त्योहारों से पहले मिलावटखोरों पर शिकंजा, 25 हजार लीटर घी और करोड़ों की संपत्ति जब्त
मध्य प्रदेश में मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी है। मुरैना से लेकर इंदौर और भोपाल तक नकली मावा, पनीर और घी के खिलाफ बड़े खुलासे हुए हैं।
मुरैना : मध्य प्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट के आंकड़े साल-दर-साल तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। खासकर त्यौहारी सीजन के दौरान मिलावटी और नकली मावा, पनीर बड़े पैमाने पर खुले बाजार में खपाया जाता है। यह स्थिति तब है जब मध्य प्रदेश प्रशासन मिलावटखोरों के खिलाफ लगातार सख्ती बरत रहा है। वर्तमान में देश भर में मिलावटखोरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के मामले में मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर बना हुआ है।
⚠️ मिलावटी मावा और पनीर के लिए कुख्यात है चंबल अंचल
खाद्य मिलावट के मामलों में सबसे ज्यादा केस मावा और पनीर से जुड़े होते हैं, और इसके लिए मध्य प्रदेश का चंबल अंचल सबसे ज्यादा बदनाम माना जाता है। पूरे मध्य प्रदेश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी मुरैना और आसपास के इलाकों से नकली व मिलावटी मावा-पनीर की भारी सप्लाई की जाती है। रक्षाबंधन, होली और दीपावली जैसे बड़े त्योहारों के समय ये मिलावट माफिया सबसे ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं। इसके अलावा राज्य के अन्य हिस्सों में भी नकली मावा-पनीर की कई फैक्ट्रियां पकड़ी जा चुकी हैं, और अब व्यापक स्तर पर नकली घी भी बाजार में उतारा जा रहा है।
💰 मुरैना में मिठाइयों में मिलावट पर 23 लोगों पर 1 करोड़ का जुर्माना
इसी साल फरवरी माह के दौरान मुरैना जिले में मिठाइयों और खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वाले 23 कुख्यात लोगों पर 1 करोड़ रुपए से अधिक का भारी-भरकम जुर्माना लगाया गया था। उस दौरान की गई जाँच में दूध, मावा, पनीर, मिल्क केक, वनस्पति घी, पाम ऑयल, रिफाइंड तेल, डिटर्जेंट युक्त खतरनाक घोल और अन्य रसायन पूरी तरह अमानक पाए गए थे। इन मिलावटी मिठाइयों और मावा विक्रेताओं के खिलाफ प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की थी, लेकिन इसके बावजूद मुरैना और उसके आसपास के क्षेत्रों में मिलावट का यह अवैध खेल लगातार जारी है और हर साल भारी मात्रा में नकली माल जब्त किया जाता है।
🚨 भोपाल में 'जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स' पर ED का बड़ा एक्शन
इसी साल मार्च और अप्रैल के महीनों में मध्य प्रदेश में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट को बेनकाब करते हुए बेहद सख्त कार्रवाई की गई। मध्य प्रदेश के इतिहास में मिलावटखोरी का यह सबसे बड़ा और पहला मामला था, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत सीधे तौर पर मोर्चा संभाला। 'जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स' के मैनेजिंग डायरेक्टर किशन मोदी और सीईओ सुनील त्रिपाठी को गिरफ्तार किया गया। इस कंपनी पर लगभग 20.59 करोड़ रुपए के बड़े घोटाले का गंभीर आरोप है। जाँच में सामने आया कि दूध के असली फैट की जगह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाम ऑयल और खतरनाक केमिकल्स मिलाकर नकली पनीर, चीज और अन्य दुग्ध उत्पाद तैयार किए जा रहे थे।
🛢️ इंदौर और भोपाल में मिलावटी घी के बड़े गोदामों पर छापे
इसी माह इंदौर शहर में भी मिलावटखोरों के खिलाफ ऐतिहासिक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। शहर के 'गोवर्धन घी' के डिपो पर अचानक छापा मारा गया, जहाँ करीब 25,000 लीटर संदिग्ध स्टॉक की बिक्री और सप्लाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई, क्योंकि वहाँ लिए गए सैंपल जाँच में संदिग्ध पाए गए थे। इसी दौरान भोपाल में भी 'धौलपुर फ्रेश' और 'गोवर्धन' ब्रांड का संदिग्ध घी बड़ी मात्रा में जब्त किया गया। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने 'श्री राम डिस्ट्रीब्यूटर्स' के गोदाम पर भी छापेमारी की, जहाँ से 20 क्विंटल से अधिक देसी घी का अवैध स्टॉक बरामद किया गया। इसके साथ ही उज्जैन में भी कम कीमत वाले 'मिल्क क्रीम' घी की जब्ती करते हुए करीब 1,400 लीटर संदिग्ध देसी घी बरामद किया गया है।
🔍 मुरैना में फूड सेफ्टी टीम के ताबड़तोड़ छापे और घी जब्त
रक्षाबंधन के पावन पर्व से ठीक पहले मुरैना में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटखोरों के खिलाफ तगड़ा शिकंजा कसा है। एक विशेष अभियान के तहत विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर अचानक छापेमारी कर घी के कई नमूने लिए गए। इस पूरी कार्रवाई के दौरान विभिन्न ब्रांड्स का कुल 625 किलो घी जब्त किया गया, जिसकी बाजार में कुल कीमत 4 लाख रुपए से अधिक आंकी गई है। यह कार्रवाई राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भोपाल में पहले भेजे गए कुछ नमूनों के 'असुरक्षित' पाए जाने के बाद अमल में लाई गई। मुरैना के मारकंडेश्वर बाजार स्थित महेशचंद्र प्रदीप कुमार की दुकान से 'धौलपुर फ्रेश' ब्रांड के विभिन्न पैकेटों के नमूने लिए गए, और मौके से कुल 625 किलो घी जब्त किया गया।
