दुष्कर्म पीड़िता को हनी ट्रैप में फंसाने की धमकी, हाईकोर्ट ने भोपाल पुलिस कमिश्नर को दिए निर्देश
भोपाल की दुष्कर्म पीड़िता को इंसाफ मिलने की बजाय पुलिस द्वारा हनी ट्रैप में फंसाने की धमकी दी गई। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल पुलिस कमिश्नर को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
जबलपुर: भोपाल की रहने वाली एक महिला के साथ दरिंदगी का मामला सामने आने के बाद विडंबना की हद तब हो गई जब इंसाफ मिलने की बजाय उसे पुलिस द्वारा ही 'हनी ट्रैप' के झूठे मामले में फसाने की धमकी मिलने लगी। पीड़िता ने पुलिस प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। जब स्थानीय स्तर पर उसे न्याय नहीं मिला, तो मजबूर होकर पीड़िता को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (High Court) का दरवाजा खटखटाना पड़ा। दुष्कर्म पीड़िता की ओर से हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका में यह मुख्य आरोप लगाया गया है कि भोपाल पुलिस मुख्य आरोपी को बचाने का पूरा प्रयास कर रही है।
🚨 एफआईआर दर्ज करने के बजाय पुलिस दे रही थी हनी ट्रैप की धमकी
याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने उसकी शिकायत पर एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की, बल्कि उल्टा उसी के खिलाफ हनी ट्रैप का प्रकरण दर्ज करने की धमकी दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने याचिका में लगाए गए तमाम आरोपों को बेहद संजीदगी से लिया है। अदालत ने भोपाल पुलिस कमिश्नर को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अगले तीन दिनों के भीतर पीड़िता की शिकायत पर कानून के मुताबिक उचित वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
💔 शादी का झांसा देकर दुष्कर्म और जबरन गर्भपात का आरोप
पीड़िता की तरफ से दायर याचिका में कोर्ट को बताया गया कि राजपाल अहिरवार नामक युवक ने उसे शादी का झांसा देकर लंबे समय तक उसके साथ दुष्कर्म किया, जिसके परिणामस्वरूप वह गर्भवती हो गई थी। इसके बाद आरोपी ने उसका जबरन गर्भपात भी करवा दिया। जब पीड़िता न्याय की गुहार लगाने के लिए बीती 10 जुलाई 2026 को कमला नेहरू नगर थाने पहुँची, तो पुलिस ने उसकी रिपोर्ट लिखने से साफ मना कर दिया।
👮♀️ पुलिसकर्मियों पर विभागीय और आपराधिक कार्रवाई की माँग
याचिका में थाना प्रभारी निरूपा पांडे, उपनिरीक्षक शैलेंद्र राजावत और महिला प्रधान आरक्षक डॉली चौरसिया के खिलाफ विभागीय जाँच के साथ-साथ आपराधिक मामला दर्ज करने की भी पुरजोर माँग की गई है। एकलपीठ ने इस पूरे मामले की सुनवाई के बाद भोपाल पुलिस कमिश्नर को तत्कालिन निर्देश जारी किए हैं। इस मामले में याचिकाकर्ता की तरफ से पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता एके शाह ने की।
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