हंगामे और हाथापाई की नौबत तक पहुँची नगर निगम की बैठक, जलभराव पर विपक्ष का धरना

ग्वालियर नगर निगम परिषद की बैठक में आसंदी और जलभराव के मुद्दों को लेकर भारी हंगामा हुआ। पार्षदों के बीच तीखी बहस के बाद कार्यवाही 10 अगस्त तक स्थगित कर दी गई।

Aug 08, 2026 - 19:54
0
हंगामे और हाथापाई की नौबत तक पहुँची नगर निगम की बैठक, जलभराव पर विपक्ष का धरना

ग्वालियर: ग्वालियर शहर के विकास से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण और गंभीर मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाई गई नगर परिषद की विशेष बैठक एक बार फिर भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई। हालांकि, इस बार स्थिति इतनी बिगड़ गई कि विवाद लगभग हाथापाई तक पहुँच गया था। बैठक की शुरुआत के साथ ही सभापति की आसंदी (चेयर) पर बैठने को लेकर पार्षदों के बीच ऐसा विवाद छिड़ा कि वह देखते ही देखते तीखी झड़प में बदल गया।

📋 16 महत्वपूर्ण मुद्दों पर होनी थी चर्चा, महापौर और सभापति रहे अनुपस्थित

ग्वालियर में शुक्रवार को नगर निगम परिषद की इस विशेष बैठक में शहर की मुख्य समस्याओं जैसे जलभराव, गैलेंट्री, होर्डिंग्स समेत कुल 16 महत्वपूर्ण और जरूरी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होनी थी। इससे पहले पिछली बैठक अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण स्थगित कर दी गई थी, इस लिहाज से शुक्रवार की यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही थी। लेकिन जब बैठक शुरू हुई, तो सदन को यह जानकारी दी गई कि महापौर और परिषद के सभापति दोनों ही इस बैठक में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। इसके बाद नियमानुसार द्वितीय पैनलिस्ट मंजू राजपूत को आसंदी पर बैठाया गया और सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाई गई।

🗣️ आसंदी पर बैठने को लेकर सत्ता और विपक्ष के पार्षदों में विवाद

जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, सत्ता पक्ष के पार्षदों ने प्रथम पदेन सभापति की अनुपस्थिति में सेकंड पैनलिस्ट के आसंदी पर बैठने को लेकर कड़ी आपत्ति जताई। इसके बाद नियमों का हवाला देते हुए सदन में नियम पढ़वाने को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षदों के बीच तीखी बहस छिड़ गई।

यह बहस जल्द ही अमर्यादित शब्दों और हाथापाई जैसी झड़प में तब्दील हो गई। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई कि सदन में पदेन सभापति गिर्राज कंसाना और एमआईसी (MIC) सदस्य अवधेश कौरव सहित अन्य पार्षद एक-दूसरे को देख लेने की धमकियाँ देते हुए नजर आए। हालांकि, बाद में सदन में मौजूद अन्य समझदार पार्षदों ने बीच-बचाव कर दोनों पक्षों को शांत कराया, जिसके बाद कार्यवाही को आगे बढ़ाया गया।

🌊 जलभराव की गंभीर समस्या को लेकर विपक्ष का धरना

सदन में शांति बहुत लंबे समय तक कायम नहीं रह सकी। जैसे ही शहर में बारिश के दौरान होने वाले जलभराव का मुद्दा सदन में उठा, विपक्ष के पार्षदों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। पार्षद बृजेश श्रीवास अपने तीन अन्य साथी पार्षदों के साथ सीधे आसंदी के पास जाकर धरने पर बैठ गए। हालात की गंभीरता और लगातार हो रहे हंगामे को देखते हुए अंततः सदन की कार्यवाही आगामी 10 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी गई।

🤝 झड़प और हंगामे पर क्या बोले जिम्मेदार जनप्रतिनिधि?

सदन में हाथापाई जैसी स्थिति बनने के बारे में जब एमआईसी सदस्य अवधेश कौरव से सवाल किया गया, तो उनका कहना था, "सदन में मौजूद सभी सदस्य एक बड़े परिवार की तरह हैं, और कई बार ऐसे परिवारों में भी आपसी गरमा-गरमी हो जाती है। लेकिन ऐसी नौबत कभी नहीं आएगी कि कोई एक-दूसरे पर हाथ उठा दे।"

वहीं, नगर परिषद के पूर्व नेता प्रतिपक्ष कृष्णराव दीक्षित का कहना था कि, परिषद के भीतर हाथापाई की स्थिति तो नहीं हुई, लेकिन पार्षद अत्यधिक आक्रोशित जरूर हो गए थे, जो कि सदन की गरिमा के अनुकूल नहीं है। सभी को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखनी चाहिए थी। नियमों की किताब में सभी प्रावधान मौजूद हैं जिनके तहत ही कार्यवाही होनी चाहिए थी। पार्षदों का इस तरह आक्रोशित होना एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। असल में विवाद जितना आसंदी को लेकर था, उससे कहीं अधिक गंभीर विवाद सदन में केबल खरीदी की रिपोर्ट को लेकर सामने आया, क्योंकि अलग-अलग तरह की रिपोर्ट्स आने की वजह से ऐसी स्थिति बनी।

📢 नगर निगम आयुक्त पर बरसे धरने पर बैठे विपक्षी पार्षद

उधर, धरने पर बैठे विपक्ष के पार्षद बृजेश श्रीवास ने आक्रामक रुख अपनाते हुए नगर निगम प्रशासन पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "ग्वालियर के हम सभी पार्षद अपने-अपने वार्डों में शहर की भीषण जलभराव की समस्या से लगातार जूझ रहे हैं, लेकिन नगर निगम आयुक्त अपनी टीआरपी बढ़ाने और केवल फोटो सेशन कराने में व्यस्त हैं। साफ पानी में खड़े होकर फोटो खिंचवा लेना और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देना कि हम सीवर की समस्या देखने आए हैं, इससे समाधान नहीं होता। हम आज धरने पर इसीलिए बैठे हैं क्योंकि शहर की गलियाँ गंदे पानी और सीवर से भरी पड़ी हैं। जनता हमसे शिकायत करती है कि नगर निगम का कोई भी अधिकारी उनका फोन तक नहीं उठाता। जलभराव की शिकायत के लिए फोन नंबर तो जारी कर दिए गए हैं, लेकिन उन पर कॉल रिसीव करने वाला कोई नहीं होता है।"

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User