सतना में नियमों को ताक पर रखकर छात्राओं को दिखाया गया पोस्टमार्टम, सिविल सर्जन ने दिए कार्रवाई के निर्देश
सतना जिले के जिला चिकित्सालय के पोस्टमार्टम हाउस में स्कूली छात्राओं के प्रवेश का मामला सामने आया है। नियमों के उल्लंघन पर सिविल सर्जन ने कार्रवाई की तैयारी की है।
सतना : मध्य प्रदेश के सतना जिले से एक हैरान कर देने वाला और नियम विरुद्ध मामला सामने आया है। जब कुछ स्कूली छात्राएं सीधे जिला चिकित्सालय के पोस्टमार्टम हाउस के अंदर दाखिल हुईं, तो वहाँ तैनात अस्पताल के कर्मचारी भी हैरान रह गए। खास बात यह थी कि उन छात्राओं के साथ चार डॉक्टर्स भी अंदर मौजूद थे। इसके बाद डॉक्टर्स ने एक शव का पोस्टमार्टम करना शुरू किया और सामने खड़ी स्कूली छात्राएं बड़े गौर से पोस्टमार्टम करने का पूरा तरीका देखती रहीं। डॉक्टर्स ने उन्हें बाकायदा एक-एक चरण (Step-by-step) समझाकर बताया कि पोस्टमार्टम कैसे किया जाता है।
📋 पोस्टमार्टम कक्ष के अंदर मौजूद रहीं दो स्कूली छात्राएं
जैसे ही अस्पताल के कर्मचारियों को इस बात की भनक लगी, तो पूरे अस्पताल परिसर में सनसनी फैल गई। छात्राओं के पोस्टमार्टम हाउस के अंदर जाने और वहाँ से बाहर निकलने के वीडियो भी अब सामने आ चुके हैं। यह घटना बीते शुक्रवार की बताई जा रही है। शव परीक्षण का यह कार्य दोपहर करीब 1:45 बजे शुरू हुआ था, जो दोपहर 3:35 बजे तक चला। इस दौरान डॉक्टर्स की पूरी टीम पोस्टमार्टम कक्ष के अंदर थी और इस पूरी प्रक्रिया के दौरान दो स्कूली छात्राएं भी लगातार अंदर ही मौजूद रहीं। यह पूरा मामला दुर्गेश नामक एक युवक की मौत के बाद किए गए शव परीक्षण के दौरान का है। पोस्टमार्टम कक्ष के भीतर मेडिकल कॉलेज के डॉ. प्रीतेश शुक्ला सहित कुल तीन डॉक्टर अपनी ड्यूटी पर मौजूद थे।
⚖️ नियमों के अनुसार कोई भी बाहरी व्यक्ति नहीं आ सकता अंदर
चिकित्सा विभाग और अस्पताल की निर्धारित गाइडलाइन के मुताबिक, पोस्टमार्टम प्रक्रिया के दौरान कोई भी बाहरी व्यक्ति या आम नागरिक अंदर प्रवेश नहीं कर सकता है। ऐसे में स्कूल के स्टूडेंट्स का पोस्टमार्टम रूम के अंदर रहना बेहद आपत्तिजनक और गंभीर मामला है। नियमों के तहत केवल मेडिकल कॉलेज के अधिकृत छात्र ही यहाँ आ सकते हैं, इसके अलावा किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश वर्जित होता है।
छात्राओं का इस तरह पोस्टमार्टम हाउस के अंदर मौजूद रहना पूरी तरह से नियमों के विरुद्ध है। यदि किसी भी विद्यालय, संस्थान या डॉक्टर द्वारा ऐसा कृत्य किया जाता है, तो यह सीधे तौर पर बाल अधिकारों (Child Rights) का भी उल्लंघन माना जाता है। ऐसी स्थिति में संबंधितों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई तक की जा सकती है।
🏛️ सिविल सर्जन ने मामले को लिया संज्ञान में, कार्रवाई की तैयारी
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह ने बताया, "यह पूरा गंभीर मामला मेरे संज्ञान में आ चुका है। डॉ. प्रीतेश शुक्ला मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर हैं और उस दौरान पोस्टमार्टम कक्ष में उनकी ही ड्यूटी थी। पोस्टमार्टम कार्य के दौरान दो लड़कियाँ अंदर कैसे गईं, जब इसकी जानकारी ली तो मेरे कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें अस्पताल के स्टाफ ने नहीं, बल्कि डॉ. प्रीतेश शुक्ला द्वारा ही अंदर जाने की अनुमति दी गई थी।"
उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की लापरवाही के लिए मैंने संबंधित डॉक्टर को कड़ी समझाइश दे दी है और स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा मैं इस मामले में लिखित रूप से भी अनुशासनात्मक कार्रवाई कर रहा हूँ। नियमों के अनुसार कोई भी अनधिकृत व्यक्ति पोस्टमार्टम कक्ष में प्रवेश नहीं कर सकता, केवल मेडिकल कॉलेज के पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को ही इसकी अनुमति होती है। इस पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक सूचना मेडिकल कॉलेज के डीन को भी दे दी गई है।
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