सेंधवा: विधानसभा में शराब तस्करी का मुद्दा गूंजा, पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज

Jul 31, 2025 - 22:01
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सेंधवा:- विधानसभा क्षेत्र में शराब तस्करी और पुलिस प्रशासन की कथित संलिप्तता का मुद्दा अब भोपाल तक पहुंच गया है। सेंधवा विधायक मोंटू सोलंकी ने इस मामले को जोरदार तरीके से मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में उठाया। इस दौरान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी सरकार पर सीधा हमला बोला।

शराब से भरे ट्रक की जब्ती पर उठे सवाल

विधायक सोलंकी ने आरोप लगाया कि सेंधवा ग्रामीण पुलिस थाने के थाना प्रभारी दिलीप पुरी और उनकी टीम ने पंजाब से आई शराब से भरे ट्रक की 1000 से अधिक पेटियां पकड़ी थीं, लेकिन जब्ती के दस्तावेजों में केवल 545 पेटियां दर्शाई गईं। शेष पेटियां कथित तौर पर बाजार में बेच दी गईं। इतना ही नहीं, शराब छिपाने के लिए उपयोग की गई सड़े मक्के की बोरियों को भी बेचने का आरोप लगाया गया।

कार्रवाई: पांच पुलिसकर्मी निलंबित

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी निमाड़ रेंज सिद्धार्थ बहुगुणा के निर्देश पर एसपी जगदीश डाबर ने जांच शुरू की। प्रारंभिक कार्रवाई में थाना प्रभारी दिलीप पुरी, एएसआई चंद्रशेखर पाटीदार और आशीष पंडित, तथा हेड कांस्टेबल तरुण राठौर और विनोद मीणा को लाइन हाजिर किया गया।

बाद में आईजी इंदौर अनुराग ने इसे अपर्याप्त मानते हुए पांचों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया।

सेंधवा थाना अड्डा बन गया था मोंटू सोलंकी

विधायक सोलंकी ने कहा कि सेंधवा ग्रामीण पुलिस थाना "एक अड्डा" बन गया था और इस भ्रष्टाचार ने पुलिस प्रशासन की साख को धूमिल किया है। उन्होंने विधानसभा में इस मुद्दे पर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

नई शराब नीति पर विपक्ष का हमला

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि राज्य सरकार की नई शराब नीति ने आदिवासी क्षेत्रों को शराब तस्करी का गढ़ बना दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के संरक्षण में इस तरह की घटनाएं हो रही हैं, जो क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल असर डाल रही हैं।

बड़ा मुद्दा बन सकता है मामला

यह मामला सिर्फ सेंधवा विधानसभा तक सीमित नहीं है। शराब तस्करी और प्रशासनिक भ्रष्टाचार का यह मुद्दा अब पूरे मध्य प्रदेश में एक

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