रतलाम के न्यायिक कर्मचारियों को बड़ी राहत, प्रोबेशन पीरियड में भी मिलेगा शत-प्रतिशत वेतन

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रतलाम जिला न्यायालय के कर्मचारियों को प्रोबेशन काल में भी पूरा वेतन देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने GAD के कम वेतन वाले प्रावधान को खारिज कर दिया है।

Aug 06, 2026 - 12:53
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रतलाम के न्यायिक कर्मचारियों को बड़ी राहत, प्रोबेशन पीरियड में भी मिलेगा शत-प्रतिशत वेतन

जबलपुर : मध्य प्रदेश के रतलाम जिला न्यायालय में पदस्थ तीन न्यायिक कर्मचारियों को नियुक्ति के दौरान पूर्ण वेतन नहीं दिए जाने के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपनी नियुक्ति के प्रथम वर्ष से ही शत-प्रतिशत पूर्ण वेतन दिए जाने की मांग को लेकर इन कर्मचारियों ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य खंडपीठ जबलपुर में एक रिट याचिका दायर की थी। इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बी.पी. शर्मा की युगलपीठ के समक्ष की गई।

⚖️ प्रोबेशन पीरियड के दौरान कम वेतन देने का चल रहा था मामला

यह याचिका अमित कुमार वर्मा तथा दो अन्य न्यायिक कर्मचारियों की ओर से हाईकोर्ट में दायर की गई थी। याचिका में मुख्य रूप से यह कहा गया था कि वे सभी रतलाम जिला न्यायालय में सहायक ग्रेड-3 के महत्वपूर्ण पद पर पूरी निष्ठा से पदस्थ हैं।

सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा सितंबर 2019 में जारी नियमों के अनुसार उन्हें परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन पीरियड) के दौरान प्रथम वर्ष में मूल वेतनमान का केवल 70 प्रतिशत, द्वितीय वर्ष में 80 प्रतिशत और तृतीय वर्ष में 90 प्रतिशत स्टाइपेंड (वजीफा) दिए जाने का प्रावधान किया गया था। इस अन्यायपूर्ण नियम के खिलाफ उन्होंने सबसे पहले संबंधित जिला एवं सत्र न्यायाधीश के समक्ष अपना औपचारिक आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन जब जिला न्यायाधीश द्वारा उनका वह आवेदन निरस्त कर दिया गया, तब मजबूरन इन न्यायिक कर्मचारियों को न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

💼 "समान कार्य-समान वेतन" के हकदार हैं याचिकाकर्ता कर्मचारी

इस बहुचर्चित मामले की गहन सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य खंडपीठ ने अपने पुराने और स्थापित न्यायिक आदेशों का हवाला देते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि "समान कार्य और समान वेतन" के मौलिक सिद्धांत के अनुसार ये याचिकाकर्ता कर्मचारी भी विभाग के अन्य नियमित कर्मचारियों के समान ही पूर्ण वेतनमान पाने के पूर्ण हकदार हैं। अदालत ने माना कि इन याचिकाकर्ताओं को प्रोबेशन पीरियड के दौरान केवल स्टाइपेंड देने के बजाय कानून और नियमों के दायरे में रहकर नियमित और पूर्ण वेतन (Regular Salary) मिलना चाहिए।

💰 एरियर्स के साथ शत-प्रतिशत वेतन भुगतान करने के दिए गए निर्देश

युगलपीठ ने न्यायिक कर्मचारियों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाते हुए उन्हें भारी राहत दी और सामान्य प्रशासन विभाग को कड़े निर्देश जारी किए। कोर्ट ने आदेशित किया कि सभी याचिकाकर्ताओं को उनके वेतन की बकाया राशि एरियर्स (Arrears) के साथ तत्काल प्रदान की जाए। इसी के साथ अदालत ने इस याचिका का विधिवत निराकरण कर दिया।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता नीलेश कोटेचा और अधिवक्ता नम्रता कोटेचा ने की। इस मामले में सबसे बड़ी राहत यह रही कि हाईकोर्ट ने सामान्य प्रशासन विभाग के उस पुराने सर्कुलर को भी पूरी तरह से निरस्त कर दिया, जिसके तहत कम वेतन दिए जाने का प्रावधान था, और अब नियुक्ति के साथ ही शत-प्रतिशत वेतनमान का लाभ प्रदान करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

🎓 कुलपति की नियुक्ति में अनुभव की अनिवार्यता पर सरकार का यू-टर्न

इस बीच एक अन्य अलग और महत्वपूर्ण मामले में मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के कुलपति (VC) की नियुक्ति के लिए निर्धारित 10 वर्ष के शैक्षणिक अनुभव के अनिवार्य प्रावधान को लेकर राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट में यू-टर्न ले लिया गया है।

सरकार की ओर से हाईकोर्ट को अवगत कराया गया कि इस विवादास्पद प्रावधान को हटाने के लिए सरकार द्वारा एक नया विधेयक (Bill) तैयार कर लिया गया है, जिसे आगामी विधानसभा सत्र के दौरान सदन में प्रस्तुत किया जाएगा। नया विधेयक पारित होने के बाद कुलपति की नियुक्ति से जुड़ी पुरानी व्यवस्था एक बार फिर से बहाल कर दी जाएगी।

माननीय हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने शासन की तरफ से पेश की गई इस आधिकारिक जानकारी को अपने रिकॉर्ड पर ले लिया है और इस याचिका पर अगली सुनवाई के लिए आगामी सात अगस्त की तारीख तय की है।

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