MP-UP सीमा पर स्थित है अनोखा हनुमान मंदिर, जहाँ एक पैर से रुक गई थी धसान नदी की बाढ़

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर धसान नदी के किनारे स्थित 'हनुमान टोंग' अपनी असीम आस्था और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। जानिए इसका इतिहास।

Aug 08, 2026 - 19:56
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MP-UP सीमा पर स्थित है अनोखा हनुमान मंदिर, जहाँ एक पैर से रुक गई थी धसान नदी की बाढ़

सागर: मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की भौगोलिक सीमा पर बहने वाली धसान नदी अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ दोनों राज्यों की सीमा भी निर्धारित करती है। इस नदी के किनारे मौजूद विशाल पहाड़ और घने जंगल यहाँ की सुंदरता में चार चाँद लगा देते हैं। इसी नदी के तट पर एक बेहद दुर्गम पहाड़ी पर भगवान बजरंगबली विराजमान हैं। खास बात यह है कि यहाँ हनुमान जी का एक पैर नदी की तरफ झुका हुआ है, इसी विशेषता के कारण इस पवित्र स्थान को 'हनुमान टोंग' के नाम से जाना जाता है।

🙏 भगवान के आशीर्वाद से पूरी होती हैं भक्तों की सभी मनोकामनाएं

भगवान बजरंगबली का पैर नदी की तरफ झुके होने के पीछे एक बहुत पुरानी लोक मान्यता जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि एक बार धसान नदी में भयंकर बाढ़ आई हुई थी और चारों तरफ भारी तहाबी मची हुई थी। तब हनुमान जी ने अपने पैर से उस विकराल बाढ़ को रोक लिया था। तभी से इस जगह का नाम हनुमान टोंग पड़ गया। इस स्थान के बारे में यह भी प्रसिद्ध है कि जब मुगलों की सेना ने बुंदेलखंड केसरी महाराज छत्रसाल पर आक्रमण किया था, तो युद्ध पर जाने से पहले महाराज छत्रसाल यहीं आकर हनुमान जी का आशीर्वाद लेने पहुँचे थे और युद्ध जीतकर अपना राज्य बचाने में कामयाब रहे थे। आज भी यहाँ आने वाले प्रत्येक भक्त की मनोकामना पूरी होती है।

🌳 बाबा साहेब अंबेडकर वन्यजीव अभ्यारण्य के पास स्थित है यह स्थल

कुछ समय पहले सागर जिले में बनाए गए 'बाबा साहेब अंबेडकर वन्यजीव अभ्यारण्य' के अंतर्गत ही हनुमान टोंग का यह प्रसिद्ध क्षेत्र आता है। यह स्थान जिला मुख्यालय सागर से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सागर से बंडा होते हुए इस अद्भुत स्थान तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। यहाँ पहुँचते ही यहाँ का शांत और मनोरम प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपनी ओर वशीभूत कर लेता है।

🗣️ क्या कहते हैं स्थानीय ग्रामीण और पुराने लोग?

स्थानीय ग्रामीण सोहन सिंह बताते हैं कि, "हमारी दादी हमें बताती थीं कि बहुत पहले शहद तोड़ने वाले कुछ लोगों ने ग्रामीणों को बताया था कि इस घने जंगल और पहाड़ पर हनुमान जी की एक प्राचीन मूर्ति है। इसके बाद लोग बड़ी मशक्कत और जोखिम उठाकर मंदिर तक पहुँचे, तब जाकर लोगों को भगवान के दर्शन हुए। यहाँ विराजे हनुमान जी की एक टांग ने ही धसान नदी की बाढ़ को रोका था। महाराजा छत्रसाल के समय में यह स्थान बहुत प्रसिद्ध था और वे अक्सर यहाँ दर्शन करने आते थे।"

इसके अलावा, स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि क्षेत्र के एक राजा हुआ करते थे, जिन्होंने संतान प्राप्ति के लिए हनुमान जी से मन्नत माँगी थी और प्रतिपदा दीप जलाने का संकल्प लिया था। भगवान की कृपा से उनकी मनोकामना पूरी हुई, और आज उनका परिवार बंडा में निवास करता है।

🧗‍♂️ दुर्गम रास्ता और असीम आस्था का अनोखा केंद्र

स्थानीय पत्रकार देव कुमार यादव बताते हैं कि, "पहले उत्तर वनमंडल के अंतर्गत आने वाला यह क्षेत्र अब बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर वन्यजीव अभ्यारण्य का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। धसान नदी के किनारे खड़े विशाल पहाड़ पर हनुमान टोंग नाम का यह ऐतिहासिक स्थल स्थित है, जिसमें स्थानीय लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। हनुमान जी के दर्शन करना काफी कठिन और जोखिम भरा है, लेकिन पूरी आस्था के साथ श्रद्धालु अपनी जान हथेली पर रखकर इस दुर्गम पहाड़ पर चढ़ाई करते हैं। यहाँ तक कि पहाड़ की चट्टानें भी हिलती हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि कोई अनहोनी होने वाली है, लेकिन हनुमान जी की असीम कृपा से आज तक इस खतरनाक रास्ते पर किसी भी श्रद्धालु के साथ कोई दुर्घटना नहीं हुई है।"

⚔️ महाराजा छत्रसाल ने मुगलों से युद्ध जीतने से पहले लिया था आशीर्वाद

एक अन्य स्थानीय पत्रकार नीरज अवस्थी बताते हैं कि, "प्राकृतिक दृष्टिकोण से यह स्थान बेहद खूबसूरत है। एक तरफ उत्तर प्रदेश के गाँव नजर आते हैं तो दूसरी तरफ मध्य प्रदेश की सीमा दिखाई देती है। यहाँ के बारे में किंवदंती है कि हनुमान जी यहाँ लेटी हुई मुद्रा में विराजमान हैं। बुजुर्गों का कहना है कि प्राचीन काल में जब धसान नदी में भयंकर बाढ़ आई थी, तब हनुमान जी ने अपने पैर से उस पानी को रोक लिया था, इसीलिए यह स्थान 'हनुमान टोंग' कहलाया।"

उन्होंने आगे जानकारी दी कि यह स्थान बुंदेलखंड के महान योद्धा महाराजा छत्रसाल के इतिहास से भी गहराई से जुड़ा है। मुगलों के खिलाफ संघर्ष के दौरान राजा छत्रसाल आशीर्वाद लेने के लिए इसी पहाड़ी पर पहुँचे थे। यह पूरा स्थान एक घनी और ऊँची पहाड़ी पर बसा हुआ है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यहाँ पहाड़ में लोहे की जंजीरें बाँधकर भगवान तक पहुँचने का रास्ता बनाया गया है। इस पवित्र स्थान पर पहुँचने के लिए करीब 700 से 1000 मीटर तक की कठिन पहाड़ी चढ़ाई करनी पड़ती है।

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