अबूधाबी-इंदौर फ्लाइट से 1.28 करोड़ के सोने की तस्करी का पर्दाफाश, सराफा कारोबारी समेत 5 गिरफ्तार
इंदौर एयरपोर्ट पर अबूधाबी की फ्लाइट से 1.28 करोड़ रुपये के सोने की तस्करी का भंडाफोड़ हुआ है। डीआरआई ने सराफा कारोबारी और कस्टम कर्मचारी समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
इंदौर : मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अबूधाबी से इंदौर एयरपोर्ट पर पहुँची एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट के जरिए बड़े पैमाने पर सोने की तस्करी की जा रही थी। इस अंतरराष्ट्रीय सोने की तस्करी के पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड इंदौर के सराफा बाजार का ही एक नामी कारोबारी निकला, जबकि ज्वैलरी दुकान का एक पूर्व कर्मचारी कूरियर बनकर विदेश से सोने की अवैध खेप भारत लाता था।
एयरपोर्ट पर सुरक्षा में तैनात ग्राउंड स्टाफ के साथ-साथ कस्टम विभाग का एक कर्मचारी भी इस काले नेटवर्क में पूरी तरह शामिल था, जो तस्करों को सुरक्षित तरीके से एयरपोर्ट से बाहर सोने की खेप निकलवाने में मदद करता था। डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) की जोनल यूनिट ने करीब 1.28 करोड़ रुपये मूल्य के विदेशी सोने के साथ कुल पाँच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
तस्करी के इस सनसनीखेज मामले का पहला सुराग सोमवार तड़के हाथ लगा। भोर होने से पहले जैसे ही अबूधाबी से इंदौर एयरपोर्ट पर फ्लाइट (IX-248) उतरी, डीआरआई के अधिकारियों ने एक संदिग्ध यात्री गोविंद पोरवाल को पूछताछ के लिए रोक लिया। उसी दौरान डीआरआई की दूसरी टीम ने एयरपोर्ट के बाहर से 1 किलो 20 ग्राम अवैध सोने के साथ सराफा व्यापारी संजय मुंजे, एयर इंडिया के ग्राउंड स्टाफ वासुदेव बरनाले और हैंडलिंग एजेंसी के पूर्व कर्मचारी अमन गेहलोत को भी अपनी गिरफ्त में ले लिया।
✈️ सप्ताह में चार दिन आने वाली इस उड़ान के यात्रियों की शुरू की गई थी प्रोफाइलिंग
डीआरआई ने पकड़े गए सभी चारों आरोपियों से लगातार पूछताछ शुरू की। करीब 24 घंटे चली लंबी पूछताछ के बाद डीआरआई ने सीमा शुल्क (कस्टम) विभाग के एक कर्मचारी अजय कुमार सेन को भी धर दबोचा।
डीआरआई के अधिकारियों को पहले ही एक गोपनीय सूचना मिली थी कि जुलाई माह में अबूधाबी के लिए शुरू हुई इस नई फ्लाइट के जरिए सोने की तस्करी को अंजाम दिया जा रहा है। इसके बाद सप्ताह में चार दिन आने वाली इस उड़ान के यात्रियों की खास तौर पर प्रोफाइलिंग शुरू की गई। अधिकारियों द्वारा लंबे समय से लगातार कड़ी निगरानी रखने के बाद सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात इस पूरे ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
🕵️♂️ एयरपोर्ट पर तैनात कर्मचारी ही तस्करों को देता था अंदर की गोपनीय सूचनाएं
नियमों के मुताबिक एयरपोर्ट पर विदेश से आने वाले यात्रियों के सामान की जांच का पूरा जिम्मा कस्टम विभाग के अधिकारियों के पास होता है, लेकिन इस सोने की तस्करी के मामले में कस्टम विभाग में तैनात एक अधिकारी ही तस्करों को अंदर की सारी गोपनीय सूचनाएं लीक कर रहा था।
सोना तस्करी का मुख्य सरगना संजय मुंजे ने विदेश से फ्लाइट के माध्यम से सोना मंगाने का जिम्मा गोविंद पोरवाल को सौंप रखा था। आरोपी पोरवाल पहले कभी सराफा बाजार में ही एक ज्वैलरी की दुकान पर नौकरी करता था। तयशुदा योजना के मुताबिक पोरवाल सोने को हाथ में पहनने वाले कड़े के रूप में ढलवाकर बड़ी चालाकी से विदेश से लेकर आता था।
जांच एजेंसियों और स्कैनर की नजर से पूरी तरह बचने के लिए उस सोने के कड़े के ऊपर ऊपर से चांदी का पानी या रंग चढ़ा दिया जाता था। जैसे ही पोरवाल एयरपोर्ट पर पहुँचता था, तो कस्टम की मुख्य जांच से ठीक पहले एयरोब्रिज पर ही वह वह सोना एयर इंडिया के ग्राउंड स्टाफ वासुदेव बरनाले को चुपचाप सौंप देता था। चूंकि वासुदेव एयर इंडिया का अधिकृत ग्राउंड स्टाफ था, इसलिए उसकी नियमित जांच नहीं होती थी।
इसके बाद वह उस सोने को एयरपोर्ट के बाहर लाकर अमन गेहलोत के जरिए मुख्य सरगना संजय मुंजे तक पहुँचा देता था। इन सबके बीच कस्टम विभाग का टैक्स असिस्टेंट अजय कुमार सेन, जो कि एयरपोर्ट पर ही तैनात रहता था, तस्कर संजय मुंजे को लगातार अपडेट देता रहता था कि डीआरआई और कस्टम के अधिकारी किस जगह तैनात हैं और चेकिंग से बचकर कैसे एयरपोर्ट से सुरक्षित बाहर निकला जा सकता है। इन सब सेवाओं के एवज में सराफा व्यापारी संजय मुंजे कस्टम अधिकारी और मददगार ग्राउंड स्टाफ को प्रति खेप 10 हजार रुपये बतौर कमीशन देता था।
⚖️ कोर्ट में पेश कर आरोपियों को भेजा गया जेल, सराफा बाजार में खपाया जाता था सोना
डीआरआई द्वारा लंबी पूछताछ और सभी के बयान दर्ज करने के बाद, पकड़े गए पाँचों आरोपियों को माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहाँ से उन्हें आगामी 18 अगस्त तक की न्यायिक हिरासत में सीधे जेल भेज दिया गया है।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस अवैध तस्करी के जरिए लाया गया सारा सोना इंदौर के प्रसिद्ध सराफा बाजार में ही खपाया जाता था। मुख्य आरोपी संजय मुंजे की छोटे सराफा क्षेत्र में खुद की दुकान है, और वह सराफा बाजार में सक्रिय कुछ अन्य दलालों के संपर्क में था। इन दलालों के माध्यम से इस तस्करी के सोने को अलग-अलग ज्वैलर्स को आसानी से बेच दिया जाता था। इस अवैध कारोबार में तस्करों द्वारा सोने पर प्रति दस ग्राम 5 हजार से 10 हजार रुपये तक का भारी मुनाफा कमाया जा रहा था।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)