मानपुर घाट की 106 करोड़ की सड़क 6 माह में हुई खराब, हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

मानपुर घाट की 106 करोड़ की नई सड़क छह महीने में ही गड्ढों में बदल गई। इंदौर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को 15 दिसम्बर तक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए

Nov 13, 2025 - 21:32
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मानपुर घाट की 106 करोड़ की सड़क 6 माह में हुई खराब, हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

(सेंधवा). 13 नवम्बर 2025 - राष्ट्रीय राजमार्ग-3 (इंदौर-मुम्बई मार्ग) पर मानपुर घाट के पास हाल ही में 106 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई 8.8 किलोमीटर लंबी वैकल्पिक सड़क निर्माण के सिर्फ छह महीने बाद ही गड्ढों में तब्दील हो गई है। सड़क की खराब गुणवत्ता और बार-बार हो रही दुर्घटनाओं को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, इंदौर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है।

न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को इस मामले में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं और 15 दिसम्बर 2025 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश जारी किया है।

क्या है मामला

सेंधवा के सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता बी.एल. जैन द्वारा दाखिल जनहित याचिका में बताया गया कि

राष्ट्रीय राजमार्ग-03 के राऊ-खलघाट सेक्शन (77 किमी हिस्सा) पर बीओटी परियोजना के तहत वर्ष 2009 में फोरलेन सड़क बनाई गई थी।

भेरूघाट और बाकानेर घाट के 9 किमी हिस्से में तकनीकी खामी के कारण सड़क की ग्रेडिएंट (ढलान) 6 मीटर रखी गई, जिससे वाहनों के ब्रेक फेल और क्लच प्लेट खराब होने जैसी घटनाएं आम हो गईं।

2009 से 2024 के बीच 3000 से अधिक दुर्घटनाएं हुईं और 450 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग स्थायी रूप से घायल हुए हैं।

वैकल्पिक सड़क भी निकली फेल

दुर्घटनाओं के समाधान के लिए NHAI ने मानपुर घाट के किनारे 8.8 किमी की नई सड़क का निर्माण करवाया था, जिसकी लागत 106 करोड़ रुपये रही।

हरियाणा की कंपनी ने जून 2023 में यह काम शुरू किया और 30 नवम्बर 2024 को सड़क को यातायात के लिए खोला गया।

लेकिन सिर्फ 6 माह बाद ही हल्की बारिश में सड़क जगह-जगह धंस गई और गड्ढों से भर गई।

15 सितम्बर की रात गड्ढों से बचने के चक्कर में एक कार डम्पर से टकरा गई, जिसमें खरगोन निवासी 24 वर्षीय युवक की मौत हो गई और दो साथी गंभीर रूप से घायल हुए।

हर दिन 19 हजार वाहन गुजरते हैं

इस मार्ग से प्रतिदिन करीब 19,000 से अधिक वाहन गुजरते हैं, जो प्रति किलोमीटर टोल टैक्स भी अदा करते हैं।

याचिकाकर्ता ने प्रधानमंत्री, सड़क परिवहन मंत्री और सचिव को शिकायत भेजी थी, लेकिन समाधान न होने पर उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।

याचिका में सड़क की गुणवत्ता की उच्च स्तरीय जांच और स्थायी सुधार की मांग की गई है।

हाईकोर्ट का सख्त रुख

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन ने पैरवी की।

न्यायालय ने केंद्र को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए. और 15 दिसम्बर तक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

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