हाईकोर्ट में बांधवगढ़ वन भूमि पर खेती के मामले की सुनवाई, याचिकाकर्ता ने स्टेटस रिपोर्ट पर जताई आपत्ति
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की वन भूमि पर अवैध खेती के मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की रिपोर्ट दी, जिस पर याचिकाकर्ता ने आपत्ति जताई है।
जबलपुर : मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की संरक्षित वन भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर खेती किए जाने के बहुचर्चित मामले को लेकर हाईकोर्ट में गुरुवार को एक बार फिर अहम सुनवाई हुई। इस संवेदनशील मामले को लेकर पूर्व में हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई थी। वहीं, आज हुई सुनवाई के दौरान जिला प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम द्वारा कोर्ट में पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में दावा किया गया कि अतिक्रमण करके खेती करने वाले सभी लोगों को वन भूमि से पूरी तरह खदेड़ दिया गया है, लेकिन याचिकाकर्ता के वकील ने इस सरकारी जवाब पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
🐘 क्या है बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में अवैध खेती और कब्जे का पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उमरिया जिले के रहने वाले राम लखन सेन की ओर से इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में मुख्य रूप से यह आरोप लगाया गया था कि कुछ दबंग अतिक्रमणकारियों द्वारा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कड़े नियमों को ताक पर रखकर वन भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया गया है और वहां धड़ल्ले से खेती का काम किया जा रहा है।
याचिकाकर्ता का कहना था कि इस अवैध गतिविधियों के कारण जंगल के वन्यजीवों की प्राकृतिक आवाजाही और उनकी दैनिक दिनचर्या पर बेहद बुरा प्रभाव पड़ रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई में वन विभाग और जिला प्रशासन को सख्त कार्रवाई करने तथा अपनी विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के कड़े निर्देश जारी किए थे।
📋 प्रशासन की रिपोर्ट पर याचिकाकर्ता ने जताई आपत्ति, कोर्ट ने दी नई तारीख
आज जब याचिका की सुनवाई चल रही थी, तो पेश की गई रिपोर्ट पर याचिकाकर्ता की तरफ से आपत्ति जताते हुए अदालत को बताया गया कि जमीन पर से हकीकत में अतिक्रमण नहीं हटाया गया है। टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाली संरक्षित भूमि पर लोग अब भी बेखौफ होकर खेती कर रहे हैं।
इसके साथ ही याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की ओर से इस मामले में रीज्वॉइंजर (प्रत्युत्तर) पेश करने के लिए अदालत से कुछ और समय दिए जाने का विशेष आग्रह किया गया। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने इस आग्रह को सहर्ष स्वीकार करते हुए अब इस महत्वपूर्ण याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 14 अगस्त की तारीख निर्धारित कर दी है। इस पूरे मामले में याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता परिमल चतुर्वेदी द्वारा की जा रही है।
🌲 साल की शुरुआत में प्रशासन ने पन्पथा क्षेत्र से खाली कराई थी 5 हेक्टेयर जमीन
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की कीमती जमीन पर अवैध अतिक्रमण का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी स्थानीय ग्रामीणों या असामाजिक तत्वों द्वारा ऐसे प्रयास किए जाते रहे हैं, जिनके खिलाफ वन विभाग और पार्क प्रबंधन ने समय-समय पर सख्त एक्शन लिया है।
याद दिला दें कि इसी साल अप्रैल 2026 में वन भूमि पर लगातार बढ़ते अवैध अतिक्रमण के खिलाफ जिला प्रशासन ने एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया था। उस दौरान पार्क के पन्पथा क्षेत्र में कुछ अतिक्रमणकारियों ने घने जंगल के भीतर अवैध रूप से झोपड़ियां बनाकर कब्जा करने की कोशिश की थी, जिस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने लगभग 30 अवैध झोपड़ियों को बुलडोजर से नेस्तनाबूद कर करीब 5 हेक्टेयर वन भूमि को पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त कराया था।
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