📋 लैब रिपोर्ट आने तक पूरी तरह जब्त रहेगा संदिग्ध घी
इसके अलावा तेलीपाड़ा स्थित 'एसएम ट्रेडिंग कंपनी' से 'उमंग' ब्रांड घी का नमूना लिया गया, जबकि जीवाजीगंज स्थित 'महाकाल एंटरप्राइजेज' से गोवर्धन गाय के घी का नमूना लेकर उसके कई पैकेट जब्त किए गए। जौरा के अस्पताल रोड स्थित 'जगदीश किराना स्टोर' पर भी टीम पहुँची, जहाँ से धौलपुर फ्रेश घी के नमूने और पैकेट जब्त किए गए। खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार भोपाल लैब की जाँच में द्वारकेश, शगुन, गोवर्धन, दानेदार, भूमि, धौलपुर फ्रेश, वास्तु और गोपी श्री ब्रांड के घी के नमूने असुरक्षित पाए गए हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी अवनीश गुप्ता ने बताया कि सभी सैंपल जाँच के लिए भेज दिए गए हैं और रिपोर्ट आने तक यह सारा घी जब्त स्थिति में रहेगा।
📅 मध्य प्रदेश में हाल ही में हुई प्रमुख कार्रवाईयों का संक्षिप्त विवरण
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फरवरी 2026 : मुजफ्फरनगर से रतलाम सप्लाई किया जाने वाला संदिग्ध गाय का देसी शुद्ध घी मानते हुए 1,600 लीटर घी जब्त किया गया।
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फरवरी 2026 : मुरैना में मिठाइयों में मिलावट करने वाले 23 कारोबारियों पर 1 करोड़ रुपए का भारी जुर्माना ठोका गया।
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अप्रैल 2026 : मिलावट के गंभीर मामले में ED ने जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स के एमडी किशन मोदी और सीईओ सुनील त्रिपाठी को गिरफ्तार किया।
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अगस्त 2026 : इंदौर में 'गोवर्धन घी' संदिग्ध मिलने पर लगभग 25,000 लीटर स्टॉक की बिक्री और सप्लाई पर तत्काल रोक लगाई गई।
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अगस्त 2026 : उज्जैन में सस्ते 'मिल्क क्रीम' घी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 1,400 लीटर संदिग्ध देसी घी बरामद किया गया।
📞 खाद्य सामग्री में मिलावट की शिकायत कहाँ और कैसे दर्ज कराएं?
यदि आपको भी अपने आसपास किसी भी खाद्य सामग्री में मिलावट या किसी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका है, तो आप नीचे दिए गए माध्यमों से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं:
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राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर : FSSAI के नंबर 1800-11-2100 पर कॉल कर सकते हैं।
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आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल : FSSAI Food Safety Connect पोर्टल के जरिए अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
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ईमेल आईडी : आप अपनी शिकायत tollfree@fssai.gov.in पर मेल कर सकते हैं।
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व्हाट्सएप नंबर : +91 98686 86868 पर भी सीधे शिकायत भेजी जा सकती है।
🔍 असली और नकली मावे की पहचान करने के आसान तरीके
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गंध (Smell) से पहचान : असली मावा शुद्ध दूध से तैयार होता है, इसलिए इसे पास से सूंघने पर इसमें प्राकृतिक दूध की सौंधी महक आती है। वहीं, मिलावटी या नकली मावे में दूध की कोई महक नहीं होती, बल्कि केमिकल जैसी दुर्गंध आ सकती है।
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हाथ पर रगड़कर जाँच : थोड़ा सा मावा लेकर हथेली पर उंगलियों से रगड़ें। असली मावा रगड़ने पर खुद-बखुद घी या चिकनाई छोड़ने लगता है, जबकि नकली मावा हथेली पर रगड़ने से केमिकल की महक देने लगता है और बिखरने लगता है।
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मुंह में स्वाद और चिपचिपाहट : असली मावा थोड़ा सा लेकर मुंह में रखने पर वह आसानी से घुल जाता है और मुंह के अंदर चिपकता नहीं है, साथ ही उसका स्वाद कच्चे दूध जैसा होता है। इसके विपरीत नकली मावा मुंह में रखते ही दांतों और मसूड़ों से चिपकने लगता है।
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रंग (Color) से पहचान : असली मावा सामान्यतः हल्के भूरे (Dark Brown) रंग का होता है। यदि मावा जरूरत से ज्यादा सफेद दिखाई दे रहा है, तो उसके नकली होने की पूरी संभावना है। यदि मावे का रंग असामान्य रूप से पीला है, तो वह भी मिलावट का स्पष्ट संकेत हो सकता है।
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