़गढ़ के घने जंगलों में स्थित प्राचीन ईश्वरा महादेव मंदिर के पास बीती आधी रात को अचानक ऐसा खौफनाक और दहला देने वाला मंजर सामने आया, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। मंदिर के पास बनी खिरकाई में गहरी नींद में सो रहे एक निर्दोष चरवाहे और उसके मवेशियों पर अचानक एक खूंखार तेंदुए ने जानलेवा हमला बोल दिया। इस अचानक हुए हमले में चरवाहा गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि गाय और भैंस के कई बछड़े भी बुरी तरह जख्मी हो गए हैं।
🚫 खतरे को देखते हुए ईश्वरा महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही पर रोक
वन विभाग की शुरुआती जांच-पड़ताल में तेंदुए के हमले की पूरी पुष्टि हो चुकी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शिवपुरी से विशेष रूप से पहुँची विशेषज्ञों की टीम लगातार जंगल के चप्पे-चप्पे पर सर्चिंग कर रही है।
संभावित खतरे और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐतिहासिक ईश्वरा महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही पर फिलहाल पूरी तरह रोक लगा दी गई है, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में भारी दहशत और भय का माहौल बना हुआ है। सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि आखिरकार यह आक्रामक तेंदुआ जंगल में इस वक्त कहाँ छिपा है और वन विभाग की पकड़ में कब तक आएगा।
🏛️ अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने की थी इस महाभारत कालीन शिवलिंग की पूजा
जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित पहाड़गढ़ के इन घने जंगलों में महाभारत कालीन प्राचीन ईश्वरा महादेव मंदिर बसा हुआ है।
ऐसी गहरी पौराणिक मान्यता है कि अपने अज्ञातवास के कठिन दौर में पांडवों ने इसी पवित्र शिवलिंग की विधिवत पूजा-अर्चना की थी। सोमवार और मंगलवार की दरम्यानी रात जब सब शांत था, तभी अचानक एक तेंदुआ मंदिर के पास बनी खिरकाई में घुस आया। उस दौरान चरवाहा केशव सिंह गुर्जर अपने मवेशियों के साथ वहीं पास में ही मौजूद था।
🩺 मुरैना और शिवपुरी वन विभाग की टीमें मौके पर, घायल चरवाहा ग्वालियर रेफर
खूंखार तेंदुए ने सबसे पहले गाय और भैंस के छोटे बछड़ों को अपना शिकार बनाने का प्रयास किया। इस दौरान अपने मवेशियों की जान बचाने के संघर्ष में केशव सिंह भी उस आक्रामक तेंदुए की चपेट में आ गए और गंभीर रूप से घायल हो गए।
परिजनों द्वारा उन्हें तुरंत गंभीर हालत में बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर रेफर किया गया है। इस सनसनीखेज घटना के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और आसपास के दर्जनों गांवों में खौफ का साया छा गया। घटना की सूचना मिलते ही मंगलवार की सुबह मुरैना और शिवपुरी से वन विभाग की विशेष टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुँच गईं।
🐾 वन विभाग की जांच में तेंदुए की पुष्टि, ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील
वन अधिकारियों ने घटनास्थल से वन्यजीव के पदचिह्नों और अन्य साक्ष्यों के नमूने एकत्र कर उनकी बारीकी से जांच की, जिसमें हमलावर के एक जंगली तेंदुआ होने की आधिकारिक पुष्टि हुई है।
वन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह तेंदुआ प्रसिद्ध कूनो राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र का नहीं है। बढ़ते खतरे को भांपते हुए ईश्वरा महादेव मंदिर से जुड़े स्थानीय ग्रामीण उत्तम सिंह सिकरवार ने एक वीडियो जारी कर सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे रात के समय मंदिर परिसर में बिल्कुल न रुकें और जंगल की तरफ जाने से पूरी तरह बचें। फिलहाल वन विभाग की टीम लगातार कॉम्बिंग और सर्चिंग में जुटी हुई है।
⚠️ प्रशासन और वन विभाग द्वारा श्रद्धालुओं व क्षेत्रवासियों के लिए एडवाइजरी जारी
पहाड़गढ़ के रेंजर आकाश तोमर ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि, "मंदिर के पास स्थित खिरकाई में एक जंगली जानवर ने हमला किया है, जिसमें एक चरवाहे को चोटें आई हैं। मौके से मिले पदचिह्नों और तस्वीरों से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि हमला करने वाला जानवर तेंदुआ ही है। इस मंदिर के आसपास मौजूद झरनों और घनी झाड़ियों वाले इलाकों में पहले भी तेंदुओं की आवाजाही और मौजूदगी रही है।"
पहाड़गढ़ थाना प्रभारी आरएस परिहार ने बताया कि घटनास्थल पर मौजूद पुलिस बल ने ग्रामीणों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को पूरी तरह सतर्क एवं सुरक्षित रहने की सलाह दी है। प्रशासन ने सख्त एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि लोग अनावश्यक रूप से जंगल के भीतर इधर-उधर न घूमें और विशेषकर रात के वक्त अकेले जंगल में प्रवेश करने से बचें।
वन विभाग ने भरोसा दिलाया है कि घायल चरवाहे को शासन के नियमानुसार दी जाने वाली समस्त आर्थिक सहायता की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाएगी। साथ ही पुलिस और वन विभाग ने आमजन से अपील की है कि यदि भविष्य में कहीं भी तेंदुआ या अन्य कोई वन्यजीव दिखाई दे, तो उसके करीब जाने या उसे घेरने की भूल बिल्कुल न करें, तथा तुरंत इसकी सूचना वन विभाग या स्थानीय पुलिस को दें ताकि किसी भी बड़ी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)